Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Tuesday, 31 March 2026

अमेरिका समेत दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की आग: ब्रेंट क्रूड 807.3 CNY (युआन) प्रति बैरल 117 डॉलर के पार, हॉर्मुज संकट की वजह से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया

अमेरिका समेत दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की आग: ब्रेंट क्रूड  807.3 CNY (युआन) प्रति बैरल 117 डॉलर के पार, हॉर्मुज संकट की वजह से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया
-Friday World -March 31,2026 
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार को पूरी तरह हिला दिया है। युद्ध के शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ब्रेंट क्रूड की एक बैरल की कीमत युद्ध से पहले करीब 73 डॉलर के आसपास थी, जो अब 31 मार्च 2026 तक लगभग 807.3 CNY (युआन) प्रति बैरल  117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने से विश्व के करीब 20% तेल और गैस सप्लाई बाधित हुई है, जिसका सीधा असर पेट्रोल पंपों पर दिख रहा है। 

यह संकट सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है। कई देशों में ईंधन राशनिंग शुरू हो गई है, सरकारें सब्सिडी बढ़ा रही हैं, टैक्स घटा रही हैं और नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील कर रही हैं। अमेरिका में तो पेट्रोल की औसत कीमत चार साल बाद फिर **4 डॉलर प्रति गैलन** के पार पहुंच गई है। ब्रिटेन में पेट्रोल 14% और डीजल 27% महंगा हो गया है। श्रीलंका, बांग्लादेश और स्लोवेनिया जैसे देशों ने राशनिंग लागू कर दी है। ऑस्ट्रेलिया ने तीन महीने के लिए ईंधन टैक्स आधा कर दिया है और कुछ राज्यों में गाड़ी न चलाने वालों को मुफ्त पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुविधा दी जा रही है। 

 क्यों बढ़ रही हैं कीमतें? हॉर्मुज का रणनीतिक महत्व हॉर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है। यहां से सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात होता है। ईरान ने युद्ध के जवाब में इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे रोजाना करीब 15-20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई बाधित हो रही है। 

विश्लेषकों के अनुसार, तेल की कीमतों में यह उछाल युद्ध की शुरुआत के बाद से 50-60% तक का है। ब्रेंट क्रूड ने 117 डॉलर का आंकड़ा छुआ, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। WTI क्रूड भी 100 डॉलर के ऊपर पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी का असर सबसे पहले पेट्रोल और डीजल पर पड़ता है, क्योंकि रिफाइनरी लागत बढ़ जाती है और सप्लाई चेन प्रभावित होती है। 

अमेरिका: चार साल बाद 4 डॉलर प्रति गैलन के पार 

अमेरिका में पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत युद्ध शुरू होने के बाद से एक डॉलर प्रति गैलन बढ़ गई है। AAA के आंकड़ों के अनुसार, कई जगहों पर यह 3.98 से 4.018 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में तो 5 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंचने की खबरें हैं। 

ट्रंप प्रशासन ने कीमतें नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन हॉर्मुज संकट ने सब प्रयासों पर पानी फेर दिया। अमेरिका अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता के बावजूद आयात पर निर्भर है और वैश्विक कीमतों का असर यहां भी पड़ रहा है। इससे मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा है और फेडरल रिजर्व की नीतियां प्रभावित हो सकती हैं। 

 यूरोप और ब्रिटेन: दोहरी मार ब्रिटेन में पेट्रोल की औसत कीमत में 14% और डीजल में 27% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यूरोपीय संघ का पहला देश स्लोवेनिया है जिसने ईंधन राशनिंग शुरू कर दी। कई अन्य यूरोपीय देश टैक्स कटौती, सब्सिडी और लाभ मार्जिन पर कैप लगाने पर विचार कर रहे हैं। 

ऑस्ट्रिया ने ईंधन टैक्स घटाया है, जबकि इटली अल्जीरिया से अतिरिक्त गैस आयात की कोशिश कर रहा है। यूरोप पहले से ही ऊर्जा संकट से जूझ रहा था, अब हॉर्मुज बंद होने से स्थिति और बिगड़ गई है। 

एशिया और ग्लोबल साउथ: सबसे ज्यादा प्रभावित एशिया के विकासशील देश इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं: 

- श्रीलंका और बांग्लादेश: ईंधन राशनिंग शुरू। श्रीलंका में कारों के लिए साप्ताहिक सीमा तय की गई है। 

- पाकिस्तान: चार दिन का वर्क वीक, स्कूल बंद और सरकारी कर्मचारियों के ईंधन भत्ते में 50% कटौती।

 - भारत: सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर आम लोगों को राहत दी है, लेकिन बढ़ती कीमतों से मुद्रास्फीति और ट्रांसपोर्ट लागत पर असर पड़ रहा है। 

- इंडोनेशिया, थाईलैंड, वियतनाम: सब्सिडी बढ़ाई गई, लेकिन बजट पर भारी बोझ पड़ रहा है। कुछ जगहों पर वर्क फ्रॉम होम और ईंधन निर्यात रोक दिया गया है। 

फिलीपींस में पेट्रोल की कीमतों में सबसे ज्यादा प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। कई देशों में फैक्टरियां आंशिक रूप से बंद हो रही हैं और पर्यटन क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। 

 सरकारों की प्रतिक्रियाएं: राहत के उपाय और चुनौतियां दुनिया भर की सरकारें अलग-अलग तरीकों से इस संकट से निपटने की कोशिश कर रही हैं: 

- टैक्स कटौती: ऑस्ट्रेलिया ने तीन महीने के लिए ईंधन टैक्स आधा कर दिया। 

- राशनिंग: श्रीलंका, बांग्लादेश, स्लोवेनिया और इंडोनेशिया में लागू।

 - सब्सिडी: भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड में बढ़ाई गई।

 - अन्य उपाय: मुफ्त पब्लिक ट्रांसपोर्ट, वर्क फ्रॉम होम, स्कूल बंदी और ऊर्जा बचत अभियान। 

IEA ने आपातकालीन तेल भंडार से 400 मिलियन बैरल रिलीज करने की सिफारिश की है, जो अब तक का सबसे बड़ा स्टॉक ड्रा है। लेकिन विशेषज्ञ चेताव警告 रहे हैं कि सप्लाई साइड उपायों से अकेले समस्या हल नहीं होगी। डिमांड साइड पर भी नियंत्रण जरूरी है। 

 क्या आगे और बिगड़ेगी स्थिति? युद्ध अगर लंबा खिंचा तो तेल की कीमतें 120-130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। हॉर्मुज पूरी तरह बंद रहने पर वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ जाएगा। विकासशील देशों में गरीब वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होगा, क्योंकि ईंधन महंगा होने से खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी बढ़ेंगी। 

ट्रंप का “अमेरिका मदद नहीं करेगा” वाला बयान और हॉर्मुज पर ईरान का नियंत्रण इस संकट को और जटिल बना रहा है। कई विश्लेषक इसे ट्रंप की विदेश नीति की “कीमत” बता रहे हैं, जो अब पूरी दुनिया भुगत रही है।

आतंकवादी अमेरिका-इजरायल की युद्ध उन्माद 

वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती यह संकट सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमतों का नहीं है। यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और भू-राजनीतिक संतुलन की बड़ी परीक्षा है। देशों को अब न सिर्फ तत्काल राहत उपाय अपनाने होंगे, बल्कि लंबे समय के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, विविधीकरण और ऊर्जा दक्षता पर भी ध्यान देना होगा। 

जब तक हॉर्मुज जलमार्ग सामान्य नहीं होता, आम नागरिकों को महंगे ईंधन, बढ़ती महंगाई और सीमित गतिशीलता का सामना करना पड़ेगा। दुनिया एक बार फिर देख रही है कि आतंकवादी अमेरिका-इजरायल की युद्ध उन्माद से एक छोटा जलडमरूमध्य कितना बड़ा वैश्विक संकट पैदा कर सकता है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World -March 31,2026