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Sunday, 5 April 2026

अमेरिका-इज़राइल की युद्ध उन्माद से भारत में पेट्रोल-डीज़ल का संकट: पंपों पर बोर्ड लगे, लंबी कतारें और असर की शुरुआत!

अमेरिका-इज़राइल की युद्ध उन्माद से भारत में पेट्रोल-डीज़ल का संकट: पंपों पर बोर्ड लगे, लंबी कतारें और असर की शुरुआत!
-Friday World March 23, 2026
आज के वैश्विक तनाव के बीच दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल गई है। अमेरिका और इज़राइल की आक्रामक नीति तथा ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष से मध्य पूर्व में युद्ध की आग भड़क उठी है। इस युद्ध उन्माद का सबसे बड़ा असर ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ा है। 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ने से क्रूड ऑयल की सप्लाई में व्यवधान आया है। 

 परिणामस्वरूप वैश्विक क्रूड ऑयल के दाम $100 से ऊपर पहुंच गए हैं, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है। भारत में यह संकट अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। 

 गुजरात के सूरत और राजकोट जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल-डीज़ल की सप्लाई में अचानक 50% तक की कटौती कर दी गई है। 

 ऑयल कंपनियों ने डीलरों पर सख्त नियंत्रण लगा दिए हैं, जिसके कारण कई पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं या कुछ समय के लिए ही खुले रहते हैं। 

 कुछ पंपों पर "पेट्रोल नहीं है" या "डीज़ल उपलब्ध नहीं" जैसे बोर्ड लगा दिए गए हैं। 

 इससे आम ग्राहकों पर सीधा असर पड़ रहा है – जरूरत के मुताबिक पेट्रोल भरवाने के लिए लंबी कतारें लग रही हैं, वाहन चालकों को आधा-अधूरा घंटा या उससे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। यह स्थिति कैसे बनी? 

आतंकवादी अमेरिका-इज़राइल के हमलों के बाद ईरान ने प्रतिरोध किया और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में तनाव बढ़ा दिया। 

 इस मार्ग से दुनिया का लगभग 20-30% क्रूड ऑयल और काफी मात्रा में नेचुरल गैस गुजरता है।

 भारत इस मार्ग से बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है – लगभग 50% क्रूड और LPG का बड़ा हिस्सा। 

 युद्ध के कारण शिपिंग रिस्क बढ़ गया, इंश्योरेंस प्रीमियम आसमान छू रहे हैं और सप्लाई चेन में व्यवधान आया है। 

 नतीजतन रिफाइनरियों को कच्चा तेल कम मिल रहा है, जिसका असर रिटेल सप्लाई पर पड़ रहा है। गुजरात में खासकर सूरत और राजकोट जैसे औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों में यह असर ज्यादा तीव्र है। 

 डीलरों को कंपनी से सीमित मात्रा मिल रही है, जिससे वे पंप बंद रखने को मजबूर हो रहे हैं। 

 डीलर इस कमी से इनकार करते हैं और कहते हैं कि "स्टॉक है लेकिन सीमित है", लेकिन वास्तव में ग्राहकों को पेट्रोल मिलने में मुश्किल हो रही है। 

 अहमदाबाद, वडोदरा और अन्य शहरों में भी ऐसी ही स्थिति दिख रही है, जहां पेट्रोल पंप पर कतारें बढ़ रही हैं और लोगों को ईंधन के लिए आधा दिन इंतजार करना पड़ रहा है। यह संकट सिर्फ पेट्रोल-डीज़ल तक सीमित नहीं है। 

 इसका असर औद्योगिक क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। 

 गुजरात में कई फैक्टरियों को गैस सप्लाई में 50% कटौती की गई है, जिससे सिरेमिक, टेक्सटाइल और अन्य उद्योगों में उत्पादन घट गया है। 

 मोरबी जैसे इलाकों में सैकड़ों यूनिट बंद हो गई हैं। 

 इससे रोजगार पर असर पड़ रहा है और महंगाई बढ़ रही है। सरकार और तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल-डीज़ल का पर्याप्त स्टॉक है और अफवाहों पर ध्यान न दें। 

 रूसी तेल की आयात बढ़ाकर और अन्य विकल्प अपनाकर स्थिति को नियंत्रण में रखने के प्रयास जारी हैं। 

→म लेकिन हकीकत यह है कि ग्राहकों को अब लंबी कतारों और सीमित उपलब्धता का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति में आम आदमी क्या करे? 

 अनावश्यक ट्रिप्स कम करें, कारपूलिंग अपनाएं और अफवाहों से दूर रहें। 

 अगर युद्ध लंबा चला तो यह संकट और गंभीर हो सकता है। 

 वैश्विक शांति और स्थिरता जरूरी है, क्योंकि युद्ध की आग में सबसे ज्यादा आम नागरिक ही झुलसते हैं।

 यह संकट एक चेतावनी है – ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविधीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। नहीं तो ऐसे वैश्विक तनाव में ऐसी असर बार-बार दिखेंगे। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 23, 2026