-Friday World March 28,2026
मध्य पूर्व में ईरान के साथ जारी तीव्र संघर्ष अब एक महीने पूरा होने को है। शुरू में अमेरिका और इजरायल की सैन्य श्रेष्ठता स्पष्ट नजर आ रही थी, लेकिन पुख्ता रक्षा सूत्रों और विश्लेषकों के अनुसार अब स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही। गोला-बारूद के स्टॉकपाइल पर भारी दबाव, एयर डिफेंस इंटरसेप्शन की तेज खपत, बहु-मोर्चीय तैनाती और सैनिकों की थकान ने दोनों देशों को संसाधन और रणनीतिक दोनों मोर्चों पर चुनौती दी है। ईरान के लगातार बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है।
रक्षा विशेषज्ञ सेथ जी. जोन्स (Seth G. Jones), जो सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के डिफेंस एंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट के प्रमुख हैं, ने साफ कहा है कि अमेरिका में गोला-बारूद की कमी “सोच से ज्यादा गंभीर” है। लगातार हाई-इंटेंसिटी ऑपरेशंस, THAAD और पैट्रियट जैसे एयर डिफेंस इंटरसेप्टर्स की खपत और लंबी तैनाती ने अमेरिकी स्टॉकपाइल को काफी हद तक खाली कर दिया है। 2025 में ही ईरान के खिलाफ कुछ दिनों के ऑपरेशंस में अमेरिका ने अपने THAAD मिसाइलों का एक चौथाई हिस्सा इस्तेमाल कर लिया था। अब 2026 के इस संघर्ष में स्थिति और जटिल हो गई है।
इजरायल की स्थिति भी अभूतपूर्व दबाव में है। इजरायली सेना (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जामिर (Eyal Zamir) ने हाल ही में सुरक्षा कैबिनेट को चेतावनी दी कि सेना “खुद पर ढह सकती है” (collapse in on itself) अगर सैनिकों की कमी और रिजर्व फोर्स की थकान को तुरंत नहीं संबोधित किया गया। उन्होंने “10 रेड फ्लैग्स” उठाते हुए कहा कि बिना नई भर्ती कानून, रिजर्व ड्यूटी कानून और अनिवार्य सेवा विस्तार के IDF रूटीन मिशन्स के लिए भी तैयार नहीं रह पाएगा।
अमेरिका का गोला-बारूद संकट: “वार ऑफ स्टॉकपाइल्स” सेथ जी. जोन्स की हालिया राय (वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित) में कहा गया है कि ईरान संघर्ष अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस की कमजोरियों को उजागर कर रहा है। अमेरिका को न सिर्फ ईरान के खिलाफ, बल्कि संभावित चीन (ताइवान) या रूस के साथ बड़े संघर्ष के लिए भी पर्याप्त मुनिशन्स की जरूरत है। मुख्य चुनौतियां:
- THAAD और पैट्रियट इंटरसेप्टर्स की तेज खपत: ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन्स की बौछार को रोकने में ये महंगे सिस्टम्स तेजी से खत्म हो रहे हैं।
- ऑफेंसिव मुनिशन्स की कमी: JASSM जैसे लंबी दूरी के क्रूज मिसाइलों और अन्य प्रेसिजन गाइडेड मुनिशन्स का स्टॉक कम हो रहा है।
- सप्लाई चेन की समस्या: उत्पादन बढ़ाने में सालों लग सकते हैं। आउटसोर्सिंग और कॉन्सन्ट्रेशन ऑफ प्रोडक्शन ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
- रणनीतिक ट्रेड-ऑफ: यूक्रेन को दिए जा रहे हथियारों को मिडिल ईस्ट की ओर मोड़ने पर भी चर्चा हो रही है, जो अन्य मोर्चों पर कमजोरी पैदा कर सकता है।
जोन्स का मानना है कि एक हफ्ते से ज्यादा लंबे हाई-इंटेंसिटी संघर्ष में अमेरिका को “पेन” महसूस होने लगेगा। ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता अभी भी बड़ी है, और उसके प्रॉक्सी (हिजबुल्लाह, हूती, इराकी मिलिशिया) बहु-मोर्चीय हमले जारी रखे हुए हैं।
इजरायल का सैनिक संकट: रिजर्व थकान और मैनपावर शॉर्टेज
IDF चीफ एयाल जामिर ने कैबिनेट को बताया कि सेना में करीब 12,000 सैनिकों की कमी है, खासकर कॉम्बैट ट्रूप्स में। लगातार गाजा, लेबनान, सीरिया और अब ईरान मोर्चों पर तैनाती ने रिजर्व फोर्स को बार-बार बुलाना पड़ रहा है। मुख्य मुद्दे:
- ऑपरेशनल थकान: रिजर्व सैनिक थक चुके हैं। कई को PTSD (पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) की शिकायत है।
- हैरेडी (अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स) भर्ती: इजरायल में अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदियों को सैन्य सेवा से छूट है। जामिर ने कहा कि अगर इनमें से सिर्फ एक पांचवें हिस्से को भी भर्ती किया जाए तो समस्या काफी हद तक हल हो सकती है, लेकिन राजनीतिक विवाद इसे मुश्किल बना रहा है।
- बहु-मोर्चीय युद्ध: ईरान के अलावा लेबनान में हिजबुल्लाह और यमन में हूती हमलों से संसाधन बंट रहे हैं। इंटरसेप्टर्स की कमी भी इजरायल को परेशान कर रही है।
- रिजर्व सिस्टम की स्थिरता: जामिर ने चेतावनी दी कि बिना नई कानून के रिजर्व सिस्टम टिक नहीं पाएगा।
इजरायली विपक्षी नेता भी चेतावनी दे रहे हैं कि सेना “लिमिट से आगे” खिंच चुकी है और बहु-मोर्चीय युद्ध बिना स्पष्ट रणनीति के खतरनाक है।
ईरान की रणनीति: आक्रामकता और आकर्षण युद्ध ईरान ने “ट्रू प्रॉमिस” सीरीज के तहत मिसाइल और ड्रोन हमलों को जारी रखा है। हाल के दिनों में “वेव 85” जैसी बड़ी बौछार में क्लस्टर मुनिशन्स और लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल देखा गया। ईरान का लक्ष्य स्पष्ट है – अमेरिका-इजरायल को “वार ऑफ अट्रिशन” (attrition war) में घसीटना, जहां महंगे इंटरसेप्टर्स की खपत से दुश्मन का स्टॉक कम हो जाए।
ईरान के प्रॉक्सी फोर्सेस (हूती, हिजबुल्लाह, इराकी मिलिशिया) भी सक्रिय हैं। इससे अमेरिका-इजरायल को संसाधन कई मोर्चों पर बांटने पड़ रहे हैं। CENTCOM कमांडर ने कहा कि अमेरिका-इजरायल ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन प्रोडक्शन फैसिलिटीज का दो-तिहाई हिस्सा नष्ट कर दिया है, लेकिन ईरान की मौजूदा इन्वेंट्री अभी भी काफी बड़ी है।
व्यापक प्रभाव: रणनीतिक कमजोरी और भविष्य की चुनौतियां
1. इंडो-पैसिफिक पर असर अमेरिका की मुख्य चिंता चीन के साथ ताइवान संकट है। मिडिल ईस्ट में मुनिशन्स की खपत से इंडो-पैसिफिक की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।
2. आर्थिक बोझ: इंटरसेप्शन की लागत बहुत ऊंची है। एक THAAD मिसाइल की कीमत करोड़ों डॉलर में है, जबकि ईरान के ड्रोन्स सस्ते हैं।
3. राजनीतिक दबाव: इजरायल में रिजर्व सैनिकों और विपक्ष से सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। अमेरिका में भी कांग्रेस को डिफेंस इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए तेज कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।
4. क्षेत्रीय अस्थिरता: लाल सागर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और फारस की खाड़ी में शिपिंग प्रभावित हो रही है, जिससे वैश्विक तेल कीमतें बढ़ सकती हैं।
क्या है आगे का रास्ता? रक्षा विश्लेषक मानते हैं कि यह “स्टॉकपाइल्स की जंग” बन गई है। अमेरिका और इजरायल को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नए सहयोगियों से सपोर्ट लेने और रणनीति में बदलाव लाने की जरूरत है। कुछ रिपोर्ट्स में ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान को 15-पॉइंट प्रस्ताव देने की बात कही गई है, जिसमें न्यूक्लियर प्रोग्राम बंद करना, प्रॉक्सी सपोर्ट रोकना और होर्मुज में नेविगेशन की स्वतंत्रता शामिल है। ईरान ने इसे फिलहाल खारिज कर दिया है।
दूसरी ओर, ईरान “प्रतिरोध की धुरी” को एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है। हूती और अन्य प्रॉक्सी का शामिल होना संघर्ष को और लंबा खींच सकता है।
मिडिल ईस्ट की यह जंग अब सिर्फ सैन्य श्रेष्ठता की नहीं, बल्कि संसाधनों, थकान और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता की परीक्षा बन गई है। अमेरिका और इजरायल की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं दिख रही, लेकिन उनकी तकनीकी और हवाई श्रेष्ठता अभी भी महत्वपूर्ण कारक है। ईरान की आक्रामकता ने दिखाया कि आधुनिक युद्ध में सस्ते ड्रोन्स और मिसाइलें महंगे डिफेंस सिस्टम्स को भी थका सकती हैं।
भविष्य में दोनों पक्षों को कूटनीति और सैन्य संतुलन के बीच समझौता करना पड़ सकता है। फिलहाल, गोला-बारूद की कमी और सैनिक थकान दोनों देशों के लिए बड़ी चेतावनी है – यह याद दिलाती है कि कोई भी युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि निरंतर सपोर्ट और संसाधनों से जीता जाता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 28,2026