-Friday World-April 26,2026
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बयान और अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में भारत को उन 23 देशों की सूची में शामिल किया है जिन्हें उन्होंने मेजर ड्रग ट्रांजिट या मेजर इलिसिट ड्रग प्रोड्यूसिंग कंट्रीज के रूप में नामित किया है। इस सूची में चीन, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, म्यांमार, मैक्सिको और कोलंबिया जैसे देश भी शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन ने कांग्रेस को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा कि ये देश अवैध नशीले पदार्थों और उनके प्रीकर्सर केमिकल्स के उत्पादन व तस्करी के जरिए अमेरिका की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं।
यह बयान कई भारतीय नागरिकों के लिए चिंताजनक रहा। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया — “भारत अब गैंगस्टरों द्वारा चलाया जा रहा देश बन गया है”, “मोदी सरकार अफ्रीकी देशों को ड्रग्स निर्यात करने वालों को खुली छूट दे रही है”, “भारत की इज्जत मिट्टी में मिल गई”। लेकिन वास्तविकता को समझने के लिए तथ्यों की पड़ताल जरूरी है।
ट्रंप की रिपोर्ट क्या कहती है?
सितंबर 2025 में जारी प्रेसिडेंशियल डिटर्मिनेशन में ट्रंप ने 23 देशों को नामित किया। भारत को इसमें शामिल किया गया, लेकिन रिपोर्ट स्पष्ट रूप से यह नहीं कहती कि भारतीय सरकार जानबूझकर ड्रग तस्करी को बढ़ावा दे रही है। बल्कि यह मुख्य रूप से उन देशों की पहचान करती है जहां से **फेंटानिल** जैसे सिंथेटिक ओपियोइड्स के प्रीकर्सर केमिकल्स या अन्य नशीले पदार्थों का ट्रांजिट/उत्पादन होता है।
भारत में फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री दुनिया की सबसे बड़ी जेनेरिक दवाओं की उत्पादक है। यही कारण है कि कुछ केमिकल कंपनियां (जैसे वासुधा फार्मा केस) प्रीकर्सर केमिकल्स के अवैध निर्यात में फंसीं। अमेरिका ने ऐसे कुछ भारतीय अधिकारियों के वीजा भी रद्द किए। लेकिन साथ ही, रिपोर्ट में भारत के साथ सहयोग की सराहना भी की गई है।
भारत की वास्तविक स्थिति और प्रयास
भारत ड्रग तस्करी का शिकार भी है और कुछ हद तक ट्रांजिट पॉइंट भी। पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा से हेरोइन और अफीम आती है, जबकि कुछ सिंथेटिक ड्रग्स दक्षिण-पूर्व एशिया या अफ्रीका रूट से गुजरते हैं। हाल के वर्षों में पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में ड्रग समस्या बढ़ी है।
लेकिन मोदी सरकार और केंद्र की एजेंसियां इसे नजरअंदाज नहीं कर रही हैं:
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 2026 के पहले तीन महीनों (जनवरी-मार्च) में ही 73 दोषियों को सजा दिलाई। इनमें चार को 20 साल की सजा और 54 को 10 साल या उससे अधिक की सजा हुई। कुल 1.22 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
- अंतरराष्ट्रीय मामलों में NCB ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाली हेरोइन की खेपें पकड़ीं। अहमदाबाद एयरपोर्ट और फाजिल्का बॉर्डर के केस में विदेशी तस्करों को 20-20 साल की सजा हुई।
- सरकार ने 2022-2024 के बीच 20.8 लाख किलोग्राम नशीले पदार्थ नष्ट किए।
- PM मोदी ने G20 समिट में ग्लोबल फ्रंट अगेंस्ट ड्रग टेरर नेक्सस** का प्रस्ताव रखा। भारत-अमेरिका के बीच ड्रग पॉलिसी वर्किंग ग्रुप भी सक्रिय है।
हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स (जैसे बेलिंगकैट की जांच) में भारत से पश्चिम अफ्रीका को टैपेंटाडोल जैसे ओपियोइड्स की बड़ी खेपों के बारे में चिंता जताई गई है। ये मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल कंपनियों से लीगल एक्सपोर्ट के रूप में शुरू होकर अवैध नेटवर्क तक पहुंच जाती हैं। यहां नियामक कमजोरियां और करप्शन की भूमिका हो सकती है, लेकिन इसे पूरे देश या सरकार को “गैंगस्टरों द्वारा चलाया जा रहा” कहना अतिशयोक्ति है।
राजनीतिक रंग क्यों चढ़ा?
ट्रंप का बयान कई बार व्यापार युद्ध और टैरिफ नीति से जुड़ा दिखता है। भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ पर तनाव रहा है। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि ड्रग लिस्ट को कभी-कभी दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। चीन को रिपोर्ट में सबसे बड़ा स्रोत बताया गया, फिर भी ट्रंप अक्सर भारत पर भी निशाना साधते हैं।
दूसरी ओर, भारत में विपक्षी पार्टियां और कुछ सोशल मीडिया हैंडल इस मुद्दे को मोदी सरकार के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं। “अफ्रीकी देशों को ड्रग्स निर्यात” वाली बात आंशिक रूप से उन रिपोर्ट्स पर आधारित है जहां भारत से अवैध फार्मा प्रोडक्ट्स अफ्रीका पहुंच रहे हैं, लेकिन यह सरकारी नीति नहीं बल्कि कुछ बेईमान व्यापारियों का काम है।
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में कानून प्रवर्तन एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। NCB, ED, CBI और राज्य पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अगर कुछ गैंगस्टर राजनीतिक संरक्षण ले रहे हैं तो यह गंभीर मुद्दा है, लेकिन पूरे देश को “अपराधी गैंग द्वारा चलाया जा रहा” कहना न सिर्फ गलत है बल्कि भारत की छवि को अनावश्यक रूप से नुकसान पहुंचाता है।
ड्रग समस्या: वैश्विक चुनौती
ड्रग तस्करी कोई एक देश की समस्या नहीं।
- चीन फेंटानिल प्रीकर्सर का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है।
- अफगानिस्तान अफीम का प्रमुख उत्पादक।
- मैक्सिको और कोलंबिया कार्टेल्स अमेरिका में ड्रग्स पहुंचाते हैं।
- अफ्रीका अब नया ट्रांजिट हब बन रहा है।
भारत में युवाओं के बीच ड्रग्स का बढ़ता सेवन चिंताजनक है। पंजाब और उत्तर भारत के कई इलाकों में यह सामाजिक संकट बन चुका है। सरकार को और सख्ती बरतनी चाहिए — बॉर्डर सुरक्षा मजबूत करना, फार्मा एक्सपोर्ट पर बेहतर निगरानी, डार्कनेट ट्रैफिकिंग पर कंट्रोल और पुनर्वास कार्यक्रम चलाना।
भारत की इज्जत: तथ्यों पर टिकी है
भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यह फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, स्पेस और रक्षा क्षेत्र में मजबूत है। अमेरिका के साथ उसका रणनीतिक साझेदारी QUAD, iCET और व्यापार संबंधों पर आधारित है। एक वार्षिक रिपोर्ट में नाम आने से भारत की वैश्विक इज्जत “मिट्टी में नहीं मिलती”।
कई देशों ने भारत के साथ ड्रग काउंटर नारकोटिक्स सहयोग बढ़ाया है। हाल ही में अमेरिका ने NCB की मदद से कुछ फेंटानिल नेटवर्क तोड़े और सराहना की।
आगे का रास्ता
ट्रंप के बयान को गंभीरता से लेते हुए भारत को चाहिए:
1. फार्मास्यूटिकल एक्सपोर्ट पर सख्त रेगुलेशन और ट्रैकिंग सिस्टम।
2. NCB को और मजबूत बनाना, स्टेट पुलिस के साथ बेहतर कोऑर्डिनेशन।
3. अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना — अमेरिका, UNODC और पड़ोसी देशों के साथ।
4. युवाओं में जागरूकता अभियान और ड्रग फ्री इंडिया मिशन को तेज करना।
अंधेरे में तीर चलाने या राजनीतिक हमले करने से बेहतर है कि हम समस्या को जड़ से सुलझाएं। ड्रग तस्करी एक वैश्विक खतरा है। भारत अगर इसमें अपनी भूमिका निभाता है तो न सिर्फ अपनी युवा पीढ़ी बचाएगा बल्कि विश्व मंच पर अपनी विश्वसनीयता भी बढ़ाएगा।
ट्रंप की सूची में भारत का नाम शामिल होना चेतावनी है, लेकिन पूरे देश को “गैंगस्टर राज्य” बताना अतिरंजित और गलत है। भारत सरकार ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, लेकिन और ज्यादा पारदर्शिता, सख्ती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है। असली लड़ाई नारकोटिक्स के खिलाफ है — राजनीति नहीं। जब तक हम तथ्यों पर खड़े रहेंगे, भारत की इज्जत मजबूत रहेगी।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 26,2026