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Saturday, 4 April 2026

रेजीम चेंज हो गया... लेकिन अमेरिकी सेना में ही!अमेरिका के 'जोकर' युद्ध मंत्री पेटे हेगसेथ के हाथों सीनियर कमांडरों की बर्खास्तगी का सिलसिला जारी – ईरान युद्ध के बीच पेंटागन में भूचाल

रेजीम चेंज हो गया... लेकिन अमेरिकी सेना में ही!अमेरिका के 'जोकर' युद्ध मंत्री पेटे हेगसेथ के हाथों सीनियर कमांडरों की बर्खास्तगी का सिलसिला जारी – ईरान युद्ध के बीच पेंटागन में भूचाल
-Friday World-April 4,2026 
वॉशिंगटन, 4 अप्रैल 2026 – जब दुनिया अमेरिका और इज़राइल के ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध पर नज़रें गड़ाए हुए है, उसी वक्त अमेरिकी रक्षा विभाग (जिसे अब ट्रंप प्रशासन ने 'डिपार्टमेंट ऑफ वॉर' यानी युद्ध विभाग कहना शुरू कर दिया है) में एक अनोखा 'रेजीम चेंज' हो रहा है। लेकिन यह किसी विदेशी देश में नहीं, बल्कि खुद अमेरिकी सेना के शीर्ष कमांडरों के बीच।

 रक्षा सचिव (या अब युद्ध मंत्री) पेटे हेगसेथ ने हाल ही में आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज (Gen. Randy George) को तुरंत रिटायरमेंट पर भेज दिया। उनके साथ आर्मी के दो अन्य वरिष्ठ जनरल – ट्रांसफॉर्मेशन एंड ट्रेनिंग कमांड के कमांडर जनरल डेविड होड्ने (Gen. David Hodne) और आर्मी चीफ ऑफ चैप्लेंस मेजर जनरल विलियम ग्रीन जूनियर (Maj. Gen. William Green Jr.) – भी बर्खास्त कर दिए गए।
 पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा: “जनरल रैंडी जॉर्ज आर्मी के 41वें चीफ ऑफ स्टाफ के पद से तुरंत प्रभावी रिटायर हो रहे हैं। विभाग उनके दशकों के सेवा के लिए आभारी है।” लेकिन असली वजह क्या है? आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया। सैन्य सूत्रों के मुताबिक, यह ट्रंप प्रशासन की व्यापक 'प्यूरिफिकेशन' या सफाई अभियान का हिस्सा है, जिसमें पिछले एक साल में जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन, नेवी के चीफ और एयर फोर्स के वाइस चीफ समेत दर्जनों वरिष्ठ अधिकारी निकाले जा चुके हैं। 

यह घटना इसलिए और चौंकाने वाली है क्योंकि यह ईरान युद्ध के बीच हो रही है – जब अमेरिकी सेना को लड़ाई के मैदान में फोकस की सबसे ज्यादा जरूरत है। कई रक्षा विशेषज्ञ इसे “युद्ध के दौरान इतिहास की सबसे बड़ी लीडरशिप शेकअप” बता रहे हैं। हेगसेथ, जो खुद एक पूर्व फॉक्स न्यूज होस्ट और वेटरन हैं, का कहना है कि वे सेना को “ट्रंप के विजन” के अनुरूप बनाना चाहते हैं – यानी वेक संस्कृति (woke culture) से मुक्ति, लड़ाकू तत्परता पर फोकस और राजनीतिक रूप से तटस्थ कमांडरों की जगह उन लोगों को लाना जो प्रशासन की नीतियों से पूरी तरह सहमत हों। 

 क्यों हो रही है यह सफाई? 

ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही पेंटागन में बदलाव की हवा चल रही थी। हेगसेथ ने पद संभालते ही कहा था कि सेना में “पॉलिटिकल करेक्टनेस” और DEI (Diversity, Equity, Inclusion) नीतियों ने सैन्य तैयारियों को कमजोर किया है। उन्होंने वादा किया था कि वे चार-स्टार जनरलों और एडमिरलों की संख्या घटाएंगे और केवल “वार फाइटर्स” को प्रमोट करेंगे। 

जनरल रैंडी जॉर्ज का कार्यकाल अभी एक साल से ज्यादा बाकी था, लेकिन उन्हें अचानक “रिटायर” कर दिया गया। उनकी जगह एक्टिंग चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में जनरल क्रिस्टोफर लेनेवे (Gen. Christopher LaNeve) को लाया गया, जो पहले हेगसेथ के सीनियर मिलिट्री असिस्टेंट रह चुके हैं। यह नियुक्ति भी संकेत देती है कि नई लीडरशिप पुरानी से ज्यादा “लाइन में” होगी। 

ईरानी दूतावास ने इस घटना पर तंज कसते हुए कहा – “अमेरिका में रेजीम चेंज हो गया है... लेकिन अपनी ही सेना में!” सोशल मीडिया पर यह मीम बन गया है कि जब अमेरिका ईरान को “स्टोन एज” में भेजने की बात कर रहा था, तब खुद उसके युद्ध मंत्री अपने ही जनरलों को “रिटायरमेंट एज” में भेज रहे हैं। 

 क्या कहते हैं विशेषज्ञ? कुछ रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सेना की तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में है। हेगसेथ का फोकस नई टेक्नोलॉजी, हाइपरसोनिक मिसाइलों और चीन-ईरान जैसे खतरों पर है। लेकिन आलोचक चिंता जता रहे हैं कि युद्ध के बीच इतने बड़े स्तर पर कमांड चेंज से कमांड चेन में混亂 (confusion) पैदा हो सकता है। 

एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “जनरल जॉर्ज जैसे अनुभवी कमांडर का अचानक जाना, खासकर ट्रांसफॉर्मेशन कमांड के प्रमुख के साथ, आर्मी के मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम को प्रभावित कर सकता है।” 

दूसरी ओर, ट्रंप समर्थक इसे “लंबे समय से जरूरी सफाई” बता रहे हैं। वे कहते हैं कि पिछले प्रशासन में सेना “पॉलिटिकली वीक” हो गई थी और अब इसे “लड़ने लायक” बनाया जा रहा है। 

 बड़ा सवाल: आगे क्या? यह सिर्फ शुरुआत लगती है। सूत्र बताते हैं कि आर्मी सेक्रेटरी के पद पर भी बदलाव की चर्चा चल रही है। कुल मिलाकर, ट्रंप 2.0 में पेंटागन पूरी तरह नया रूप ले रहा है। हेगसेथ ने पहले ही जॉइंट चीफ्स, नेवी और एयर फोर्स में बड़े बदलाव किए हैं। अब आर्मी की बारी है। 

दुनिया देख रही है कि क्या यह “रेजीम चेंज” अमेरिकी सेना को और मजबूत बनाएगा या युद्ध के मैदान में कमजोरी पैदा करेगा। ईरान युद्ध अभी जारी है और अमेरिकी पायलटों, सैनिकों की जान दांव पर है। ऐसे में लीडरशिप की स्थिरता कितनी जरूरी है, यह बहस जारी रहेगी। 

एक पुरानी कहावत है – “घर में ही दुश्मन हो तो बाहर का दुश्मन कम खतरनाक लगता है।” अमेरिकी सेना में चल रहा यह आंतरिक भूचाल देखकर लगता है कि वॉशिंगटन का असली युद्ध अब अपने ही हॉल में चल रहा है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 4,2026