-Friday World 14 मार्च 2026
जैसे कोरोना में ऑक्सीजन और नोटबंदी में लाइनें लगी थीं – देश मजबूती से मुकाबला कर रहा है"
14 मार्च 2026 को दिल्ली में आयोजित एक ऊर्जा और सुरक्षा संबंधी उच्च-स्तरीय समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में चल रहे एलपीजी संकट पर खुलकर बात की। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध के कारण हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई है और भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पीएम मोदी ने न केवल संकट की गंभीरता बताई, बल्कि कुछ तत्वों पर भी तीखा प्रहार किया, जिन्हें उन्होंने "पैनिक क्रिएट करने" और "एजेंडा चलाने" का दोषी ठहराया।
प्रधानमंत्री ने कहा:
"हमारे बहुत ही पास में एक बड़ा युद्ध चल रहा है। इस युद्ध ने पूरी दुनिया को बहुत बड़े ऊर्जा संकट में डाल दिया है। एक देश के तौर पर यह बहुत अहम है कि हम इसका मुकाबला कैसे करते हैं।" उन्होंने आगे कहा:
"आजकल एलपीजी को लेकर बहुत चर्चा हो रही है। कुछ लोग हैं जो पैनिक क्रिएट करने का प्रयास कर रहे हैं। अपना एजेंडा चलाना चाहते हैं। मैं इस समय उन पर राजनीतिक टिप्पणी नहीं करना चाहता। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि ऐसा करके वो जनता के सामने खुद तो एक्सपोज हो ही रहे हैं, पूरे देश का भी बहुत बड़ा नुकसान कर रहे हैं।"
पीएम मोदी ने कोरोना काल के ऑक्सीजन संकट और 2016 की नोटबंदी के दौरान बनी परिस्थितियों से तुलना करते हुए कहा: "जिस तरह कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी को लेकर अफवाहें फैलाई गईं, सोशल मीडिया पर पैनिक फैलाया गया और लोगों को लगने लगा कि सब कुछ खत्म हो गया—उसी तरह आज एलपीजी को लेकर भी कुछ लोग वही खेल खेल रहे हैं। नोटबंदी के समय भी लाइनों में लगे लोगों की तस्वीरें दिखाकर देश को बदनाम करने की कोशिश हुई थी। लेकिन हमने हर बार संकट से मजबूती के साथ बाहर निकलकर दिखाया है। आज भी भारत इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।"
ईरान युद्ध से उपजा संकट: एलपीजी पर असर क्यों?
ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध ने फरवरी 2026 से ही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। हॉर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया का 20-30% क्रूड ऑयल और काफी मात्रा में LNG गुजरता है, लगभग बंद हो चुका है। भारत का 68% से ज्यादा LNG और 91% LPG आयात मिडिल ईस्ट (मुख्य रूप से कतर और UAE) से होता है। इस बंदी के कारण:
- LNG टैंकरों की आवाजाही रुक गई।
- घरेलू सिलेंडर रिफिल में देरी होने लगी। - कई शहरों में ब्लैक मार्केट और ऊंची कीमतों की खबरें आईं।
- सोशल मीडिया पर "एलपीजी खत्म हो गया", "सिलेंडर नहीं मिल रहा" जैसी पोस्ट वायरल हुईं।
पीएम मोदी ने इन्हीं अफवाहों को "पैनिक क्रिएट करने" का हिस्सा बताया और कहा कि सरकार ने पहले से ही वैकल्पिक व्यवस्था कर ली है।
सरकार की तैयारियां: क्या-क्या कदम उठाए गए? प्रधानमंत्री ने समिट में कई कदमों का जिक्र किया:
- रूस से क्रूड ऑयल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की सप्लाई बढ़ाई गई।
- अमेरिका और वेस्ट अफ्रीका से अतिरिक्त क्रूड आयात शुरू।
- सिंगापुर और अन्य एशियाई टर्मिनलों से फ्लोटिंग स्टोरेज में मौजूद स्टॉक को तेजी से भारत लाया जा रहा है।
- घरेलू रिफाइनरियों में स्टॉक 65-70 दिनों के लिए सुरक्षित है।
- एलपीजी के लिए विशेष रेल और सड़क परिवहन व्यवस्था शुरू।
- पब्लिक से अपील: "जरूरत से ज्यादा स्टॉक न करें, सामान्य खरीदारी जारी रखें।"
पीएम ने कहा जैसे UAE से आए ऑक्सीजन टैंकर पर हमने रिलायंस के बैनर लगा दिए थे
: "कोरोना काल में ऑक्सीजन प्लांट्स की संख्या बढ़ाकर हमने संकट पार किया। नोटबंदी के समय कैश की कमी को डिजिटल पेमेंट से हल किया। आज भी हमारी ऊर्जा सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा।"
कोरोना और नोटबंदी से तुलना: क्यों की गई? प्रधानमंत्री ने जानबूझकर पुराने संकटों का जिक्र किया ताकि जनता को याद दिलाया जा सके कि अफवाहें और पैनिक कितना नुकसान पहुंचाते हैं:
- कोरोना ऑक्सीजन संकट (2021): सोशल मीडिया पर "ऑक्सीजन खत्म हो गई", "अस्पतालों में मौतें" जैसी खबरें वायरल हुईं। कई जगहों पर अफवाहों से दंगे जैसी स्थिति बनी। लेकिन सरकार ने 24 घंटे में हजारों ऑक्सीजन प्लांट्स लगाए और आयात बढ़ाया।
- नोटबंदी (2016): नए नोट छपने में देरी से ATM में लाइनें लगीं। विपक्ष ने इसे "आर्थिक आपदा" बताया, लेकिन बाद में डिजिटल इंडिया और कैशलेस इकोनॉमी मजबूत हुई।
पीएम का संदेश साफ था—अफवाहें फैलाने वाले लोग वही हैं जो हर संकट में राजनीति करते हैं। जनता को शांत रहना चाहिए और सरकार पर भरोसा रखना चाहिए।
वैश्विक संकट में भारत की स्थिति पीएम मोदी ने कहा: "आज जो वैश्विक संकट आया है, उसके प्रभाव से कोई भी देश अछूता नहीं है। कम-अधिक मात्रा में हर कोई इसका शिकार हुआ है। लेकिन भारत ने हमेशा संकटों को अवसर में बदला है और इस बार भी ऐसा ही करेगा।"
वर्तमान आंकड़े:
- ब्रेंट क्रूड: 102-105 डॉलर प्रति बैरल
- भारत का दैनिक क्रूड उपभोग: 5.2-5.5 मिलियन बैरल
- रूसी क्रूड आयात: मार्च में 1.5 मिलियन बैरल/दिन (रिकॉर्ड स्तर)
- घरेलू एलपीजी स्टॉक: 45-50 दिनों का सुरक्षित
पैनिक नहीं, संकल्प की जरूरत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संबोधन सिर्फ एलपीजी संकट पर नहीं, बल्कि देश की सामूहिक मानसिकता पर भी था। जब दुनिया दो हिस्सों में बंट रही है, युद्ध की आग फैल रही है और ऊर्जा संकट गहरा रहा है—तब अफवाहें फैलाना सबसे बड़ा खतरा है। पीएम ने स्पष्ट किया कि सरकार हर मोर्चे पर तैयार है और जनता को शांत रहकर सहयोग करना चाहिए।
जैसे कोरोना में ऑक्सीजन और नोटबंदी में कैश की कमी को पार किया गया, वैसे ही इस वैश्विक ऊर्जा संकट को भी भारत मजबूती से पार करेगा। सवाल सिर्फ यह है—क्या हम अफवाहों के बहकावे में आएंगे या एकजुट होकर संकट से लड़ेंगे?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 14 मार्च 2026