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Monday, 30 March 2026

युद्ध, सैकड़ों मौतें और अब्जों का खर्च – सब बर्बाद? ईरान NPT से बाहर निकलने की तैयारी में, 'परमाणु मोड़' पर दुनिया सतर्क!

युद्ध, सैकड़ों मौतें और अब्जों का खर्च – सब बर्बाद? ईरान NPT से बाहर निकलने की तैयारी में, 'परमाणु मोड़' पर दुनिया सतर्क!
-Friday World March 31,2026 
पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध अब एक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की संसद (मजलिस) में न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी (NPT) से निकलने का बिल तेजी से चर्चा में है। सांसदों का कहना है कि अमेरिका और इजरायल की लगातार बमबारी के बीच NPT में बने रहने का कोई मतलब नहीं रह गया। अगर ईरान इस संधि से बाहर निकलता है, तो उसके परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी लगभग खत्म हो जाएगी और क्षेत्र में नई अनिश्चितता पैदा हो सकती है। 

ईरान बार-बार दोहरा रहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता, लेकिन एक तरफ नियमों का पालन करो और दूसरी तरफ बमबारी सहो – यह असंभव है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बघई ने स्पष्ट किया कि संसद और अन्य संस्थाएं इस मुद्दे पर तत्काल विचार कर रही हैं। 

 NPT से निकलने का प्रस्ताव: क्या है ईरान का तर्क? ईरान के सांसद मलिक शरीआती और अलाउद्दीन बोरूजर्दी जैसे नेताओं ने कहा कि अमेरिका-इजरायल की आक्रामकता के बाद NPT में सदस्यता बेकार हो गई है। प्रस्तावित बिल में तीन मुख्य बातें शामिल हैं:

 1. NPT से पूर्ण निकासी

 2. 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से जुड़े घरेलू कानूनों को रद्द करना 

3. BRICS, शंघाई सहयोग संगठन जैसे समान विचारधारा वाले देशों के साथ शांतिपूर्ण परमाणु प्रौद्योगिकी के विकास के लिए नया अंतरराष्ट्रीय ढांचा बनाना 

ईरान का रुख साफ है – “हम बम नहीं बनाना चाहते, लेकिन नियमों का पालन करते हुए भी लगातार हमलों का शिकार होना स्वीकार्य नहीं।” संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य मोहसिनी-सानी ने कहा कि मजबूत समर्थन के साथ यह बिल जल्द पास हो सकता है। 

 युद्ध की पृष्ठभूमि: परमाणु स्थलों पर हमले फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए संयुक्त अमेरिका-इजरायल हमलों में ईरान के कई परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

 - नतांज (Natanz) और इस्फहान (Isfahan) जैसे प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्रों पर हमले 

- खोंडाब (Khondab) हेवी वॉटर रिएक्टर को क्षति 

- याज्द में यूरेनियम प्रोसेसिंग प्लांट पर हमला

 - बुशहर (Bushehr) न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास भी गोले गिरे, हालांकि IAEA ने अभी तक बड़े रेडिएशन खतरे की पुष्टि नहीं की 

इन हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए, नागरिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ और ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ा। ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें इजरायल के कुछ इलाकों और खाड़ी क्षेत्र में हमले शामिल हैं। IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने दोनों पक्षों से “अधिकतम संयम” बरतने की अपील की है, ताकि न्यूक्लियर सुरक्षा को खतरा न हो। 

NPT क्या है और इससे निकलने के क्या परिणाम हो सकते हैं? NPT (Nuclear Non-Proliferation Treaty) 1970 की संधि है, जिस पर 190 से अधिक देश हस्ताक्षर कर चुके हैं। यह तीन स्तंभों पर टिकी है: 

- परमाणु हथियार न फैलाना

 - शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का अधिकार 

- निरस्त्रीकरण की दिशा में प्रयास 

ईरान जैसे गैर-परमाणु हथियार वाले देशों को IAEA की निगरानी में शांतिपूर्ण कार्यक्रम चलाने की अनुमति है। अगर ईरान बाहर निकलता है तो:

 - IAEA के निरीक्षक सीमित या बंद हो सकते हैं - यूरेनियम संवर्धन की गति बढ़ने की आशंका 

- पश्चिमी देश और अधिक प्रतिबंध लगा सकते हैं 

- मध्य पूर्व में “परमाणु शस्त्र दौड़” शुरू हो सकती है 

– सऊदी अरब, तुर्की आदि देश भी प्रतिक्रिया दे सकते हैं 

- वैश्विक परमाणु प्रसार व्यवस्था को बड़ा झटका

 IAEA ने ईरान के बढ़ते समृद्ध यूरेनियम स्टॉक पर पहले से चिंता जताई हुई है। हमलों के बाद कई साइटों तक पहुंच सीमित हो गई है, इसलिए सटीक स्थिति स्पष्ट नहीं है। 

 युद्ध की भारी कीमत: मौतें, तबाही और वैश्विक असर 2026 के इस युद्ध में अब तक सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं। ईरान में परमाणु सुविधाओं, स्टील प्लांट्स और अन्य औद्योगिक इकाइयों को नुकसान पहुंचा है। इजरायल और अमेरिका का कहना है कि ये हमले “आत्मरक्षा” और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए जरूरी थे। ईरान इसे “आक्रामकता” और “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बता रहा है। 

युद्ध का असर केवल क्षेत्रीय नहीं है। तेल की कीमतें बढ़ी हैं, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है और मध्य पूर्व की स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं। ईरान अब BRICS जैसे समूहों के साथ मिलकर नया परमाणु सहयोग मॉडल बनाने की बात कर रहा है, जो पश्चिमी प्रभुत्व से मुक्त हो। 

 आगे क्या? निष्पक्ष विश्लेषक मानते हैं कि NPT से निकलना ईरान को तत्काल परमाणु हथियार नहीं देगा, लेकिन निगरानी से मुक्ति देकर लंबे समय में रास्ता आसान कर सकता है। वहीं, अमेरिका और इजरायल और सख्ती बढ़ा सकते हैं। 

ईरान का आधिकारिक रुख अभी भी शांतिपूर्ण कार्यक्रम का है। लेकिन युद्ध की आग में यह आश्वासन कितना टिक पाएगा, यह देखना बाकी है। कूटनीति और संवाद की जगह अगर और हमले हुए, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। 

ईरान का NPT से निकलने का विचार केवल एक संसदीय प्रस्ताव नहीं है। यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, वैश्विक सुरक्षा और परमाणु प्रसार के भविष्य को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। युद्ध पहले ही भारी कीमत वसूल चुका है – मौतें, आर्थिक नुकसान और अस्थिरता। अब समय है कि सभी पक्ष संयम बरतें और बातचीत की राह अपनाएं। “बड़ा धमाका” टालना ही मानवता के हित में है।

 दुनिया की नजरें अब ईरान की संसद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर टिकी हैं। शांति की उम्मीद अभी भी है, लेकिन समय बहुत कम बचा है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 31,2026