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Tuesday, 7 April 2026

अगर अमेरिका-इजरायल ने सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया तो क्षेत्रीय तेल सुविधाएं राख हो जाएंगी तेल और गैस संकट सालों तक रहेगा,

अगर अमेरिका-इजरायल ने सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया तो क्षेत्रीय तेल सुविधाएं राख हो जाएंगी तेल और गैस संकट सालों तक रहेगा,
-Friday World-April 7,2026 
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खार्ग द्वीप पर हुए हमलों के बाद दुनिया को सख्त चेतावनी दी है। IRGC ने कहा है कि अब उसका संयम पूरी तरह खत्म हो गया है। अगर अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाते हैं तो IRGC का जवाब क्षेत्र से बाहर भी जाएगा। अमेरिका और उसके सहयोगियों की तेल-गैस सुविधाओं को नष्ट कर दिया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में तेल और गैस की आपूर्ति सालों तक ठप हो सकती है।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के माध्यम से जारी बयान में IRGC ने स्पष्ट कहा, “अगर अमेरिकी आतंकवादी सेना लाल रेखा पार करती है तो हमारा जवाब क्षेत्र से बाहर जाएगा। हम अमेरिका और उसके साझेदारों के इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाएंगे, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगी क्षेत्र में तेल और गैस से वंचित हो जाएंगे — और यह स्थिति कई वर्षों तक बनी रहेगी।”

यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए ईरान को अंतिम अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला तो ईरान के पावर प्लांट, ब्रिज और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले होंगे।

 खार्ग द्वीप पर हमला: ईरान की तेल निर्यात का मुख्य केंद्र

खार्ग द्वीप ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है। यह द्वीप ईरान के कुल कच्चे तेल निर्यात का लगभग 90% संभालता है। मार्च 2026 में अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे, जिसमें सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने “खार्ग द्वीप पर हर सैन्य लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट” कर दिया, लेकिन तेल सुविधाओं को जानबूझकर बचाया गया।

ईरान ने इन हमलों को “लाल रेखा” पार करने का आरोप लगाया है। अब IRGC कह रही है कि अगर सिविलियन या तेल संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई और हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई में पूरे क्षेत्र (खाड़ी देशों) की अमेरिकी और पश्चिमी कंपनियों की तेल-गैस सुविधाओं को आग के हवाले कर दिया जाएगा।

 होर्मुज स्ट्रेट का संकट: दुनिया का 20% तेल प्रभावित

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है। यहां से रोजाना लगभग 20% वैश्विक तेल और काफी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) गुजरती है। ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद इस स्ट्रेट को आंशिक रूप से बंद कर दिया है। IRGC नेवी ने घोषणा की है कि स्ट्रेट “अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों के लिए पहले जैसा कभी नहीं रहेगा”।

ईरान ने स्ट्रेट को दो भागों में बांट दिया है — एक IRGC नियंत्रित उत्तरी गलियारा और दूसरा ओमान तट के साथ दक्षिणी गलियारा। इससे शिपिंग प्रभावित हुई है और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। कई देशों में ईंधन की कमी और राशनिंग की स्थिति पैदा हो गई है।

IRGC की नई चेतावनी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। अगर ईरान ने क्षेत्रीय तेल टर्मिनल्स, पेट्रोकेमिकल प्लांट्स और पाइपलाइनों को निशाना बनाया तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित होगा।

IRGC की रणनीति और क्षेत्रीय प्रभाव

IRGC ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य इकाई है, जो सीधे सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई के अधीन काम करती है। इसने पहले भी होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दी है। अब यह चेतावनी UAE, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों की तेल सुविधाओं पर केंद्रित है, जहां अमेरिकी कंपनियों की बड़ी हिस्सेदारी है।

ईरान ने पहले ही UAE के फुजैरा पोर्ट और बहरीन के पेट्रोकेमिकल यूनिट्स पर ड्रोन हमलों का दावा किया है। अगर IRGC ने अपना वादा पूरा किया तो खाड़ी क्षेत्र में तेल उत्पादन और निर्यात सालों तक ठप रह सकता है। इससे न केवल अमेरिका बल्कि यूरोप, एशिया और भारत जैसे देशों पर भी भारी असर पड़ेगा।

 ट्रंप की अल्टीमेटम और बढ़ता तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बार-बार अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुला तो “एक पूरी सभ्यता रातोंरात मर जाएगी”। ट्रंप ने पावर प्लांट्स और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की धमकी दी है।

ईरान ने इन अल्टीमेटम को “युद्ध अपराध” करार दिया है और कहा है कि बातचीत धमकियों के साथ असंगत है। दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के माध्यम से 45 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव आया है, लेकिन ईरान ने इसे अस्वीकार कर दिया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर IRGC ने क्षेत्रीय तेल सुविधाओं को निशाना बनाया तो:
- तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएंगी।
- भारत, चीन, जापान और यूरोपीय देशों में ईंधन संकट गहरा जाएगा।
- मुद्रास्फीति बढ़ेगी और मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा।
- होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग पूरी तरह ठप हो सकती है।

ईरान की IRGC की यह चेतावनी सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं लग रही। खार्ग द्वीप पर हुए हमलों के बाद ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वह किसी भी हमले का जवाब “पूर्ण शक्ति” से देगा।

क्या होगा आगे?

वर्तमान में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण है। अमेरिका और इजरायल ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमले जारी रखे हुए हैं, जबकि ईरान मिसाइल-ड्रोन हमलों और होर्मुज स्ट्रेट के नियंत्रण के माध्यम से जवाब दे रहा है।

दुनिया इस समय मिडिल ईस्ट के इस संघर्ष को चिंता से देख रही है। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर रहा है, लेकिन दोनों तरफ से जारी धमकियां स्थिति को और बिगाड़ रही हैं।

अगर IRGC ने अपनी चेतावनी को अमल में लाया तो न सिर्फ मिडिल ईस्ट बल्कि पूरी दुनिया को तेल और गैस का भयंकर संकट झेलना पड़ सकता है — जो कई वर्षों तक बना रह सकता है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World-April 7,2026