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Saturday, 28 March 2026

मिडल ईस्ट में आग: ईरान के हमलों ने क्षेत्र को भूचाल पर ला दिया, भारत के नागरिक भी प्रभावित

मिडल ईस्ट में आग: ईरान के हमलों ने क्षेत्र को भूचाल पर ला दिया, भारत के नागरिक भी प्रभावित
-Friday World March 28,2026
मिडल ईस्ट में आग: ईरान के हमलों ने क्षेत्र को भूचाल पर ला दिया, भारत के नागरिक भी प्रभावित

 मिडल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक खतरनाक मुकाम पर पहुंच गया है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों के जवाब में ईरान ने क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों पर जोरदार पलटवार शुरू कर दिया है। सऊदी अरब, बहरीन और यूएई जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए ईरान की मिसाइलें और ड्रोन हमले कर रहे हैं। इस escalation से दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है और महायुद्ध की आशंकाएं बढ़ गई हैं। 

अबू धाबी में मिसाइल के कटमाल से भारतीय प्रभावित अबू धाबी में ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को यूएई की एयर डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट कर लिया, लेकिन गिरते कटमाल ने नागरिक क्षेत्र में तबाही मचाई। अबू धाबी मीडिया ऑफिस के अनुसार, इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं। तीन अन्य घायल हुए, जिनमें एक भारतीय भी है। घायलों की हालत सामान्य से गंभीर तक बताई जा रही है। भारतीय दूतावास ने शोक व्यक्त करते हुए प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

 यह घटना दिखाती है कि युद्ध के असर अब सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहे। आम नागरिक, खासकर विदेशी कामगार, खतरे में हैं। 

 बहरीन में अमेरिकी नौसेना बेस पर ईरानी हमला बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें फ्लीट मुख्यालय के पास ईरानी मिसाइल हमले हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलों में सिविलियन क्षेत्रों में भी नुकसान हुआ, जिसमें दर्जनों लोग घायल हुए। बहरीन की डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की कोशिश की, लेकिन कुछ हमले अपने निशाने पर पहुंचे। यह क्षेत्र अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का महत्वपूर्ण केंद्र है, और यहां का हमला ईरान की क्षमता को रेखांकित करता है। 

 सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर प्रचंड प्रहार 27 मार्च 2026 को ईरान ने सऊदी अरब के रियाद के पास स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 10 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें से दो की हालत गंभीर है। बेस पर रखे कई KC-135 एरियल रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट क्षतिग्रस्त हो गए। यह बेस क्षेत्र में अमेरिकी हवाई अभियानों के लिए महत्वपूर्ण है, और इसका नुकसान अमेरिकी रणनीति पर असर डाल सकता है। 

सेंट्रल इजरायल में मिसाइल हमला, मौत और घायल ईरान ने इजरायल के मध्य भाग में भी मिसाइल हमले जारी रखे हैं। हालिया हमलों में सेंट्रल इजरायल (टेल अवीव और आसपास के इलाकों) में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। कुछ रिपोर्ट्स क्लस्टर मुनिशन का जिक्र कर रही हैं, जिससे नागरिक क्षेत्रों में व्यापक नुकसान हुआ। इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों को रोक लिया, लेकिन कुछ गिरकर तबाही मचा रही हैं। 

यमन की हूती सेना की बड़ी चेतावनी यमन की हूती (अंसारुल्लाह) सेना ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि वे अमेरिका और इजरायल को ईरान पर हमला करने के लिए लाल सागर का इस्तेमाल नहीं करने देंगे। अगर कोई गठबंधन ईरान के खिलाफ मैदान में उतरा तो हूती भी ईरान के पक्ष में सीधे युद्ध में कूद पड़ेंगे। इससे रेड सी में शिपिंग रूट्स पर फिर खतरा मंडराने लगा है, जो वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। 

रूस गैस और ऑयल एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगा सकता है रूस की TASS न्यूज एजेंसी और डिप्टी पीएम अलेक्जेंडर नोवाक के बयानों के अनुसार, घरेलू ईंधन की कीमतों और सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक गैसोलीन और ऑयल एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। मिडल ईस्ट युद्ध से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित होने के कारण यह कदम उठाया जा रहा है। 

 IRGC का अल्टीमेटम: अमेरिका-इजरायल से जुड़ी कंपनियों के कर्मचारी निकल जाएं ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और इजरायल से जुड़ी कंपनियों तथा उद्योगों के कर्मचारी तुरंत अपने कार्यस्थल छोड़ दें। IRGC ने कहा कि ऐसे ठिकाने अब वैध लक्ष्य बन सकते हैं। क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों वाले होटलों और बेस के आसपास रहने वाले नागरिकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 

 शांति की किरण? अमेरिका का 15 सूत्री प्रस्ताव अमेरिकी विशेष दूत स्टिव विटकोफ ने कहा कि अमेरिका ने ईरान को 15 मुद्दों पर शांति प्रस्ताव दिया है। अगर ईरान इसे स्वीकार करता है तो इस हफ्ते महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। हालांकि, IRGC ने ऐसे किसी समझौते को “हार को समझौता कहना” करार देते हुए खारिज किया है। 

विश्लेषण: क्या यह महायुद्ध की शुरुआत है? यह युद्ध अब केवल ईरान-इजरायल तक सीमित नहीं रहा। इसमें अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, बहरीन जैसे देश सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो गए हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित होने से तेल सप्लाई बाधित हुई है, जिसका असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। भारतीय नागरिकों की मौत और चोटें हमें याद दिलाती हैं कि विदेश में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। 

भारत को इस संकट में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है, जबकि रेड सी और होर्मुज में परिवहन बाधित होने से सप्लाई चेन प्रभावित होगी। 

 मिडल ईस्ट का यह संघर्ष मानवता के लिए बड़ी चुनौती है। दोनों पक्षों को संयम बरतना चाहिए, क्योंकि आगे escalation से अनियंत्रित विनाश हो सकता है। शांति वार्ता की कोई भी उम्मीद स्वागत योग्य है, लेकिन हकीकत यह है कि क्षेत्र में तनाव चरम पर है। भारत जैसे देशों को इस स्थिति में सतर्क और तैयार रहना होगा। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World March 28,2026