-Friday World-April 6,2026
इजराइल की कट्टरपंथी नीतियों और सैन्य कार्रवाइयों ने दशकों से फिलिस्तीनी नागरिकों को निशाना बनाया है। नागरिकों को जानबूझकर लक्ष्य बनाना, आवासीय इलाकों में बमबारी, अस्पतालों-स्कूलों पर हमले और क्लस्टर बमों जैसी प्रतिबंधित हथियारों का इस्तेमाल — ये सब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और युद्ध के नियमों का घोर उल्लंघन हैं। कई मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स के अनुसार, ये कार्य न केवल युद्ध अपराध हैं, बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध (crimes against humanity) और कुछ मामलों में नरसंहार (genocide) की श्रेणी में आते हैं।
फिलिस्तीनी जनता पर किए गए ये अपराध युद्ध अपराध से भी आगे निकलकर **मानव अपराध** बन चुके हैं, क्योंकि इनमें व्यवस्थित, व्यापक और जानबूझकर नागरिकों को नष्ट करने की मंशा दिखती है।
क्लस्टर बम: अनियंत्रित विनाश का हथियार
क्लस्टर बम ऐसे हथियार हैं जो एक मिसाइल से सैकड़ों छोटे-छोटे बमलेट्स छोड़ते हैं, जो बड़े क्षेत्र में फैलकर निशाना बनाते हैं। इनमें से कई बमलेट्स फटते नहीं और भूमि पर खतरनाक माइन्स की तरह बने रहते हैं, जो सालों तक नागरिकों — खासकर बच्चों — को नुकसान पहुंचाते रहते हैं।
2008 की क्लस्टर मुनिशन कन्वेंशन ने इन हथियारों पर प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि ये अनियंत्रित (indiscriminate) होते हैं और नागरिकों- vo सैनिकों में भेद नहीं करते। इजराइल और अमेरिका इस संधि के सदस्य नहीं हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (IHL) के तहत इनका इस्तेमाल घनी आबादी वाले इलाकों में प्रतिबंधित माना जाता है।
इजराइल ने 2006 में लेबनान पर हमले के दौरान अनुमानित 40 लाख क्लस्टर बमलेट्स दागे थे, जिनमें से कई युद्ध समाप्ति के ठीक पहले फेंके गए। इनसे दक्षिण लेबनान में सैकड़ों नागरिक मारे गए और हजारों घायल हुए। 2025 में भी लेबनान में इजराइली हमलों में क्लस्टर मुनिशन के अवशेष पाए गए।
गाजा में भी इजराइली कार्रवाइयों में क्लस्टर जैसी अनियंत्रित बमबारी के आरोप लगे हैं, जहां घनी आबादी वाले इलाकों में हमले हुए। UN और Human Rights Watch जैसी संस्थाओं ने इजराइल पर indiscriminate attacks का आरोप लगाया है, जिसमें नागरिकों की मौत और घायल होने की संख्या बहुत अधिक रही।
दशकों का पैटर्न: नागरिकों को निशाना
इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष में इजराइल की सैन्य रणनीति को कई रिपोर्ट्स में **व्यवस्थित** बताया गया है:
- नागरिकों पर सीधा हमला: आवासीय भवन, अस्पताल, स्कूल, UNRWA सुविधाएं और राहत कैंप बार-बार निशाने पर आए। UN रिपोर्ट्स में कहा गया कि हमले ऐसे थे जिनमें सैन्य लाभ की तुलना में नागरिक नुकसान अत्यधिक था — जो युद्ध अपराध है।
- भुखमरी को हथियार बनाना: गाजा में पानी, बिजली, ईंधन और खाद्य सामग्री की आपूर्ति रोकना या सीमित करना। Human Rights Watch ने इसे starvation as a method of warfare (युद्ध में भुखमरी को हथियार बनाना) कहा, जो स्पष्ट युद्ध अपराध है। इससे हजारों लोग, खासकर बच्चे, भूख और बीमारी से मारे गए।
- जनसंख्या विनाश की स्थिति: UN विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि गाजा में हमलों से फिलिस्तीनियों के अस्तित्व के लिए अनुकूल परिस्थितियां नष्ट की जा रही हैं, जो नरसंहार की परिभाषा के करीब है।
2023 से शुरू हुए बड़े संघर्ष में गाजा में 70,000 से अधिक मौतें रिपोर्ट की गईं (कुछ स्वतंत्र अनुमानों में 75,000+), जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। हजारों लोग मलबे के नीचे दबे हैं।
क्या ये युद्ध अपराध से आगे मानवता के खिलाफ अपराध हैं?
हां, कई विशेषज्ञ और रिपोर्ट्स के अनुसार।
- युद्ध अपराध: अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (Geneva Conventions) के उल्लंघन — जैसे नागरिकों की रक्षा न करना, अनुपातहीन हमले, प्रतिबंधित हथियारों का इस्तेमाल।
- मानवता के खिलाफ अपराध: जब ये कार्य व्यवस्थित या व्यापक हमले का हिस्सा हों और नागरिक आबादी को जानबूझकर निशाना बनाया जाए। ICC ने इजराइली नेताओं के खिलाफ वारंट जारी किए हैं, जिसमें war crimes और crimes against humanity शामिल हैं।
- फिलिस्तीनी जनता पर दशकों से चला आ रहा कब्जा, बस्तियां बसाना, घरों का विध्वंस और आर्थिक दबाव — ये सब मिलकर एक लंबी सूची बनाते हैं, जो सामूहिक सजा (collective punishment) का रूप ले चुकी है।
ये अपराध केवल एक पक्ष के नहीं हैं। 7 अक्टूबर 2023 के हमलों में हमास और अन्य समूहों द्वारा इजराइली नागरिकों की हत्या, बंधक बनाना और अन्य उल्लंघन भी युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध हैं। लेकिन इजराइल की राज्य शक्ति और लंबे कब्जे के संदर्भ में फिलिस्तीनी पक्ष पर हुए नुकसान की तीव्रता और पैमाना कहीं बड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका और दोहरे मापदंड
ICC और ICJ में मामलों की सुनवाई चल रही है। UN रिपोर्ट्स में बार-बार इजराइल से जवाबदेही की मांग की गई है। लेकिन वास्तविकता में शक्तिशाली देशों का समर्थन और राजनीतिक दबाव जांच को प्रभावित करता रहा है।
दोहरे मापदंड स्पष्ट हैं — जब क्लस्टर बम या नागरिक नुकसान की बात दूसरे पक्ष पर होती है तो निंदा तेज होती है, लेकिन इजराइल की कार्रवाइयों पर अक्सर चुप्पी या कमजोर प्रतिक्रिया मिलती है।
न्याय और जवाबदेही का समय
फिलिस्तीन की जनता पर इजराइल द्वारा किए गए अपराध युद्ध अपराध से आगे निकलकर मानव अपराध हैं, क्योंकि इनमें एक पूरी आबादी को व्यवस्थित रूप से नष्ट करने या उसके अस्तित्व को खतरे में डालने की कोशिश नजर आती है। क्लस्टर बमों, भुखमरी और अनुपातहीन बमबारी जैसे तरीके इसकी पुष्टि करते हैं।
दुनिया को अब चुप्पी तोड़नी होगी। अंतरराष्ट्रीय कानून सभी के लिए समान होना चाहिए — चाहे कोई भी पक्ष हो। फिलिस्तीनी नागरिकों की जान-माल की रक्षा, कब्जे का अंत और दोनों पक्षों से युद्ध अपराधों की निष्पक्ष जांच — यही स्थायी शांति का रास्ता है।
जब तक न्याय नहीं मिलेगा, फिलिस्तीन की पीड़ा जारी रहेगी और मानवता की सामूहिक चेतना पर कलंक लगा रहेगा। समय आ गया है कि वैश्विक समुदाय इन अपराधों की लंबी सूची को बंद करे और जवाबदेही सुनिश्चित करे।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 6,2026