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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Wednesday, 15 April 2026

यूएसएस बुश को लगा अंसारुल्लाह का ‘बुच’: लाल सागर से बचकर अफ्रीका घूमकर जा रहा अमेरिकी विमानवाहक, यमनी स्वतंत्र सेनानियों के डर ने उजागर की पश्चिमी नौसेना की सीमा

यूएसएस बुश को लगा अंसारुल्लाह का ‘बुच’: लाल सागर से बचकर अफ्रीका घूमकर जा रहा अमेरिकी विमानवाहक, यमनी स्वतंत्र सेनानियों के डर ने उजागर की पश्चिमी नौसेना की सीमा
-Friday World-April 15,2026
सना/वाशिंगटन, 15 अप्रैल 2026 – अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली निमित्ज़-क्लास विमानवाहक यूएसएस जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश (USS George H.W. Bush) पश्चिमी एशिया की ओर बढ़ते हुए लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से बचने के लिए अफ्रीका के दक्षिणी छोर से घूमकर जा रहा है। यमनी स्वतंत्र सेनानियों (अंसारुल्लाह) के हमलों के डर से अमेरिका को यह लंबा और महंगा रास्ता अपनाना पड़ा है। 

यह घटना पश्चिमी देशों की नौसेना क्षमता की सीमाओं को साफ उजागर करती है। लाल सागर में अमेरिका और यूरोपीय संघ के पिछले कई नौसैनिक प्रयास यमनी हमलों के सामने विफल साबित हुए थे, जिसके बाद कई युद्धपोतों को पीछे हटना पड़ा। अब यूएसएस बुश कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (जिसमें एस्कॉर्ट जहाज यूएसएस डॉनल्ड कुक, यूएसएस मेसन और यूएसएस रॉस शामिल हैं) अफ्रीका के आसपास नामीबिया के तट के पास से गुजर रहा है।

क्यों लिया गया लंबा रास्ता?
अमेरिका ने ईरान पर हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी लागू करने के लिए क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ाने का फैसला किया है। सामान्य रूप से यूएसएस बुश मेडिटेरेनियन सागर, सुएज कैनाल और लाल सागर होते हुए अरब सागर पहुंचता, लेकिन **बाब अल-मंदेब** स्ट्रेट और लाल सागर में अंसारुल्लाह की मजबूत मौजूदगी के कारण यह रास्ता खतरनाक माना गया।

यूएस नेवल इंस्टीट्यूट (USNI News) के अनुसार, कैरियर को अफ्रीका घुमाकर भेजा गया ताकि रेड सी और बाब अल-मंदेब से बच सकें। यह फैसला मार्च के अंत में डिप्लॉयमेंट के बाद लिया गया। अमेरिकी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से कारण नहीं बताया, लेकिन साफ है कि **यमनी स्वतंत्र सेनानियों** के ड्रोन, मिसाइल और एंटी-शिप हमलों का डर मुख्य वजह है।

पिछले दो वर्षों में अंसारुल्लाह ने लाल सागर में सैकड़ों हमले किए, जिसमें अमेरिकी और यूरोपीय जहाज भी शामिल रहे। इन हमलों के कारण कई वाणिज्यिक जहाजों की शिपिंग 70% तक घटी और बीमा लागत आसमान छू गई। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने “ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्डियन” और अन्य अभियानों के तहत लाल सागर को सुरक्षित करने की कोशिश की, लेकिन यमनी हमलों के सामने वे प्रयास विफल रहे। कई युद्धपोतों को पीछे हटना पड़ा और पश्चिमी नौसेना की “समुद्री नियंत्रण” की सीमाएं सामने आ गईं।

 अंसारुल्लाह की मजबूत स्थिति और चेतावनी
यमनी स्वतंत्र सेनानी (अंसारुल्लाह) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे लाल सागर और बाब अल-मंदेब को अमेरिकी या इजरायली हितों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देंगे। उन्होंने ईरान के साथ एकजुटता दिखाते हुए चेतावनी दी कि अगर अमेरिका हॉर्मुज पर नाकाबंदी बढ़ाता है तो वे भी अपने विकल्प खुला रखेंगे। 

अंसारुल्लाह के प्रवक्ता ने कहा कि वे क्षेत्रीय न्याय और प्रतिरोध की भावना से लड़ रहे हैं। उनके पास आधुनिक ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलें और एंटी-शिप हथियार हैं, जो लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम हैं। पिछले हमलों में उन्होंने दिखाया कि वे बड़े-बड़े युद्धपोतों को भी निशाना बना सकते हैं।

यह स्थिति अमेरिका के लिए दोहरी चुनौती है – एक तरफ हॉर्मुज पर ईरान को घेरना, दूसरी तरफ लाल सागर में अंसारुल्लाह से बचना। यूएसएस बुश का अफ्रीका रूट हजारों अतिरिक्त मील और कई अतिरिक्त दिन जोड़ता है, जिससे ईंधन, समय और संसाधनों का भारी खर्च होता है।

 वैश्विक प्रभाव और खाड़ी क्षेत्र की चिंता
यह डायवर्शन वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा रहा है। लाल सागर से गुजरने वाला व्यापार पहले ही प्रभावित है। अगर हॉर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों चोकपॉइंट्स पर तनाव बढ़ा तो तेल की कीमतें $150 या उससे ऊपर जा सकती हैं। भारत, चीन, यूरोप और एशिया जैसे बड़े आयातक देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

खाड़ी देश (सऊदी अरब, यूएई आदि) भी चिंतित हैं। उन्होंने पहले ही यनबू जैसे वैकल्पिक पोर्ट्स से तेल निर्यात बढ़ाया है, लेकिन अंसारुल्लाह की क्षमता के कारण वे भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। कुछ देशों ने अमेरिका से कहा है कि हालात “फ्लूइड” हैं और आगे बढ़ने पर स्थिति बिगड़ सकती है।

 अमेरिकी रणनीति और हताशा
ट्रंप प्रशासन हॉर्मुज पर नाकाबंदी को ईरान पर दबाव बनाने का हथियार बना रहा है, लेकिन यूएसएस बुश जैसे शक्तिशाली कैरियर को लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। यह अमेरिकी नौसेना की “स्वतंत्र नौवहन” (Freedom of Navigation) की नीति पर सवाल उठाता है। 

विश्लेषक कहते हैं कि अंसारुल्लाह ने एक छोटे लेकिन दृढ़ समूह के रूप में पश्चिमी गठबंधन को चुनौती दी है। लाल सागर में पिछले प्रयासों की विफलता ने दिखाया कि पारंपरिक नौसेना शक्ति अब अकेले पर्याप्त नहीं है। ड्रोन, मिसाइल और असममित युद्ध की रणनीति ने खेल बदल दिया है।

 आगे क्या?
अमेरिका अब अरब सागर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है, लेकिन अंसारुल्लाह की चेतावनी बरकरार है। अगर तनाव बढ़ा तो लाल सागर फिर से युद्ध क्षेत्र बन सकता है। 

यह घटना साफ बताती है कि यमनी स्वतंत्र सेनानियों ने क्षेत्रीय समीकरण बदल दिए हैं। यूएसएस बुश का “अफ्रीका डायवर्शन” न केवल एक सैन्य निर्णय है, बल्कि आधुनिक युद्ध में असममित शक्तियों की बढ़ती भूमिका का प्रतीक भी है। 

अब सवाल यह है कि अमेरिका कितनी दूर तक यह “बचाव की रणनीति” अपनाएगा और क्या वह हॉर्मुज पर नाकाबंदी को बनाए रख पाएगा, जबकि उसके पीछे लाल सागर का खतरा मंडरा रहा है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-April 15,2026