-Friday World March 31,2026
मध्य पूर्व का आसमान एक बार फिर युद्ध की आग से लाल हो उठा है। ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को साफ संदेश दे दिया है कि वह हार मानने को तैयार नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को ठुकराते हुए ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर तीव्र मिसाइल और ड्रोन हमलों की बौछार कर दी। कुवैत, जॉर्डन, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर ईरान ने साबित कर दिया कि उसकी सैन्य क्षमता अभी भी अक्षुण्ण है और वह किसी भी समझौते के लिए अमेरिका की शर्तें स्वीकार करने को तैयार नहीं।
ये हमले ऐसे समय में हुए जब ट्रंप व्हाइट हाउस में बैठकर दावा कर रहे थे कि ईरान समझदारी से बात कर रहा है और जल्द ही समझौता हो जाएगा। लेकिन ईरान के क्रांतिकारी गार्ड्स (IRGC) ने इन दावों को सीधे खारिज कर दिया। ईरानी सैन्य प्रवक्ताओं ने कहा कि अमेरिका अपनी ही छाया से बात कर रहा है, ईरान से नहीं।
ईरान के हमलों की विस्तृत तस्वीर: कहाँ-कहाँ हुए हमले? ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने आधिकारिक बयान में कहा कि उन्होंने “कब्जे वाले इलाकों के दिल” जैसे लक्ष्यों पर हमला किया है। इसमें खासतौर पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने और इजरायल शामिल थे।
- कुवैत में हमले: कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले हुए। एक हमले में फ्यूल टैंक में आग लग गई, जिससे घने काले धुएँ के गुबार उठे। अली अल सलेम एयर बेस पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले दर्ज किए गए। कुवैती अधिकारियों ने बताया कि कई हमलों को रोका गया, लेकिन कुछ में नुकसान हुआ। कुछ रिपोर्ट्स में अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की भी खबरें आईं।
- जॉर्डन और बहरीन: जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को टारगेट किया गया। बहरीन में अमेरिकी नेवी के 5th फ्लीट हेडक्वार्टर को निशाना बनाया गया। बहरीन और अन्य खाड़ी देशों ने कई मिसाइलों और ड्रोनों को मार गिराने का दावा किया, लेकिन ईरानी मीडिया ने इन्हें “सफल हमले” बताया।
- सऊदी अरेबिया: सऊदी अरेबिया ने अपने पूर्वी क्षेत्र में कई ड्रोनों को मार गिराने का दावा किया। प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हुए हमले में अमेरिकी सैनिक घायल हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां 12 से 15 अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की खबर है, जिनमें कुछ गंभीर रूप से घायल हैं।
ईरान ने इजरायल पर भी मिसाइल हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। ये सभी हमले लगभग एक महीने से चल रहे युद्ध में ईरान की प्रतिरोध क्षमता का प्रदर्शन हैं।
ट्रंप के 15 सूत्री प्रस्ताव की कहानी और ईरान की ठुकराहट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा था कि ईरान समझौते के लिए तैयार है और उसे “बड़ी सौगात” मिल रही है। पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को भेजे गए 15 सूत्री प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ने, मिसाइल कार्यक्रम पर अंकुश और क्षेत्रीय सहयोगियों को समर्थन बंद करने जैसी शर्तें शामिल बताई गईं।
प्रस्ताव के मुख्य बिंदु:
- ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना होगा।
- उच्च समृद्ध यूरेनियम का स्टॉक IAEA को सौंपना होगा।
- नाटांज, इस्फहान और फोर्डो जैसे परमाणु केंद्रों को नष्ट करना होगा।
- मिसाइल कार्यक्रम सीमित करना और क्षेत्रीय प्रॉक्सी गुटों (हिजबुल्लाह, हूती आदि) को समर्थन बंद करना।
- बदले में पूर्ण प्रतिबंध हटाने और सिविलियन परमाणु कार्यक्रम में मदद का वादा।
लेकिन ईरान ने इसे “अत्यधिक अधिकतमवादी और अव्यावहारिक” बताया। ईरान के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोल्फाघारी ने कहा, “अमेरिका हमसे बात नहीं कर रहा, अपनी ही छाया से बात कर रहा है। अगर अमेरिका सच्चा सुपरपावर होता तो अब तक इस मुसीबत से निकल चुका होता।”
पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमीरी मोगधाम ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष बातचीत नहीं हुई है। फिनलैंड में ईरान के दूतावास ने भी सोशल मीडिया पर अमेरिकी नीति की आलोचना की। ईरान ने अपने 5 सूत्री प्रतिप्रस्ताव में हमले बंद करने, नुकसान की भरपाई और हॉर्मुज स्ट्रेट पर अपने अधिकार की मान्यता मांगी है।
क्षेत्र में बढ़ता तनाव और वैश्विक प्रभाव इन हमलों से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर सवाल उठ गए हैं। बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरेबिया जैसे देशों ने संयुक्त बयान में ईरान के हमलों की निंदा की और इसे “अंधाधुंध और खतरनाक” बताया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है। तेल के दामों में उतार-चढ़ाव देखा गया और हॉर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक आवागमन प्रभावित हुआ। ईरान ने “शत्रु” जहाजों के लिए स्ट्रेट बंद करने की धमकी भी दी है।
यह युद्ध अब एक महीने से अधिक समय से चल रहा है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य नेताओं पर हमले किए थे, जिनके जवाब में ईरान ने यह प्रतिरोध शुरू किया। दोनों पक्षों के बीच बातचीत के प्रयास जारी हैं, लेकिन हमले जारी रहने से समझौता दूर नजर आ रहा है।
आगे क्या होगा? ईरान के क्रांतिकारी गार्ड्स ने क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों के पास रहने वाले नागरिकों को सावधान रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बल नागरिक इलाकों में छिपकर मानव ढाल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ ईरान ने साफ किया है कि वह अपने संप्रभु अधिकार और सुरक्षा के लिए किसी भी कीमत चुकाने को तैयार है।
विश्लेषक मानते हैं कि यह युद्ध लंबा खिंच सकता है। अमेरिका ने और सैनिक भेजने की तैयारी कर ली है, जबकि ईरान अपनी मिसाइल और ड्रोन क्षमता बढ़ा रहा है। इस स्थिति में वैश्विक शांति के लिए चिंता बढ़ रही है।
ये घटनाएं दिखाती हैं कि मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन आसान नहीं है। ईरान ने अमेरिका को अपना रौद्र रूप दिखाया है और संदेश दिया है कि युद्ध में वह पीछे हटने को तैयार नहीं। अब देखना यह है कि यह तनाव कैसे कम होता है और शांति के प्रयास सफल होते हैं या नहीं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 31,2026