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Thursday, 2 April 2026

ट्रंप की युद्धोन्मादी नीति या दिमागी अस्थिरता? ईरान पर 'पाषाण युग' की धमकी ने अमेरिका में तूफान खड़ा कर दिया

ट्रंप की युद्धोन्मादी नीति या दिमागी अस्थिरता? ईरान पर 'पाषाण युग' की धमकी ने अमेरिका में तूफान खड़ा कर दिया-Friday World — April 2, 2026
वाशिंगटन, 2 अप्रैल 2026 — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति और उनके अनाप-शनाप बयानों ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद पैदा कर दिया है, बल्कि अमेरिका के अंदर भी उनके मानसिक संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ अमेरिका-इजराइल की आक्रामक सैन्य कार्रवाई, दूसरी तरफ ईरान की मजबूत जवाबी रणनीति — और बीच में ट्रंप के बयान जो हर दिन एक से बढ़कर एक विवादास्पद होते जा रहे हैं। 

→ ट्रंप की धमकी: ईरान को 'पाषाण युग' में भेज देंगे अपने हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन में ट्रंप ने साफ कहा, “हम ईरान पर आने वाले दो-तीन हफ्तों में बेहद सख्त हमला करेंगे। हम उन्हें पाषाण युग में वापस भेज देंगे, जहां उन्हें होना चाहिए।” उन्होंने ईरान के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाने की भी बात की।

 यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका पहले ही “Operation Epic Fury” के तहत ईरान पर हमले कर चुका है, लेकिन ट्रंप खुद विरोधाभासी संकेत दे रहे हैं — कभी कहते हैं “हम जीत गए”, तो कभी कहते हैं “अभी और लड़ाई बाकी है”। 

→ अमेरिकी सांसदों की तीखी प्रतिक्रिया

ट्रंप की इस धमकी पर अमेरिकी कांग्रेस में भारी आलोचना हुई। एरिजोना से डेमोक्रेटिक सांसद यासमिन अंसारी (Yassamin Ansari) ने कहा, “वे 9 करोड़ की आबादी वाले देश की बात कर रहे हैं। यह घिनौना, भयावह और बुरा है।” 

मैरीलैंड के सीनेटर क्रिस वैन होलेन (Chris Van Hollen) ने ट्रंप को सीधे “अमेरिका और दुनिया के लिए खतरा” बताया। उन्होंने कहा, “ट्रंप ने हमेशा की तरह हमसे झूठ बोला। दो हफ्ते पहले उन्होंने कहा था ‘हम जीत गए’। अगर ऐसा है, तो हम अब भी वहां क्यों हैं? आगे क्या होगा? हम ट्रंप से सिर्फ अधिक झूठ की ही उम्मीद कर सकते हैं।” 

वैन होलेन ने आगे कहा, “यह भ्रम में रहने वाला आदमी हमारे देश और पूरी दुनिया के लिए खतरा है।” 

कई अन्य डेमोक्रेट सांसदों ने भी ट्रंप की नीति को “reckless war of choice” (अनावश्यक युद्ध) बताया और कांग्रेस से वार पावर्स रेजोल्यूशन के तहत कार्रवाई की मांग की। 

→ ट्रंप के अनाप-शनाप बयान: मैक्रों से लेकर NATO तक ट्रंप के बयान केवल ईरान तक सीमित नहीं हैं। हाल ही में एक प्राइवेट लंच के दौरान उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों पर अशोभनीय टिप्पणी की। ट्रंप ने फ्रेंच एक्सेंट की नकल करते हुए कहा, “मैक्रों की पत्नी उसे बेहद बुरा व्यवहार करती है। वह अभी भी जबड़े पर लगी दाहिनी मुक्के से उबर रहा है।”

 यह टिप्पणी 2025 के उस वीडियो का हवाला थी जिसमें ब्रिजिट मैक्रों अपने पति को धक्का देते नजर आई थीं। फ्रांस ने इसे “डिसइनफॉर्मेशन” बताया था, लेकिन ट्रंप ने इसे ईरान युद्ध में फ्रांस के “अपर्याप्त सहयोग” से जोड़ दिया। 

मैक्रों ने जवाब में कहा कि ट्रंप के बयान “न तो elegant हैं और न ही स्टैंडर्ड के अनुरूप”। उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर “हर दिन पहले कही बात के उलट बोलने” का आरोप लगाया और कहा, “हमें स्थिरता, शांति और संतुलन की जरूरत है। यह कोई तमाशा नहीं है।” 

ट्रंप ने NATO को “कागज के शेर” (paper tiger) कहा और यूरोपीय सहयोगियों पर हमला बोला। ब्रिटेन की सरकार पर भी उन्होंने आक्रामक टिप्पणियां कीं।

 → ईरान की जवाबी रणनीति और अमेरिका में असर ईरान ने ट्रंप की धमकी का जवाब देते हुए कहा, “You know nothing” और मिसाइल लॉन्च के वीडियो जारी किए जिन पर ट्रंप के खिलाफ संदेश लिखे थे। ईरान की Axis of Resistance (हिजबुल्लाह, हूती आदि) ने क्षेत्र में दबाव बनाए रखा है। 

इस पूरे संघर्ष का असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है — तेल की कीमतें बढ़ी हैं, मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ा है और जनता सड़कों पर उतर आई है। कई शहरों में “No War with Iran” के नारे लग रहे हैं। 

→ ट्रंप की दिमागी हालत पर उठते सवाल ट्रंप के लगातार विरोधाभासी बयान, व्यक्तिगत हमले और अत्यधिक आक्रामक भाषा ने अमेरिका में उनके मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ डेमोक्रेट सांसद पहले ही उन्हें “mentally incapacitated” बता चुके हैं। 

कांग्रेस में अब ट्रंप के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो रही है। डेमोक्रेट नेता कह रहे हैं कि राष्ट्रपति के रूप में ट्रंप का व्यवहार देश और दुनिया दोनों के लिए खतरा बन गया है। यहां तक कि कुछ रिपब्लिकन भी चुप्पी साधे हुए हैं या हल्की आलोचना कर रहे हैं। 

अमेरिकी जनता में भी असंतोष बढ़ रहा है। महंगाई, युद्ध की लागत और अनिश्चितता ने ट्रंप की लोकप्रियता पर असर डाला है। कई विश्लेषक इसे “ट्रंप की युद्ध उन्मादी नीति का परिणाम” बता रहे हैं। 

→ भविष्य की चुनौतियां ईरान युद्ध अब केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और मानसिक स्तर पर भी लड़ाई बन चुका है। ट्रंप की “America First” नीति सहयोगियों को दूर कर रही है, जबकि ईरान अपनी असममित युद्ध क्षमता (ड्रोन, मिसाइल और प्रॉक्सी नेटवर्क) से टक्कर दे रहा है।

 अमेरिका के अंदर कांग्रेस और जनता की बढ़ती नाराजगी ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। अगर स्थिति और बिगड़ी तो मिडटर्म चुनावों में भी इसका असर पड़ सकता है। 

→ निष्कर्ष: शब्दों की जंग या असली संकट?

ट्रंप की ईरान नीति और उनके अनाप-शनाप बयान अब केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं रह गए हैं। वे अमेरिका की आंतरिक राजनीति, सहयोगी देशों के रिश्तों और यहां तक कि राष्ट्रपति की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। 

मैक्रों पर व्यक्तिगत हमला, NATO को कागज का शेर कहना, ब्रिटेन पर प्रहार और ईरान को पाषाण युग में भेजने की धमकी — ये सब मिलकर एक तस्वीर बनाते हैं जिसमें ट्रंप की आक्रामकता उनकी अपनी स्थिति को कमजोर कर रही है। 

अमेरिकी सांसदों की आलोचना और जनता का रोष साफ संकेत है कि युद्ध केवल मैदान में नहीं, बल्कि वाशिंगटन की सड़कों और कांग्रेस हॉल में भी लड़ा जा रहा है। 

जो राष्ट्रपति अपने सहयोगियों की पत्नियों पर टिप्पणी करता है, NATO को अपमानित करता है और एक बड़े देश को पाषाण युग की धमकी देता है — उसके फैसलों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

 भविष्य की जंग केवल हथियारों की नहीं, बल्कि संतुलित रणनीति, स्थिर बयानबाजी और विश्वसनीय नेतृत्व की होगी। ट्रंप का यह दौर दिखा रहा है कि शब्दों की जंग कभी-कभी असली युद्ध से भी ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकती है। 

Sajjadali Nayani ✍
Friday World — April 2, 2026