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Wednesday, 1 April 2026

ईरान से करारी हार के बाद ट्रंप का दिमागी संतुलन बिगड़ गया? जंग के खात्मे पर ट्रंप और अधिकारियों के बयानों का पूरा टाइमलाइन

ईरान से करारी हार के बाद ट्रंप का दिमागी संतुलन बिगड़ गया? जंग के खात्मे पर ट्रंप और अधिकारियों के बयानों का पूरा टाइमलाइन
-Friday World-April 1,2026 
ट्रंप प्रशासन ईरान संघर्ष से जल्दी निकलने की होड़ में, लेकिन तेहरान का परमाणु खतरा अभी भी मंडरा रहा है?

वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही तनावपूर्ण जंग अब पांचवें हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके शीर्ष अधिकारी बार-बार ईरान से सैन्य अभियान जल्द समाप्त करने के संकेत दे रहे हैं, लेकिन ईरान इनकार कर रहा है कि वह किसी भी तरह की बातचीत में शामिल है। इस बीच, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि ईरान अभी भी दो सप्ताह के अंदर परमाणु हथियार बनाने की क्षमता रखता है। 

क्या ट्रंप की बार-बार बदलती टाइमलाइन उनके दिमागी संतुलन की ओर इशारा कर रही है, या यह रणनीतिक पीछे हटने की तैयारी है? आइए देखते हैं कि फरवरी के अंत से अब तक ट्रंप, मार्को रुबियो, पीट हेगसेथ, कैरोलाइन लेविट और बिन्यामिन नेतन्याहू ने जंग के अंत को लेकर क्या-क्या कहा है। 

ट्रंप की टाइमलाइन: शुरुआत से लेकर अब तक का उतार-चढ़ाव 

फरवरी 28, 2026: ट्रंप ने ऑपरेशन "एपिक फ्यूरी" की घोषणा की। उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार न बनाने देने का संकल्प दोहराया और कहा कि अमेरिका "बहुत जल्द" ईरान छोड़ देगा। शुरू में उन्होंने 4-5 हफ्तों की अवधि का अनुमान लगाया था। 

मार्च 1-2: ट्रंप ने कहा कि लड़ाई "पूर्ण जोर" से जारी है और सभी उद्देश्य पूरे होने तक चलेगी। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआती योजना 4-5 हफ्ते की थी, लेकिन अमेरिका लंबे समय तक जारी रख सकता है। उन्होंने दावा किया कि वे समय से काफी आगे हैं। 

मार्च 9: सीबीएस न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कहा कि जंग "काफी हद तक पूरी" हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और संचार व्यवस्था नष्ट हो चुकी है। बाद में उन्होंने जोड़ा कि यह "काफी जल्दी" खत्म हो जाएगी। 

मार्च 11: एक्सिओस को फोन पर ट्रंप ने कहा कि ईरान में "टारगेट करने लायक कुछ भी बचा नहीं है"। उन्होंने कहा, "जब चाहूं, जंग खत्म कर सकता हूं।" उन्होंने दावा किया कि वे मूल 6 हफ्ते की योजना से भी आगे निकल चुके हैं और ज्यादा नुकसान पहुंचा चुके हैं। 

पिछले हफ्ते (मार्च के तीसरे सप्ताह):

 विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ईरान में अपने ऑपरेशन "अगले कुछ हफ्तों में" समाप्त करने की उम्मीद रखता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने भी इसे दोहराया। शुरुआत में उन्होंने 6 हफ्तों का अनुमान लगाया था, लेकिन अब इसे छोटा करने की कोशिश दिख रही है। 

सोमवार (31 मार्च): ट्रंप ने कहा कि अमेरिका नए ईरानी शासन के साथ "गंभीर बातचीत" कर रहा है ताकि सैन्य अभियान खत्म किया जा सके। उन्होंने शर्त रखी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तुरंत व्यापार के लिए खोल दिया जाए। हालांकि, ईरान ने किसी भी बातचीत से इनकार कर दिया है। 

मंगलवार/कल रात (31 मार्च - 1 अप्रैल): ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने सबसे साफ संकेत दिया — "हम दो से तीन हफ्तों में ईरान से बाहर निकल जाएंगे"। उन्होंने कहा, "हम बहुत जल्द छोड़ रहे हैं... शायद दो हफ्ते, शायद तीन।" ट्रंप ने जोड़ा कि डील जरूरी नहीं है, लेकिन ईरान को "स्टोन एज" में डालना और परमाणु क्षमता खत्म करना उनका लक्ष्य है। उन्होंने दावा किया कि तेल की कीमतें गिरेंगी।

 रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कल कहा कि मिशन को पूरा करने की "तत्काल जरूरत" है और बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका अपनी टाइमलाइन पर काम कर रहा है, न कि अनंत युद्ध में फंसना चाहता है। 

 नेतन्याहू का बयान: "आधे से ज्यादा आगे" इजरायल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने सोमवार को कहा कि जंग "निश्चित तौर पर आधे से ज्यादा आगे बढ़ चुकी है"। उन्होंने साफ किया कि उनका मतलब समय से नहीं, बल्कि मिलिट्री ऑपरेशंस और मिशनों से है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के हजारों सदस्य मारे जा चुके हैं, मिसाइल क्षमता क्षतिग्रस्त हुई है और परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया गया है। 

 ईरान का परमाणु खतरा: अभी भी दो सप्ताह की दूरी? 

ट्रंप प्रशासन बार-बार दावा कर रहा है कि ईरान की परमाणु क्षमता नष्ट हो गई है, लेकिन विशेषज्ञ और खुफिया आकलन इससे अलग कहानी बयां करते हैं। ईरान के पास अभी भी 400 किलोग्राम से ज्यादा 60% संवर्धित यूरेनियम है, जिसे हथियार-ग्रेड बनाने में बहुत कम समय लग सकता है। 

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स और IAEA के पुराने आकलनों के अनुसार, ईरान के पास परमाणु बम बनाने की तकनीकी क्षमता पहले से मौजूद थी। हमलों के बावजूद कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान अभी भी दो सप्ताह के अंदर पर्याप्त fissile material तैयार कर सकता है, अगर वह राजनीतिक फैसला ले ले। हमलों ने इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन विकेंद्रीकृत कार्यक्रम और छिपे स्टॉकपाइल पूरी क्षमता को खत्म नहीं कर पाए।

 ईरान के नए नेता और अधिकारी लंबे युद्ध की तैयारी की बात कर रहे हैं और कह रहे हैं कि वे 6 महीने तक लड़ सकते हैं। उन्होंने अमेरिका के साथ किसी डील से इनकार किया है और कहा है कि वाशिंगटन "खुद से बातचीत" कर रहा है।

 क्या ट्रंप का दिमागी संतुलन बिगड़ रहा है? ट्रंप के बयानों में बार-बार बदलाव — कभी 4-5 हफ्ते, कभी "बहुत जल्द", कभी "दो-तीन हफ्ते" — कई विश्लेषकों को हैरान कर रहा है। कुछ इसे रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बता रहे हैं, तो कुछ इसे युद्ध थकान और घरेलू दबाव का नतीजा मान रहे हैं। तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और NATO सहयोगियों से बढ़ता तनाव ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ा रहे हैं। 

ट्रंप ने हाल ही में NATO से बाहर निकलने की धमकी भी दी है, क्योंकि सहयोगी ईरान युद्ध में पूरा समर्थन नहीं दे रहे। 

आगे क्या? ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करने की घोषणा की है। दुनिया की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका सच में जल्दी बाहर निकलता है या फिर नया ट्विस्ट आता है। ईरान की ओर से कोई समझौता न करने की जिद और परमाणु क्षमता बरकरार रहने से जंग लंबी खिंच सकती है। 

यह संघर्ष न सिर्फ मध्य पूर्व को प्रभावित कर रहा है, बल्कि भारत समेत दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर डाल रहा है — तेल की कीमतें, व्यापार मार्ग और भू-राजनीतिक स्थिरता सब दांव पर है।

ट्रंप और उनके अधिकारी जंग के खात्मे की बात तो कर रहे हैं, लेकिन हकीकत अभी भी जटिल है। ईरान की "करारी हार" का दावा शायद अतिरंजित है, क्योंकि परमाणु खतरा और प्रतिरोध की भावना अभी भी मजबूत दिख रही है। समय बताएगा कि यह "जल्द निकलने" की योजना कितनी सफल होती है या फिर नया अध्याय शुरू होता है। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 1,2026