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Tuesday, 31 March 2026

शांति दूत ट्रंप की गलती की सजा अब पूरा विश्व भोगेगा? ईरान की संसद में हॉर्मुज पर नया क़ानून पास – टोल टैक्स और अमेरिका-इजराइल पर पूर्ण प्रतिबंध

शांति दूत ट्रंप की गलती की सजा अब पूरा विश्व भोगेगा? ईरान की संसद में हॉर्मुज पर नया क़ानून पास – टोल टैक्स और अमेरिका-इजराइल पर पूर्ण प्रतिबंध
-Friday World -March 31,2026
विश्व की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक जलधारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर ईरान ने एक बड़ा कदम उठाया है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने हॉर्मुज स्ट्रेट मैनेजमेंट प्लान को मंजूरी दे दी है, जिसमें व्यावसायिक जहाजों से टोल टैक्स वसूलने, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा नियमों के साथ-साथ अमेरिका तथा इजराइल के जहाजों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रावधान शामिल है। यह योजना अभी पूर्ण संसद में पास होनी बाकी है, लेकिन इसने पहले ही वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है और तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

 क्या ट्रंप की “शांति” नीति की वजह से अब पूरी दुनिया को महंगा तेल और आर्थिक संकट झेलना पड़ेगा? यह सवाल आज हर विश्लेषक के मन में घूम रहा है। 

 ईरान का नया टोल प्लान क्या है? ईरानी राज्य मीडिया IRIB और अन्य समाचार एजेंसियों के अनुसार, संसद की सुरक्षा समिति ने 8 प्रमुख बिंदुओं वाला प्लान मंजूर किया है: 

1. हॉर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना 

2. जहाजों की सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करना 

3. पर्यावरण संरक्षण के नियम

 4. रियाल मुद्रा में टोल टैक्स वसूलना 

5. अमेरिका और इजराइल के जहाजों पर पूर्ण प्रतिबंध

 6. ईरान की सैन्य संप्रभुता को मजबूत करना 

7. ओमान के साथ कानूनी ढांचा तैयार करना 

8. उन देशों के जहाजों पर प्रतिबंध जिन्होंने ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाए हैं

 यह प्लान ईरान को हॉर्मुज पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने का अवसर देता है। टोल टैक्स रियाल में वसूल किए जाएंगे, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ होगा और डॉलर प्रभुत्व को चुनौती मिलेगी। 
 ट्रंप की नीति और बढ़ता तनाव डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में “मैक्सिमम प्रेशर” कैंपेन के तहत ईरान पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे। उन्होंने ईरान को “शांति” की पेशकश की थी, लेकिन वास्तव में यह ईरान को कमजोर करने की रणनीति थी। अब जब क्षेत्र में युद्ध की स्थिति है और हॉर्मुज प्रभावी रूप से प्रभावित हो चुका है, तो ट्रंप की नीति की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ रहा है। 

ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अगर हॉर्मुज से तेल चाहिए तो “लड़ना सीखो या अपना तेल खुद बचाओ, अब अमेरिका मदद नहीं करेगा”। यह बयान कई देशों में आक्रोश का कारण बना। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानते हुए यह नया प्लान तैयार किया। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति ने सहयोगियों को भी अकेला छोड़ दिया है, जिसका नतीजा अब पूरा विश्व भुगत रहा है। 

 हॉर्मुज स्ट्रेट का महत्व हॉर्मुज स्ट्रेट विश्व के लगभग 20% तेल और महत्वपूर्ण गैस आपूर्ति का मार्ग है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई जैसे बड़े उत्पादक देश इसी मार्ग से अपना तेल निर्यात करते हैं। अगर यहां टोल लगता है, प्रतिबंध लगते हैं और नौवहन प्रभावित होता है तो: 

- तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं (कुछ रिपोर्ट्स में न्यूयॉर्क ऑयल पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है) 

- वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ेगी 

- भारत, चीन, यूरोप, जापान जैसे बड़े आयातक देशों को भारी नुकसान होगा 

- शिपिंग कंपनियां लंबे रूट चुनेंगी, जिससे परिवहन लागत बढ़ेगी 

ईरान का कहना है कि यह प्लान पर्यावरण संरक्षण और समुद्री सुरक्षा के नाम पर है, लेकिन पश्चिमी देश इसे “समुद्री डकैती” और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग की आजादी पर हमला बता रहे हैं। 

अमेरिका और इजराइल पर प्रतिबंध का मतलब प्लान में साफ कहा गया है कि अमेरिका, इजराइल और उन देशों के जहाज जिन्होंने ईरान पर प्रतिबंध लगाए हैं, हॉर्मुज का उपयोग नहीं कर सकेंगे। यह ईरान की ओर से एक मजबूत जवाबी कार्रवाई है। अमेरिका ने पहले ही चेतावनी दी है कि वह नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करेगा और अगर जरूरी हुआ तो सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है।

 लेकिन ईरान के पास IRGC नेवी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी) जैसी शक्तिशाली ताकत है, जो छोटी नावों और मिसाइलों से बड़े क्षेत्र को नियंत्रित कर सकती है। पिछले 32 दिनों के युद्ध में ईरान ने दिखाया है कि वह हॉर्मुज को अपना हथियार बना सकता है। 

 भारत और अन्य देशों पर असर भारत ईरान से तेल आयात करने वाला बड़ा देश रहा है। हालांकि प्रतिबंधों के कारण आयात कम हुआ है, लेकिन हॉर्मुज पर कोई भी व्यवधान भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करेगा। बढ़ते तेल दाम से पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, मुद्रास्फीति बढ़ेगी और औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ेगा।

 चीन भी ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है। यूरोपीय देश पहले से ही ऊर्जा संकट से जूझ रहे हैं। अगर हॉर्मुज पूरी तरह प्रभावित हुआ तो वैश्विक मंदी की आशंका बढ़ जाएगी। 

 क्या यह ट्रंप की गलती की सजा है? ट्रंप ने ईरान को अलग-थलग करने की कोशिश की, लेकिन परिणाम उल्टा निकला। ईरान मजबूत हुआ, क्षेत्रीय गठबंधन बनाए और अब हॉर्मुज पर नियंत्रण का दावा कर रहा है। ट्रंप का “अमेरिका मदद नहीं करेगा” वाला बयान कई सहयोगी देशों को निराश कर गया। अब जब संकट गहराया है तो अमेरिका को भी महंगा तेल खरीदना पड़ रहा है। 

कई विश्लेषक कहते हैं कि ट्रंप की नीति ने मध्य पूर्व में शांति की बजाय अस्थिरता बढ़ाई। अब पूरा विश्व – चाहे वह यूरोप हो, एशिया हो या अफ्रीका – महंगे तेल और आपूर्ति श्रृंखला के टूटने का खतरा झेल रहा है। 

 आगे क्या हो सकता है? यह प्लान अभी पूर्ण संसद में पास होना है, फिर गार्जियन काउंसिल की मंजूरी और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की प्रक्रिया बाकी है। लेकिन ईरान पहले से ही “टोल बूथ” जैसी व्यवस्था चला रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी अंतरराष्ट्रीय अदालत या सैन्य रास्ता चुन सकते हैं।

 ईरान का संदेश साफ है – हॉर्मुज हमारा क्षेत्र है और हम अपनी शर्तों पर नियंत्रण रखेंगे। ओमान के साथ सहयोग से कानूनी आधार भी मजबूत करने की कोशिश हो रही है। 

यह घटना दर्शाती है कि आधुनिक विश्व में एक छोटा जलमार्ग भी कितना शक्तिशाली हथियार बन सकता है। ट्रंप की नीति चाहे जो भी रही हो, आज पूरा विश्व उसकी कीमत चुकाने की तैयारी कर रहा है। बढ़ते तेल दाम, मुद्रास्फीति और आर्थिक अनिश्चितता – यही शायद “शांति दूत” की गलती की सजा है। 

अब सवाल यह है कि दुनिया इस संकट से कैसे निकलेगी? क्या नई कूटनीति बनेगी या फिर बड़ा संघर्ष होगा? हॉर्मुज की यह लड़ाई सिर्फ तेल की नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की भी है।

 Sajjadali Nayani ✍
 Friday World -March 31,2026