बिहार की सियासी गलियारों में आज एक और बड़ा बदलाव दर्ज हो गया। लंबे समय तक नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली NDA सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे सम्राट चौधरी अब बिहार के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। वे भाजपा के पहले ऐसे नेता हैं, जिन्होंने राज्य की सबसे बड़ी कुर्सी संभाली है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया और आज उन्होंने शपथ भी ले ली।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही है राजद के नेता प्रतिपक्ष **तेजस्वी यादव** की उस बधाई, जिसमें बधाई के साथ-साथ तीखा राजनीतिक तंज भी छिपा है। तेजस्वी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा –
“श्री सम्राट चौधरी जी द्वारा आज 𝐄𝐥𝐞𝐜𝐭𝐞𝐝 मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी को गद्दी से उतारने की अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करने पर बधाई तथा 𝐒𝐞𝐥𝐞𝐜𝐭𝐞𝐝 मुख्यमंत्री बनने पर हार्दिक शुभकामनाएं।”
यह बयान मात्र शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रहा। इसमें “इलेक्टेड” और “सेलेक्टेड” शब्दों का इस्तेमाल कर तेजस्वी ने साफ संकेत दिया कि सम्राट चौधरी की मुख्यमंत्री पद पर नियुक्ति जनता के वोट से नहीं, बल्कि पार्टी के अंदरूनी फैसले से हुई है। नीतीश कुमार को “जनता द्वारा चुने गए” मुख्यमंत्री बताते हुए तेजस्वी ने यह भी याद दिलाया कि सम्राट चौधरी ने पहले नीतीश को गद्दी से हटाने की प्रतिज्ञा ली थी, जो आज पूरी हो गई।
तेजस्वी का तंज: राजनीतिक चालाकी या सच्चाई का आईना?
तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार की सत्ता के बदलते समीकरणों को बखूबी दर्शाता है। एक तरफ NDA में भाजपा की बढ़ती ताकत और नीतीश कुमार के “साइडलाइन” होने की चर्चाएं हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे “सिलेक्शन” का खेल बता रहा है। तेजस्वी ने अपने बयान में आगे आशा जताई कि नई सरकार बिहार की जनता की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी, लेकिन उनके शब्दों में व्यंग्य साफ झलक रहा था।
यह पहला मौका नहीं है जब तेजस्वी ने सम्राट चौधरी पर तंज कसा हो। हाल ही में अंबेडकर जयंती पर उन्होंने सम्राट की शैक्षणिक डिग्री पर भी सवाल उठाए थे। अब मुख्यमंत्री पद संभालते ही सम्राट पर “लालू की पाठशाला का उत्पाद” कहकर तेजस्वी ने एक और दिलचस्प मोड़ जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी को पहली बार मंत्री और विधायक बनाने का श्रेय लालू प्रसाद यादव को जाता है, इसलिए भाजपा को भी अब लालू की विचारधारा के इर्द-गिर्द घूमना पड़ रहा है।
सम्राट चौधरी: राजनीतिक सफर का नया अध्याय
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी रोचक रहा है। आरजेडी से शुरूआत, फिर जद(यू) और अब भाजपा में लंबा समय बिताने के बाद वे बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। 57 वर्षीय सम्राट गृह विभाग संभाल चुके हैं और पार्टी में मजबूत संगठनात्मक छवि रखते हैं। नीतीश कुमार के लंबे शासन (लगभग 20 वर्ष) के बाद भाजपा का अपना मुख्यमंत्री बनाना बिहार राजनीति में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
सम्राट ने शपथ ग्रहण के बाद कहा कि यह उनके लिए पद नहीं, बल्कि जनसेवा का अवसर है। उन्होंने पीएम मोदी और नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार को विकसित बनाने का संकल्प लिया। लेकिन विपक्ष इसे “नीतीश को साइड करके भाजपा का कब्जा” बता रहा है।
बिहार राजनीति में “इलेक्टेड vs सेलेक्टेड” की बहस
तेजस्वी का “इलेक्टेड” और “सेलेक्टेड” वाला फॉर्मूला बिहार की जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह शब्दावली लोकतंत्र में चुने गए प्रतिनिधियों और पार्टी के आंतरिक फैसलों के बीच के अंतर को उजागर करती है। तेजस्वी ने इसे नीतीश कुमार के प्रति सम्मान और सम्राट के प्रति व्यंग्य दोनों रूपों में इस्तेमाल किया।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि तेजस्वी का यह बयान विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है। वे बिहार में विकास, रोजगार और सुशासन जैसे मुद्दों पर हमला बोलते हुए NDA सरकार को घेरना चाहते हैं। वहीं, सम्राट चौधरी की तरफ से अभी कोई सीधा जवाब नहीं आया है, लेकिन उनके समर्थक इसे “सामान्य राजनीतिक बयानबाजी” बता रहे हैं।
आगे क्या?
सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार अब बिहार की चुनौतियों – बेरोजगारी, प्रवासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे – से निपटने का दावा कर रही है। तेजस्वी यादव की राजद पहले से ही “महागठबंधन” की ताकत के साथ विपक्ष में मजबूत स्थिति में है। आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में तीखे सवाल-जवाब और आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लगने वाली है।
तेजस्वी का यह तंज भरा बधाई संदेश सिर्फ शब्दों का खेल नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता की नई जंग का संकेत है। क्या सम्राट चौधरी “सेलेक्टेड” वाली छवि को मिटाकर “जनता का मुख्यमंत्री” बन पाएंगे? या तेजस्वी यादव की यह लाइन विपक्ष के लिए नया हथियार साबित होगी? समय बताएगा।
बिहार की जनता अब उम्मीद कर रही है कि सत्ता का यह बदलाव विकास की नई कहानी लिखे, न कि सिर्फ सियासी बयानबाजी का नया अध्याय।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 15,2026