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Tuesday, 7 April 2026

मिडिल ईस्ट में आग का तूफान: ईरान का ताबड़तोड़ मिसाइल-ड्रोन हमला, डिमोना में पावर प्लांट, केमिकल प्लांट और इंडस्ट्री में भीषण आग

मिडिल ईस्ट में आग का तूफान: ईरान का ताबड़तोड़ मिसाइल-ड्रोन हमला, डिमोना में पावर प्लांट, केमिकल प्लांट और इंडस्ट्री में भीषण आग
-Friday World-April 7,2026 
ईरान ने इजरायल द्वारा अपनी रेलवे लाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले के जवाब में ताबड़तोड़ ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से इजरायल पर हमला बोल दिया है। दक्षिणी इजरायल के डिमोना शहर (जहां इजरायल का प्रमुख परमाणु शोध केंद्र स्थित है) और आसपास के इलाकों में मिसाइलें गिरने से पावर प्लांट, केमिकल प्लांट और एक महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई में आग लग गई। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने साफ चेतावनी दी है कि “आज की रात अमेरिका और इजरायल के लिए भारी पड़ने वाली है।”

फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान संघर्ष में यह नया और खतरनाक मोड़ है। इजरायल ने ईरान की रेलवे लाइन, ब्रिज और हाईवे को निशाना बनाया था, जिसमें नागरिक नुकसान भी हुआ। ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और “ट्रू प्रॉमिस” अभियान के तहत कई लहरों में मिसाइल और ड्रोन दागे।

21 मार्च 2026 की रात डिमोना और अराद शहरों पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलें गिरीं। इजरायली स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अराद में 116 और डिमोना में 64 लोगों सहित कुल 180 से ज्यादा लोग घायल हुए। कुछ की हालत गंभीर है, जिसमें 10 वर्षीय बच्चा भी शामिल है। मिसाइलों के सीधे हमले से आवासीय इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और कई जगहों पर आग लग गई। डिमोना के पास केमिकल प्लांट (बीयरशेबा के निकट) में मिसाइल के टुकड़े गिरने से भीषण आग लगी। पावर प्लांट और अन्य औद्योगिक क्षेत्र भी प्रभावित हुए।

ईरानी मीडिया ने इसे “नेटांज पर हमले का जवाब” बताया। इजरायल ने ईरान के नेटांज परमाणु सुविधा पर हमला किया था, जिसके बाद ईरान ने डिमोना को निशाना बनाया। डिमोना इजरायल के शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर से महज कुछ किलोमीटर दूर है। विशेषज्ञों का कहना है कि परमाणु रिएक्टर पर सीधा हमला न होने से रेडियोएक्टिव प्रदूषण का खतरा कम है, लेकिन प्रतीकात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव बहुत बड़ा है।

डिमोना और इजरायल में हुए नुकसान

डिमोना शहर नेगेव रेगिस्तान में स्थित है और इजरायल की सुरक्षा के लिए अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। मिसाइल हमलों से यहां तीन जगहों पर प्रभाव पड़ा। एक तीन मंजिला इमारत ढह गई और कई जगहों पर आग लग गई। फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की टीमें रात भर काम करती रहीं। 

अराद शहर में भी मिसाइल ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया। इजरायली सेना का दावा है कि अधिकांश मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया, लेकिन कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें (सैकड़ों किलोग्राम वॉरहेड वाली) बचकर निकल गईं और सीधा असर हुआ। क्लस्टर म्यूनिशन और मलबे से सिविलियन इलाकों में अतिरिक्त नुकसान हुआ।

ईरान ने ड्रोन हमलों से इजरायल के पेट्रोकेमिकल प्लांट्स को भी निशाना बनाया। कुछ रिपोर्ट्स में डिमोना के निकट पेट्रोकेमिकल सुविधाओं पर ड्रोन हमले की पुष्टि हुई है।

 ईरान की चेतावनी: “आज की रात भारी पड़ेगी”

ईरान के सैन्य सूत्रों ने कहा कि यह हमला “निरंतर गहरी आग” (Continuous Deep Fire) की रणनीति का हिस्सा है। IRGC ने घोषणा की कि अगर अमेरिका और इजरायल सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रखेंगे तो जवाब और तेज तथा व्यापक होगा। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर हॉर्मुज की खाड़ी नहीं खोली गई तो “एक पूरी सभ्यता रातोंरात मर जाएगी और कभी वापस नहीं आएगी।” ट्रंप ने ईरान पर सख्त आर्थिक और सैन्य दबाव बनाए रखने की बात कही।

संघर्ष का व्यापक संदर्भ

यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के ईरान पर आश्चर्यजनक हवाई हमलों से शुरू हुआ। तब से दोनों तरफ से सैकड़ों हमले हो चुके हैं। ईरान ने अब तक 9 से ज्यादा मिसाइल सैल्वो दागे हैं। इजरायल और अमेरिका ने ईरान के पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, एयरपोर्ट और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया है।

ईरान की रणनीति ऊर्जा आपूर्ति बाधित करने और लंबे समय तक टिके रहने पर आधारित है। वहीं इजरायल का फोकस ईरान की मिसाइल और परमाणु क्षमता को कमजोर करने पर है।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

इस संघर्ष से मिडिल ईस्ट की स्थिरता गंभीर खतरे में है। हॉर्मुज की खाड़ी (दुनिया के तेल निर्यात का प्रमुख मार्ग) बंद होने का खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। कई देशों ने नागरिकों को क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है।

संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने दोनों पक्षों से परमाणु सुविधाओं के पास हमले न करने की अपील की है। IAEA प्रमुख ने चेतावनी दी कि ऐसे हमले सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन हैं।

क्या आगे हो सकता है?

विश्लेषकों का मानना है कि संघर्ष अभी और बढ़ सकता है। ईरान के पास लंबी दूरी की मिसाइलें हैं और उसने पहले ही डिएगो गार्सिया जैसे दूर के ठिकानों पर हमले की क्षमता दिखाई है। इजरायल की एयर डिफेंस सिस्टम मजबूत है, लेकिन निरंतर हमलों से उस पर दबाव बढ़ रहा है।

दुनिया इस समय मिडिल ईस्ट के इस नए युद्ध को चिंता से देख रही है। दोनों पक्षों को संयम बरतने की जरूरत है, वरना स्थिति अनियंत्रित हो सकती है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 7,2026