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Saturday, 28 March 2026

फिलिस्तीन की संपूर्ण आजादी की नई सुबह: ईरान का ऐलान और मध्य पूर्व की अवाम का ऐतिहासिक फैसला

फिलिस्तीन की संपूर्ण आजादी की नई सुबह: ईरान का ऐलान और मध्य पूर्व की अवाम का ऐतिहासिक फैसला
-Friday World March 28,2026
ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य प्रवक्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया है – “अभी जंग शुरू ही नहीं हुई, असली जंग तो अब शुरू होगी।” यह बयान केवल शब्द नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में एक बड़े बदलाव का संकेत है। फिलिस्तीन की मुक्ति की दिशा में लंबे संघर्ष के दौरान, जब इजरायल और उसके सहयोगी ताकतें गाजा, लेबनान और ईरान पर हमले तेज कर रही हैं, तब ईरान ने दोहराया कि यह लड़ाई सिर्फ खुद की रक्षा की नहीं, बल्कि फिलिस्तीन की पूर्ण आजादी की भी है।

 ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और विदेश मंत्री ने बार-बार कहा है कि ईरान ने यह जंग शुरू नहीं की, बल्कि आक्रमण का जवाब दे रहा है। IRGC (इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने चेतावनी दी कि अगर इजरायल गाजा और लेबनान में नागरिकों पर अत्याचार जारी रखता है, तो ईरान बिना किसी रोक-टोक के इजरायली सैनिकों पर भारी मिसाइल और ड्रोन हमले करेगा। यह “True Promise” अभियानों की अगली कड़ी का संकेत है, जहां ईरान फिलिस्तीनी प्रतिरोध को मजबूत समर्थन देने की बात कर रहा है। 
मध्य पूर्व के देशों का ऐतिहासिक कदम: आम आर्मी का गठन कल रात जोर्डन, कुवैत, कतर और UAE जैसे प्रमुख मध्य पूर्वी देशों के व्यापारिक और राजनीतिक नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में करीब 400 मिलियन यूरो (लगभग 3600 करोड़ रुपये से अधिक) के निवेश और सहयोग पर चर्चा हुई। बैठक का मुख्य फैसला बेहद साहसिक और दूरगामी है – फिलिस्तीन की संपूर्ण आजादी के लिए एक संयुक्त या “आम आर्मी” का गठन। 

यह आर्मी तीन तरफ से जमीनी हमले की रणनीति पर काम करेगी। इसमें हल्की, मध्यम और भारी आर्टिलरी शामिल की जाएगी, जिसकी खरीद रूस, चीन या उत्तर कोरिया जैसे देशों से हो सकती है। बैठक में भाग लेने वाले नेताओं ने जोर दिया कि फिलिस्तीन अब केवल कूटनीतिक या मानवीय मदद का मुद्दा नहीं रहा। यह अब क्षेत्रीय एकता और सशस्त्र मुक्ति का सवाल बन चुका है। 
मध्य पूर्व के इन देशों ने महसूस किया कि लंबे समय से चली आ रही “स्थिति नियंत्रण” की नीति अब काम नहीं कर रही। गाजा में जारी विनाश, फिलिस्तीनियों की बर्बादी और इजरायल की बढ़ती आक्रामकता ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। बैठक में तय हुआ कि हथियारों की खरीद के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स, ट्रेनिंग और कमांड स्ट्रक्चर को भी मजबूत किया जाएगा। यह आर्मी न केवल फिलिस्तीनी प्रतिरोध को सपोर्ट करेगी, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा के नए मॉडल की नींव भी रखेगी। 

 तानाशाही बनाम अवाम: फिलिस्तीन के साथ खड़े होने का वक्त बैठक में एक और महत्वपूर्ण चर्चा हुई – क्षेत्रीय सरकारों और शासकों की भूमिका। कई नेताओं ने साफ कहा कि अगर कोई सरकार “ऐय्याशी” या तानाशाही में लिप्त होकर फिलिस्तीन के मुद्दे पर चुप्पी साधे रहे या इजरायल के साथ समझौते की राह चुन ले, तो अवाम (जनता) फिलिस्तीन के साथ खड़ी होगी। 

संदेश स्पष्ट है: पहले तानाशाहों को निपटाना है, फिर इजरायल से निपटेंगे। अगर कोई शासक विरोध करे या फिलिस्तीनी मुक्ति में बाधा बने, तो जनता का गुस्सा पहले उसी पर उतरेगा। यह लोकतांत्रिक और जन-आधारित दृष्टिकोण मध्य पूर्व की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। युवा पीढ़ी, बुद्धिजीवी और आम नागरिक अब सरकारों से ज्यादा सख्ती से फिलिस्तीन की आजादी की मांग कर रहे हैं। 

यह फैसला केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक क्रांति का भी संकेत है। क्षेत्र के कई देशों में जहां राजतंत्र या तानाशाही व्यवस्था है, वहां जनता की आवाज तेज हो रही है – “फिलिस्तीन मुक्त हो, तब तक चैन नहीं”। 

 फिलिस्तीन की संपूर्ण आजादी: क्यों जरूरी है यह लड़ाई? फिलिस्तीन का मुद्दा अब केवल भूमि या सीमा का नहीं रहा। यह न्याय, मानवाधिकार, आत्मनिर्णय और क्षेत्रीय संप्रभुता का सवाल बन चुका है। दशकों से इजरायल की कब्जा नीति, बस्तियां बसाना, गाजा पर घेराबंदी और बार-बार होने वाले हमले ने लाखों फिलिस्तीनियों को बेघर और बर्बाद कर दिया है। 

ईरान का बयान और मध्य पूर्वी देशों की बैठक इस बात की पुष्टि करती है कि अब “प्रॉक्सी वॉर” या सीमित संघर्ष का दौर खत्म हो रहा है। असली जंग फिलिस्तीन की पूर्ण मुक्ति के लिए है – एक स्वतंत्र, संप्रभु और एकीकृत फिलिस्तीन राज्य की स्थापना।

 तीन तरफ से जमीनी हमले की रणनीति में शामिल हल्की आर्टिलरी मोबाइल यूनिट्स के लिए, मध्यम आर्टिलरी मोर्चे पर दबाव बनाने के लिए और भारी आर्टिलरी रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए उपयोगी होगी। रूस, चीन या कोरिया से हथियार खरीद का विकल्प इसलिए चुना जा रहा है क्योंकि ये देश पश्चिमी दबाव से कम प्रभावित हैं और क्षेत्रीय संतुलन में बदलाव लाने वाले साझेदार साबित हो सकते हैं। 

 चुनौतियां और उम्मीदें इस रास्ते में कई चुनौतियां हैं – अंतरराष्ट्रीय दबाव, आर्थिक प्रतिबंध, सैन्य श्रेष्ठता का खेल और आंतरिक फूट। लेकिन बैठक में शामिल देशों ने संकल्प लिया कि फिलिस्तीन की आजादी के लिए कोई समझौता नहीं होगा। 

जनता की भूमिका यहां निर्णायक है। अगर सरकारें साथ नहीं देतीं, तो अवाम खुद आगे आएगी। सोशल मीडिया, युवा आंदोलन और क्षेत्रीय एकजुटता इस लड़ाई को नई ऊर्जा दे रही है।

 ईरान का संदेश पूरे क्षेत्र को एकजुट कर रहा है – “जंग शुरू ही नहीं हुई, असली जंग अब शुरू होगी।” यह जंग नफरत की नहीं, बल्कि न्याय और आजादी की है। फिलिस्तीन की संपूर्ण आजादी अब दूर नहीं लग रही। मध्य पूर्व के देशों का यह कदम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा, अगर इसे सही दिशा और एकता के साथ आगे बढ़ाया गया। 

 फिलिस्तीन मुक्त होगा – यह अब सिर्फ नारा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्तियों का सामूहिक संकल्प बन चुका है। ईरान की चेतावनी और जोर्डन-कुवैत-कतर-UAE जैसी बैठकें बताती हैं कि समय बदल रहा है। तानाशाही, समझौतावाद और चुप्पी का दौर खत्म हो रहा है। अब अवाम की आवाज, साझा आर्मी और दृढ़ संकल्प फिलिस्तीन को उसकी हक की आजादी दिलाएगा। 

यह लड़ाई लंबी हो सकती है, लेकिन इतिहास गवाह है – अन्याय की ताकतें आखिरकार टिक नहीं पातीं। फिलिस्तीन की संपूर्ण आजादी की ओर बढ़ते हर कदम को मध्य पूर्व की जनता समर्थन देगी। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 28,2026