क्या भारत के पास वाकई सिर्फ पांच दिनों का कच्चा तेल भंडार बचा है? CAG की चेतावनी और वर्तमान स्थिति का पूरा विश्लेषण
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा के लिए व्यूहात्मक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves - SPR)** बेहद महत्वपूर्ण हैं। लेकिन हालिया रिपोर्ट्स और संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, देश के व्यूहात्मक कच्चे तेल भंडार वर्तमान में केवल **पांच दिनों** के उपभोग के बराबर भरे हुए हैं।
कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की 2025 की ऑडिट रिपोर्ट में इस बात की सख्त आलोचना की गई है कि भंडारण क्षमता का इष्टतम उपयोग नहीं हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि निर्माण में देरी, खाली गुहाओं (caverns) और व्यावसायिक उपयोग न शुरू होने के कारण देश की ऊर्जा सुरक्षा कमजोर हो रही है।
वर्तमान स्थिति क्या है? राज्यसभा में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी ने 23 मार्च 2026 को लिखित जवाब में बताया कि इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) के पास कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) क्षमता वाले भंडार हैं। इनमें से वर्तमान में 3.372 MMT कच्चा तेल भरा हुआ है, जो कुल क्षमता का लगभग 64 प्रतिशत है।
भारत प्रतिदिन औसतन 0.67 MMT पेट्रोलियम उत्पादों का उपभोग करता है। इस आधार पर वर्तमान व्यूहात्मक भंडार लगभग पांच दिनों तक ही चल सकते हैं। पूर्ण क्षमता (5.33 MMT) पर यह भंडार 9.5 दिनों का कवर प्रदान कर सकते हैं।
CAG रिपोर्ट (2025) में और भी गंभीर तस्वीर सामने आई। मार्च 2024 तक भरे हुए भंडार केवल 2.91 MMT थे, जो आयात कवर के लिहाज से सिर्फ 4.56 दिनों के बराबर थे। रिपोर्ट में कहा गया कि चरण-1 में 19 दिनों का कवर देने की योजना थी, लेकिन प्रगति धीमी रही।
भंडार कहां-कहां हैं? ISPRL द्वारा संचालित तीन मुख्य स्थानों पर ये भूमिगत गुहाएं (salt caverns) बनाई गई हैं:
- विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) — 1.33 MMT
- मंगलुरु (कर्नाटक)— 1.5 MMT
- पदुर (कर्नाटक) — 2.5 MMT
इनके अलावा तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के पास अलग से 64.5 दिनों के बराबर भंडार हैं। दोनों को मिलाकर कुल 74 दिनों का बफर उपलब्ध बताया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि व्यूहात्मक भंडार (SPR) आपात स्थिति में तुरंत इस्तेमाल के लिए होते हैं, जबकि कंपनियों के स्टॉक सामान्य संचालन के लिए होते हैं।
CAG रिपोर्ट में क्या कहा गया? CAG की रिपोर्ट ने कई कमियों की ओर इशारा किया:
- भंडारण क्षमता का **sub-optimal उपयोग** (इष्टतम से कम उपयोग)।
- निर्माण में देरी और लागत बढ़ोतरी।
- 2021 में कैबिनेट की मंजूरी के बावजूद कच्चे तेल की खरीद-बिक्री (commercialisation) शुरू नहीं हुई, जिससे ISPRL आत्मनिर्भर नहीं बन पाया।
- मंगलुरु जैसी जगहों पर खाली जगह का फैसला लंबित।
- उच्च रखरखाव लागत, बिजली के अनावश्यक शुल्क आदि।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई कि ISPRL और पेट्रोलियम मंत्रालय को वर्तमान खपत के हिसाब से भंडार की मात्रा का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए और गुहाओं को पूरी तरह भरना चाहिए।
सरकार का पक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में भरोसा दिलाया कि भारत ने कच्चे तेल की आयात स्रोतों को विविधतापूर्ण बनाया है और संकट से निपटने के लिए भंडारण को प्राथमिकता दी है। सरकार का कहना है कि कुल मिलाकर 74 दिनों का कवर उपलब्ध है और आयात 41 देशों से हो रहा है, जिससे जोखिम कम हुआ है।
हालांकि, हाल के दिनों में पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में तनाव बढ़ने (ईरान-अमेरिका-इजरायल संघर्ष) के कारण ईंधन की कमी की अफवाहें फैलीं। गुजरात समेत कई शहरों में लोग पेट्रोल-डीजल की अतिरिक्त खरीदारी करने लगे। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा? भारत की कच्चे तेल की खपत में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी काफी है। 2025 में कुल आयात का 50 प्रतिशत मध्य पूर्व से आया, जिसमें इराक, सऊदी अरब और UAE प्रमुख थे। स्ट्रेट ऑफ हरमुज जैसे संवेदनशील इलाकों में कोई भी गड़बड़ी भारत की आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
विश्व स्तर पर IEA (International Energy Agency) की सिफारिश है कि देशों के पास कम से कम 90 दिनों का तेल भंडार होना चाहिए। भारत अभी इससे काफी पीछे है।
आगे की योजना सरकार ने जुलाई 2021 में अतिरिक्त 6.5 MMT क्षमता बनाने की मंजूरी दी थी: - चंडीखोल (ओडिशा)— 4 MMT - पदुर (कर्नाटक) में अतिरिक्त 2.5 MMT ये परियोजनाएं PPP मोड पर हैं, लेकिन अभी निर्माण पूरा नहीं हुआ है। पूर्ण क्षमता पर भारत का SPR कवर 22 दिनों तक बढ़ सकता है।
निष्कर्ष CAG रिपोर्ट स्पष्ट रूप से कहती है कि वर्षों से भंडारण क्षमता का कम उपयोग हो रहा है, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। वर्तमान में व्यूहात्मक भंडार पांच दिनों का कवर देते हैं, जबकि पूर्ण क्षमता पर भी यह सिर्फ 9.5 दिनों का है। सरकार विविधीकरण और विस्तार पर जोर दे रही है, लेकिन भंडार को पूरी क्षमता से भरने और व्यावसायिक उपयोग शुरू करने की जरूरत है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए तेज कदम उठाने होंगे। कुल 74 दिनों का कवर आश्वस्त करने वाला लगता है, लेकिन आपात स्थिति में व्यूहात्मक भंडार की वास्तविक उपलब्धता ही निर्णायक होगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 28,2026