Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Saturday, 21 March 2026

"बेबाकी की बिक्री: जब साइकिल निकालने वाले सितारे अब 'साइलेंस' की सवारी कर रहे हैं!"

"बेबाकी की बिक्री: जब साइकिल निकालने वाले सितारे अब 'साइलेंस' की सवारी कर रहे हैं!"
-Friday World- March- 22,2026
एक समय था जब पेट्रोल के 20 पैसे बढ़ने पर बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारे आग उगलते थे, साइकिल निकालने की बात करते थे, रुपए के गिरने पर रोते-धोते ट्वीट करते थे। आज पेट्रोल-डीजल दोगुने, डॉलर -94 के पार, रुपया डूबता जा रहा है—मगर इनकी जुबान पर ताला, आंवले पड़ गए!

 एक जमाना था जब अनुपम खेर, परेश रावल, अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार और जूही चावला जैसे सितारे जनता के 'बोलने वाले' माने जाते थे। सोशल मीडिया पर उनकी बेबाकी की धूम रहती थी। कांग्रेस की यूपीए सरकार के समय अगर पेट्रोल-डीजल में महज 20-50 पैसे की बढ़ोतरी होती, तो ये लोग तुरंत ट्विटर (अब X) पर उतर आते। 

अनुपम खेर ने एक बार ट्वीट किया था: "अपने ड्राइवर से पूछा, 'देर क्यों हुई?' बोला, 'साइकिल से आया।' 'मोटरसाइकिल कहाँ है?' 'घर पर शोपीस बनकर रखी है, सर!'" हंसी-मजाक में सरकार पर तंज कसते हुए। अक्षय कुमार ने लिखा था, "लड़कों, अब साइकिल साफ कर लो, सड़क पर निकलने का समय आ गया!" अमिताभ बच्चन और जूही चावला भी रुपए के गिरते मूल्य पर चिंता जताते, व्यंग्य करते। परेश रावल तो खुलेआम सरकार की आलोचना में आगे रहते।

 उन दिनों इनकी आवाज में डर नहीं था। कोई सीबीआई, ईडी का डर नहीं। कोई केस, कोई नोटिस नहीं। ये लोग खुलकर बोलते थे क्योंकि वो जनता की आवाज बनना चाहते थे। जनता की तकलीफ उनकी तकलीफ लगती थी। पेट्रोल पंप पर 20 पैसे बढ़ने से गाड़ी में आग लगाने की बात तक हो जाती थी—बेशक मजाक में, लेकिन संदेश साफ था: "महंगाई बर्दाश्त नहीं!" 

फिर आया 2014। सत्ता बदली। मोदी सरकार आई। पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगे। 2014 में जहां पेट्रोल 70-72 रुपये था, आज 100 के पार कई राज्यों में। डीजल भी 90-95 के आसपास। घरेलू गैस सिलेंडर 800 से 1100+ हो गया। डॉलर 60 से बढ़कर 85-90 के बीच डांस कर रहा है, कभी-कभी 100 की ओर झांकता है। रुपया लगातार गिर रहा है—इकोनॉमिक सर्वे में भी चिंता जताई जा रही है।

 मगर इन सितारों की जुबान? खामोश। बिल्कुल खामोश। वो बेबाकी कहाँ गई जो पहले 20 पैसे पर फूट पड़ती थी? अब सैकड़ों रुपये की बढ़ोतरी पर भी एक शब्द नहीं। कोई ट्वीट नहीं, कोई स्टेटमेंट नहीं, कोई व्यंग्य नहीं। क्यों? 

क्योंकि अब सिक्कों की खनक बोल रही है।

 - अनुपम खेर अब सरकारी विज्ञापनों में आवाज देते हैं, प्रचार करते हैं। 'द कश्मीर फाइल्स' जैसी फिल्मों में भूमिका निभाकर 'देशभक्ति' का ब्रांड बन चुके हैं। उनकी जुबान अब सिस्टम के साथ तालमेल बिठा चुकी है। 

- अक्षय कुमार 'प्रोपगैंडा' फिल्मों के बाद अब 'पैटriotिक' सिनेमा के बादशाह हैं। सरकारी इंटरव्यू, प्रचार, ब्रांड एम्बेसडर—सब कुछ चल रहा है। पुराने ट्वीट डिलीट कर दिए, मगर जनता की याददाश्त डिलीट नहीं हुई। 

- परेश रावल एक समय विपक्षी तंज कसते थे, आज भाजपा के करीबी, सांसद भी रहे। उनकी राजनीतिक सक्रियता अब सत्ता के साथ है।

 - अमिताभ बच्चन सरकारी ऐड में वॉयस-ओवर देकर मोटी कमाई कर रहे हैं। फेसबुक पर पोस्ट नंबरिंग करके खुश हैं।

 - जूही चावला भी अब चुप्पी साधे हुए हैं। पहले रुपए के गिरने पर चिंता जताती थीं, आज डॉलर के उछाल पर 'डॉलर का अंडरवियर' पहनने की बातें मजाक बन गई हैं—रुपया सरक न जाए, इस डर से! 

ये सितारे अब 'रस्सी को सांप' और 'सांप को रस्सी' बनाने में माहिर हो चुके हैं। मौजूदा सरकार की हर नीति को जायज ठहराते हैं, आलोचना करने वालों को 'देशद्रोही' कहते हैं, मगर खुद की पुरानी बेबाकी पर चुप्पी। उनकी निडरता अब 'नोटों की नदी' में बह गई है। मलाई चाटने में व्यस्त हैं—जनता की तकलीफ भूल चुके हैं। 

जनता पूछ रही है:

 - वो बेबाकी कहाँ गई जो महंगाई पर रोती थी?

 - वो निडरता कहाँ गई जो सरकार को आईना दिखाती थी? 

- आज जब आम आदमी पेट्रोल पंप पर सिर पकड़कर बैठा है, तब ये सितारे कहाँ हैं?

 जवाब साफ है—सत्ता की गोद में। सिक्कों की खनक ने उनकी आवाज खरीद ली है। जनता की चिंता अब उनकी प्राथमिकता नहीं रही। अब प्राथमिकता है—कैश, कॉन्ट्रैक्ट, और कंट्रोल।

 यह कहानी सिर्फ इन पांच सितारों की नहीं—यह उस पूरे सिस्टम की है जहां बेबाकी बिक जाती है, और निडरता 'नोटों' के आगे घुटने टेक देती है। जनता याद रखती है। पुराने ट्वीट याद रखती है। और एक दिन जवाब मांगेगी। 

क्योंकि इतिहास दोहराता नहीं, मगर याद जरूर रखता है। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World- March- 22,2026