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तेहरान/दुबई, 30 मार्च 2026 – ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध के बीच तनाव अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले चुका है। ईरान ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों के होटल मालिकों को सीधा डेथ अल्टीमेटम’ दे दिया है। चेतावनी साफ है – अगर आप अमेरिकी सैनिकों को होटल में आश्रय देंगे तो आपकी संपत्ति कानूनी सैन्य लक्ष्य बन जाएगी और हम उसे बमों से उड़ा देंगे।
यह अल्टीमेटम ईरानी सेना के प्रवक्ता अबोलफजल शेकारची और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची दोनों की तरफ से आया है। फार्स न्यूज एजेंसी ने रिपोर्ट किया कि ईरान ने खासतौर पर बहरीन और UAE के होटलों को चेतावनी दी है कि विदेशी सैनिकों को छुपाने वाली कोई भी जगह अब सुरक्षित नहीं रहेगी।
अमेरिकी सैनिक क्यों होटलों में छिप रहे हैं? ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने क्षेत्र में कम से कम 13 अमेरिकी सैन्य अड्डों को लगभग uninhabitable (रहने लायक नहीं) बना दिया है। इसके बाद अमेरिकी सैनिकों को मजबूरन सैन्य बेस छोड़कर नागरिक इलाकों में शरण लेनी पड़ी।
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी सैनिक अब इन जगहों पर सक्रिय हैं:
- बहरीन और UAE के विभिन्न होटल
- दमिश्क (सीरिया) के फोर सीजन्स और शेरेटन होटल
- बेरूत (लेबनान) के पुराने एयरपोर्ट के पास लॉजिस्टिक्स बेस
- रिपब्लिक पैलेस जैसे सरकारी भवन
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा: “इस युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिकी सैनिक GCC के सैन्य अड्डों से भागकर होटलों और दफ्तरों में छिप गए हैं। वे GCC के नागरिकों को **मानव ढाल** के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।”
अराघची ने अमेरिकी होटलों का उदाहरण दिया, जहां ऐसे अधिकारियों को बुकिंग देने से इनकार कर दिया जाता है जो मेहमानों को खतरे में डाल सकते हैं। उन्होंने GCC होटलों से अपील की कि वे भी यही नीति अपनाएं।
ईरान का तर्क: होटल अब सैन्य लक्ष्य बन गए ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता अबोलफजल शेकारची ने स्टेट टीवी पर कहा:
“जब सारे अमेरिकी सैनिक किसी होटल में चले जाते हैं, तो हमारे नजरिए से वह होटल अमेरिकी बन जाता है। क्या हमें चुपचाप बैठकर देखना चाहिए जबकि वे हम पर हमला कर रहे हैं? जवाबी कार्रवाई में हम जहां भी वे होंगे, वहां हमला करेंगे।”
ईरान का दावा है कि यह चेतावनी तत्काल प्रभाव से लागू होती है। किसी भी होटल या नागरिक स्थल पर विदेशी सैनिकों की मौजूदगी उसे वैध सैन्य लक्ष्य बना देगी।
युद्ध की पृष्ठभूमि: 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ संघर्ष यह तनाव 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए बड़े हमलों के बाद और बढ़ गया, जिसमें इजरायल और अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ नेता मारे गए। ईरान ने भी जवाबी हमले किए, जिसमें हजारों नागरिकों और सैन्य कमांडरों की मौत हुई।
ट्रंप प्रशासन की “अमेरिका फर्स्ट” नीति और इजरायल के साथ साझेदारी ने क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। अब अमेरिकी सैनिक सैन्य बेस छोड़कर होटलों में शिफ्ट हो गए हैं, जिसे ईरान **मानव ढाल** की रणनीति बता रहा है।
खाड़ी देशों पर दबाव बढ़ा बहरीन और UAE अमेरिका के महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। दोनों देशों में अमेरिकी नौसेना और सैन्य अड्डे मौजूद हैं। ईरान की यह चेतावनी GCC देशों को मुश्किल स्थिति में डाल रही है। अगर वे अमेरिकी सैनिकों को होटलों से निकालते हैं तो अमेरिका नाराज होगा; अगर रखते हैं तो ईरानी हमलों का खतरा मोल लेना पड़ेगा।
विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम ईरान की psychological warfare (मनोवैज्ञानिक युद्ध) का हिस्सा है। ईरान GCC देशों को अमेरिका से दूरी बनाने के लिए मजबूर करना चाहता है और पर्यटन तथा अर्थव्यवस्था पर असर डालकर दबाव बढ़ाना चाहता है।
- GCC देशों की होटल इंडस्ट्री अब दो आग के बीच फंस गई है।
- अमेरिका ने अभी तक इस अल्टीमेटम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक भेजने की खबरें हैं।
- ईरान ने साफ कहा है कि जवाबी हमले “हर जगह” होंगे जहां अमेरिकी सैनिक होंगे।
यह घटनाक्रम पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर रहा है। तेल की कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। खाड़ी देश अब फैसला करेंगे कि वे अमेरिका के साथ खड़े रहकर ईरानी खतरे का सामना करेंगे या अपनी नागरिक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देंगे।
ट्रंप प्रशासन की आक्रामक नीतियां न सिर्फ ईरान बल्कि उसके सहयोगी खाड़ी देशों को भी नई चुनौतियों में डाल रही हैं। क्या यह अल्टीमेटम सिर्फ धमकी है या ईरान वाकई होटलों को निशाना बनाएगा? आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी, लेकिन फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में **डर और अनिश्चितता** का माहौल है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 30,2026