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Tuesday, 31 March 2026

भारी खतरे की घंटी: ‘भारत में तेल खत्म हो जाएगा तो...’ अमेरीका-ईरान युद्ध के बीच RAW पूर्व चीफ विक्रम सूद की बड़ी चेतावन

भारी खतरे की घंटी: ‘भारत में तेल खत्म हो जाएगा तो...’ अमेरीका-ईरान युद्ध के बीच RAW पूर्व चीफ विक्रम सूद की बड़ी चेतावन
-Friday World- March 31,2026 
मध्य पूर्व में चल रहा अमेरीका-इजरायल बनाम ईरान संघर्ष अब सिर्फ क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, खासकर भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। पूर्व RAW चीफ विक्रम सूद ने इस युद्ध के दीर्घकालिक प्रभावों पर चिंता जताते हुए भारत को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगले 2 से 3 महीनों में अगर तेल और उर्वरक (fertilizer) की आपूर्ति प्रभावित हुई तो देश में महंगाई आसमान छू सकती है। 

ANI न्यूज एजेंसी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में विक्रम सूद ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “चुनौती तो 2-3 महीने बाद आएगी, जब हमारे पास तेल और उर्वरक खत्म हो जाएंगे। हमारा ज्यादातर LNG कतर से आता है और ज्यादातर तेल अरब तथा मध्य पूर्व से। अगर वह नहीं आया, या बहुत महंगे दाम पर आया, तो मुद्रास्फीति (inflation) बढ़ जाएगी। हमें इसे संभालना पड़ेगा। यह सरकार के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा।” 

 हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत की निर्भरता विक्रम सूद ने जोर देकर कहा कि भारत **स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज** के लिए ईरान पर निर्भर है, भले ही हम सीधे ईरान पर निर्भर न हों। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जिसके जरिए वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान इस क्षेत्र पर नियंत्रण रखता है और वर्तमान संघर्ष में उसने इस रणनीतिक मार्ग को प्रभावित करने की क्षमता दिखाई है। सूद ने कहा,

 “हम हॉर्मुज पर निर्भर हैं, ईरान पर नहीं। हमने इसे खुद पर नहीं थोपा और न ही ईरान ने हमें थोपा। यह इजरायली और अमेरीकी हमलों के कारण हमारे ऊपर थोपा गया है।” 

 खामेनी की शहादत को ‘दुर्भाग्यपूर्ण हत्या’ बताया पूर्व RAW चीफ ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनी की मौत को “दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया। उन्होंने इसे हत्या बताया और कहा कि इजरायल और अमेरीका की कार्रवाई से यह स्थिति बनी। सूद ने कहा, “इजरायल हमारा मित्र है। हमारे उसके साथ गहरे संबंध हैं और सुरक्षा से जुड़ी कई चीजों के लिए हम उस पर निर्भर हैं। लेकिन ईरान पर यह हमला और अंतिम नेता की मौत हत्या के बराबर है। यह एक देश के कानून को अपने हाथ में लेने जैसा है।” 

उन्होंने आगे कहा, “इसके बाद अमेरीका का इसमें शामिल होना एक देश के खिलाफ अघोषित युद्ध के समान है। हम यह नहीं कहेंगे कि इजरायल हमारा मित्र नहीं है, लेकिन हम कहेंगे कि यह हत्या दुर्भाग्यपूर्ण थी और इसे टाला जा सकता था। हम कोई दूसरा रुख नहीं अपना सकते।” 

ईरान को गलत समझा गया: अमेरीका-इजरायल की गलती 

विक्रम सूद ने अमेरीका और इजरायल पर आरोप लगाया कि उन्होंने शुरू से ही ईरान को गलत समझा। उन्होंने कहा, “अमेरीका और इजरायल ने शुरुआत से ही ईरान को गलत समझा। ईरानी मरने को तैयार हैं, लेकिन अमेरीकी नहीं।” सूद के अनुसार, अमेरीका ने सोचा था कि एक छोटा, तेज हमला करके काम हो जाएगा, लेकिन ईरान लंबे संघर्ष की रणनीति अपना रहा है। ईरान अपने सहयोगियों को निशाना बनाकर अमेरीकी गठबंधन में बेचैनी पैदा कर रहा है। 

सूद ने कहा, “कुछ लोग कह रहे हैं कि यह ईरान को पूरी तरह खत्म करने और इजरायल को क्षेत्र की कमान सौंपने की योजना है। सिर्फ समय ही बताएगा कि असल खेल क्या है।” 

भारत पर क्या असर पड़ सकता है? भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। हमारा अधिकांश कच्चा तेल मध्य पूर्व से आता है। वर्तमान संघर्ष में हॉर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित होने से: 

- तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है 

- तेल के दाम बढ़ सकते हैं

 - उर्वरक उत्पादन प्रभावित होगा (क्योंकि कई उर्वरक कच्चे माल तेल से जुड़े हैं) 

- परिवहन, कृषि और उद्योग पर असर पड़ेगा 

- मुद्रास्फीति बढ़ने से आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा 

सूद ने साफ चेतावनी दी कि यह स्थिति सरकार के लिए मुश्किल समय लाएगी। उन्हें इस चुनौती का समाधान ढूंढना पड़ेगा। 

भारत की कूटनीतिक दुविधा भारत इजरायल का मजबूत साझेदार है, खासकर सुरक्षा, खुफिया जानकारी और रक्षा क्षेत्र में। वहीं, ईरान और खाड़ी देशों से ऊर्जा सुरक्षा जुड़ी हुई है। करीब एक करोड़ भारतीय खाड़ी क्षेत्र में काम करते हैं और रेमिटेंस अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। 

विक्रम सूद ने भारत की स्थिति को संतुलित बताते हुए कहा कि हमें इजरायल को मित्र मानते हुए भी हॉर्मुज की वास्तविकता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि यह संकट हमने नहीं पैदा किया, बल्कि बाहरी ताकतों के हमलों ने थोपा है। 

 युद्ध कितना लंबा चलेगा? पूर्व RAW चीफ का अनुमान है कि यह संघर्ष अमेरीका के सोचे से कहीं ज्यादा लंबा चल सकता है। ईरानी लोग “मरने को तैयार” हैं, जबकि अमेरीकी सैनिक “शव-पेटियों” से डरते हैं। ईरान ने क्षेत्रीय सहयोगियों के जरिए अमेरीकी गठबंधन को कमजोर करने की रणनीति अपनाई है। 

सूद ने कहा कि ईरान के पास गहरी रणनीतिक गहराई है और वह आसानी से टूटने वाला नहीं है। 

 आगे क्या? वर्तमान में तेल के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं और वैश्विक बाजार अस्थिर है। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत ढूंढने और कूटनीतिक स्तर पर संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। विक्रम सूद की चेतावनी सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। यह भारत को याद दिलाती है कि मध्य पूर्व का कोई भी बड़ा संघर्ष सीधे हमारे घर की रसोई और खेतों तक असर डाल सकता है। 

यह युद्ध सिर्फ दो देशों या गुटों के बीच नहीं है। यह ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक शक्ति संतुलन का युद्ध है। भारत जैसे विकासशील देशों को सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।

 Sajjadali Nayani ✍
 Friday World- March 31,2026