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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Wednesday, 1 April 2026

ईरान की नई धमकी: बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद होने का खतरा, होर्मुज के बाद वैश्विक व्यापार पर दूसरा घातक प्रहार!

ईरान की नई धमकी: बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद होने का खतरा, होर्मुज के बाद वैश्विक व्यापार पर दूसरा घातक प्रहार!
-Friday World-April 1,2026
लाल सागर के दक्षिणी द्वार पर मंडराते काले बादल अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई चुनौती दे रहे हैं। ईरान ने हाल ही में **बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य** (Bab el-Mandeb Strait) को बाधित करने की स्पष्ट धमकी दी है। यह वह रणनीतिक जल मार्ग है जो अदन की खाड़ी को लाल सागर से जोड़ता है और आगे स्वेज़ नहर तक जाता है। ईरानी सैन्य सूत्रों के अनुसार, अगर अमेरिका या उसके सहयोगी ईरानी भूमि या द्वीपों (खासकर खार्ग द्वीप) पर जमीन पर सैन्य कार्रवाई करते हैं, तो तेहरान 'दूसरा मोर्चा' खोल सकता है। 

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी तसनीम न्यूज़ एजेंसी ने एक सैन्य सूत्र के हवाले से कहा, "बाब अल-मंदेब दुनिया के रणनीतिक जलडमरूमध्यों में से एक है। ईरान के पास इसे खतरे में डालने की न सिर्फ मंशा है, बल्कि प्रामाणिक क्षमता भी है।" 

यह धमकी ऐसे समय आई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले ही प्रभावी रूप से बाधित हो चुका है। होर्मुज से गुजरने वाला तेल और गैस का प्रवाह रुकने के कारण वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। अब अगर बाब अल-मंदेब भी प्रभावित हुआ, तो दुनिया के लगभग 30-33% तेल व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा। 

बाब अल-मंदेब क्या है और क्यों इतना महत्वपूर्ण? बाब अल-मंदेब का अर्थ है "आंसुओं का द्वार"। यह यमन और जिबूती-इरिट्रिया के बीच स्थित संकरा जल मार्ग है, जिसकी चौड़ाई सबसे कम जगह पर करीब 18-20 मील है। इसमें दो मुख्य चैनल हैं—एक आने वाले जहाजों के लिए और दूसरा जाने वाले के लिए। 

यह मार्ग एशिया से यूरोप और अमेरिका के बीच सबसे छोटा रास्ता प्रदान करता है। प्रतिवर्ष यहां से 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का माल गुजरता है। इसमें शामिल हैं:

 - वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 12% (प्रति दिन करीब 4-4.5 मिलियन बैरल तेल)।

 - वैश्विक कंटेनर ट्रैफिक का 15-20%। - एशियाई वस्तुओं (इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, मशीनरी) का यूरोप पहुंचना और यूरोपीय उत्पादों का एशिया जाना। 

सामान्य परिस्थितियों में जहाज होर्मुज से निकलकर बाब अल-मंदेब होते हुए स्वेज़ नहर पहुंचते हैं। स्वेज़ नहर बंद होने या बाधित होने पर अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जो यात्रा में 10-15 दिन अतिरिक्त जोड़ देता है और ईंधन लागत को दोगुना कर सकता है। 

होर्मुज के बंद होने के बाद कई टैंकर वैकल्पिक रूप से रेड सी रूट का इस्तेमाल कर रहे थे। अब बाब अल-मंदेब पर खतरा इस वैकल्पिक रास्ते को भी बंद कर सकता है। 

ईरान की धमकी का पृष्ठभूमि ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष में तनाव बढ़ने के साथ IRGC ने साफ चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैनिकों की जमीन पर तैनाती या ईरानी ऊर्जा सुविधाओं पर हमले की स्थिति में वे रेड सी में नया मोर्चा खोलेंगे। ईरान के हूती सहयोगी (यमन में) पहले ही रेड सी में हमले कर चुके हैं और अब वे बाब अल-मंदेब को बंद करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। हूती उप- सूचना मंत्री ने कहा है कि "यह लड़ाई चरणबद्ध है और बाब अल-मंदेब को बंद करना हमारे विकल्पों में शामिल है।" 

ईरान का दावा है कि उसके पास ड्रोन, मिसाइल, समुद्री खदानें और तेज गति वाली नावों के जरिए इस मार्ग को प्रभावी रूप से बाधित करने की क्षमता है—जैसा हूती पहले कर चुके हैं। 

विभिन्न देशों पर पड़ने वाला असर यह धमकी वैश्विक है, लेकिन असर देशों की ऊर्जा निर्भरता और व्यापार पैटर्न पर निर्भर करता है: 

1. भारत पर असर (सबसे गंभीर में से एक):
 भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का करीब 85% आयात करता है। होर्मुज से आने वाला तेल पहले ही प्रभावित है। बाब अल-मंदेब बंद होने पर रूस, सऊदी अरब और अन्य स्रोतों से आने वाला तेल महंगा और देरी वाला हो जाएगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, मुद्रास्फीति बढ़ेगी और गरीब आबादी पर बोझ बढ़ेगा। निर्यात-आयात (विशेषकर एशिया-यूरोप) पर भी असर पड़ेगा। भारत पहले ही सप्लायर्स की संख्या बढ़ाकर (27 से 41) और रूस से तेल खरीद बढ़ाकर कुछ राहत ले रहा है, लेकिन पूर्ण ब्लॉकेज से बचना मुश्किल होगा। 

2. यूरोप और यूके पर असर: यूरोप फारस की खाड़ी से आने वाले तेल और गैस पर काफी निर्भर है। स्वेज़ रूट बंद होने पर एशियाई सामान महंगा हो जाएगा। ब्रिटेन जैसे देशों पर "स्पष्ट और महत्वपूर्ण" असर पड़ेगा—महंगाई, सप्लाई चेन बाधा और ऊर्जा संकट। शिपिंग कंपनियां पहले ही रेड सी रूट से हट चुकी हैं। 

3. चीन और एशियाई अर्थव्यवस्थाएं: चीन दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक है। लंबे रूट से ईंधन लागत बढ़ेगी, जिससे विनिर्माण और निर्यात प्रभावित होंगे। जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य देश भी इसी संकट में फंसेंगे। 

4. अमेरिका और उसके सहयोगी: अमेरिका खुद तेल निर्यातक है, लेकिन वैश्विक कीमतों में उछाल से उसकी अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी। इजरायल पर अप्रत्यक्ष असर पड़ेगा क्योंकि क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ेगी। 

5. मध्य पूर्व के अन्य देश: सऊदी अरब, UAE जैसे देश होर्मुज ब्लॉकेज से पहले ही परेशान हैं। बाब अल-मंदेब बंद होने पर उनका वैकल्पिक रूट भी खत्म हो जाएगा। यमन में हूती प्रभाव बढ़ सकता है, लेकिन स्थानीय अर्थव्यवस्था और मानवीय संकट और गहरा हो जाएगा। 

6. विकासशील देशों पर व्यापक असर: अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के गरीब देशों में खाद्य पदार्थ, ईंधन और दवाओं की कीमतें आसमान छू सकती हैं। वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ेगी और आर्थिक मंदी का खतरा मंडराएगा।

संभावित परिणाम और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बोझ 

- तेल की कीमतें: पहले से ही $100-120 प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं। पूर्ण ब्लॉकेज पर $150-200 तक जाने का अनुमान है।

 - शिपिंग लागत: केप ऑफ गुड होप रूट से यात्रा लंबी होने पर फ्रेट रेट दोगुने-तिगुने हो सकते हैं। 

- सप्लाई चेन: इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, खाद्य पदार्थ और उपभोक्ता सामान की कमी या देरी।

 - बीमा और जोखिम: समुद्री बीमा प्रीमियम आसमान छूेंगे। 

- वैकल्पिक रास्ते: अफ्रीका के चारों ओर घूमना पर्यावरणीय रूप से भी हानिकारक है (अधिक ईंधन खपत)।

 शिपिंग दिग्गज जैसे मर्स्क (Maersk) पहले ही रेड सी ट्रांजिट रोक चुके हैं। अगर हूती या ईरानी हमले बढ़े, तो स्थिति 2023-24 की रेड सी संकट से भी बदतर हो सकती है। 

क्या है आगे का रास्ता? विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस धमकी को लीवरेज के रूप में इस्तेमाल कर रहा है ताकि अमेरिका-इजरायल को आगे बढ़ने से रोका जा सके। लेकिन अगर युद्ध बढ़ा, तो दोनों जलडमरूमध्य एक साथ बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय (विशेषकर UN, IMO) को फ्रीडम ऑफ नेविगेशन सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे।

 ईरान का संदेश साफ है—"शैतान विज्ञान और प्रौद्योगिकी को नष्ट कर जीतने की कोशिश कर सकता है, लेकिन याद रखें, शैतान कभी नहीं जीतता। विनाश के बाद हम दोगुनी ताकत से आगे बढ़ेंगे।" 

यह संकट न सिर्फ तेल और व्यापार का है, बल्कि वैश्विक स्थिरता और भू-राजनीतिक संतुलन का भी है। दुनिया अब इस "आंसुओं के द्वार" पर टिकी नजरें रखे हुए है—क्या यह वाकई आंसू बहाएगा या कूटनीति से बच जाएगा?

 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 1,2026