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Thursday, 12 March 2026

ईरान-इज़राइल युद्ध की आग गुजरात तक पहुंची: गैस की कमी से डेयरी प्लांट बंद होने की कगार पर, मोरबी में १७०+ सिरेमिक फैक्टरियां ठप!

ईरान-इज़राइल युद्ध की आग गुजरात तक पहुंची: गैस की कमी से डेयरी प्लांट बंद होने की कगार पर, मोरबी में १७०+ सिरेमिक फैक्टरियां ठप!
-Friday World March 12,2026
मिडिल ईस्ट में फूटे युद्ध की लपटें अब भारत के औद्योगिक हब गुजरात तक पहुंच गई हैं। अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रुक गई है, जिससे खाड़ी देशों से LPG, प्रोपेन और R-LNG की सप्लाई में भारी बाधा आई है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG आयातक है और इसका ८०-८५% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। इस संकट का सीधा असर गुजरात पर पड़ रहा है – कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी से होटल-रेस्तरां और कैटरिंग इंडस्ट्री मुश्किल में है, प्रोपेन गैस की किल्लत से मोरबी के सिरेमिक सेक्टर में सैकड़ों फैक्टरियां बंद हो चुकी हैं और अब डेयरी प्लांट भी बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। 

डेयरी इंडस्ट्री पर गंभीर संकट: ४०% कट से मिल्क पाउडर उत्पादन घटेगा? महेसाना की मशहूर दूधसागर डेयरी समेत गुजरात के कई डेयरी प्लांट में इंडस्ट्रियल गैस सप्लाई में ४०% तक कट लगाया गया है। दूध प्रोसेसिंग, पाश्चराइजेशन और मिल्क पाउडर बनाने के लिए गैस की जरूरत पड़ती है। इस कट से उत्पादन में बड़ा गिरावट आ सकती है। अगर स्थिति और बिगड़ी तो प्लांट को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। डेयरी उद्योगपति वैकल्पिक ईंधन (जैसे डीजल) की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन यह महंगा और कम प्रभावी है। इससे मिल्क पाउडर का उत्पादन घटेगा, जिसका असर पूरे देश में दूध के दाम और उपलब्धता पर पड़ सकता है। 

राज्य सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी है। ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल ने साफ कहा है कि "एक भी चूल्हा बंद नहीं होगा", लेकिन इंडस्ट्रियल और कमर्शियल यूज में कट अनिवार्य हो गया है। 

 होटल-रेस्तरां और कैटरिंग इंडस्ट्री की हालत दयनीय सूरत, अहमदाबाद, राजकोट और वडोदरा जैसे शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी कमी है। HP गैस, इंडियन गैस और भारत गैस जैसी कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक नहीं है। डिस्ट्रीब्यूटर घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन मात्रा नहीं मिलती। इससे:

 - होटलों में कुछ व्यंजन बनाना बंद करना पड़ गया है। 

- कैटरिंग और फरसाण इंडस्ट्री संकट में है। 

- ब्लैक मार्केट में भाव ₹३०००-४००० तक पहुंच गए हैं। 

गुजरात होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अनुसार, पाइप्ड गैस न होने वाली होटलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। 

सिरेमिक इंडस्ट्री में तबाही: मोरबी में १७०+ फैक्टरियां बंद मोरबी – दुनिया का सबसे बड़ा सिरेमिक और टाइल्स हब 

– सबसे ज्यादा मार झेल रहा है। प्रोपेन और नैचुरल गैस पर आधारित इस इंडस्ट्री में: 

- १००+ फैक्टरियां पहले से बंद हैं। 

- पिछले कुछ दिनों में और ७० यूनिट ठप हो गईं, कुल १७०+ पहुंच गई। 

- १५ मार्च के बाद पूरा शटडाउन की चेतावनी दी गई है। 

यह इंडस्ट्री $७ बिलियन की है और लाखों लोगों को रोजगार देती है। गुजरात गैस लिमिटेड ने फोर्स मेज्योर क्लॉज लागू कर इंडस्ट्रियल गैस में ५०% कट की घोषणा की है। उद्योगपति गांधीनगर में मुख्यमंत्री से मिलकर गुहार लगा रहे हैं। 

अन्य इंडस्ट्रीज भी जोखिम में: कास्टिंग-फोर्जिंग में ६००+ यूनिट बंद होने की आशंका शापर-वेरावल, अंकलेश्वर और अन्य इलाकों में गैस आधारित कास्टिंग और फोर्जिंग इंडस्ट्री में ६००+ यूनिट बंद होने की स्थिति है। हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी खतरे में है। राज्य सरकार ने इंडस्ट्रीज को एक महीने तक उत्पादन बंद रखने का सुझाव दिया है, ताकि गैस का संचय हो सके। 

सरकार के कदम और चेतावनी 

- घरेलू LPG को प्राथमिकता: बुकिंग पीरियड २५ दिनों तक बढ़ाया गया। 

- रिफाइनरी को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश।

 - इंडस्ट्रियल कट: फर्टिलाइजर और डेयरी में ४०%, अन्य में ५०%। 

- समस्या अध्ययन के लिए कमिटी गठित। 

यह स्थिति दिखाती है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव कितनी तेजी से लोकल इकोनॉमी पर असर डालता है। गुजरात के लोगों, उद्योगपतियों और सरकार को अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत और आयात विविधीकरण पर ध्यान देना होगा। अगर युद्ध लंबा चला तो यह संकट और गंभीर हो सकता है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 12,2026