-Friday World-April 4,2026
राजस्थान की राजधानी जयपुर, जहां विकास की चमक-दमक हर कोने में दिखनी चाहिए, वहां सिविल लाइन्स विधानसभा क्षेत्र के सुशीलपुरा (वार्ड-45) इलाके में एक भयावह जल संकट ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी को तबाह कर दिया है। पीने के पानी में सीवर का गंदा पानी मिल जाने से डायरिया, उल्टी, पेट दर्द और बुखार जैसी बीमारियों का प्रकोप फैल गया है। बीते एक सप्ताह से रोजाना अस्पताल और डिस्पेंसरी में मरीजों की भीड़ लगी हुई है। यह मामला न केवल स्वास्थ्य संकट है, बल्कि शासन-प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्टाचार की भी तस्वीर पेश करता है।
घटना कैसे शुरू हुई? सुशीलपुरा इलाके में सड़क निर्माण कार्य के दौरान बड़ी लापरवाही हुई। स्थानीय निवासियों के अनुसार, करीब एक महीने पहले एक अच्छी-खासी सीमेंटेड सड़क को रात के अंधेरे में तोड़ दिया गया। इस काम के दौरान पानी की मुख्य पाइपलाइन और सीवर लाइन दोनों क्षतिग्रस्त हो गईं। सीवर का गंदा पानी सड़कों पर बहने लगा और अंततः पीने के पानी की लाइनों में घुस गया।
स्थानीय निवासी मदन यादव ने बताया, “सोमवार रात सड़क बनाने के दौरान सीवर लाइन टूट गई और पानी की पाइप भी डैमेज हो गई। सुबह लोगों को कुछ पता नहीं चला और वे वही दूषित पानी पी गए। इससे कई परिवारों में बीमारी फैल गई।”
एक अन्य निवासी रतन लाल का कहना है, “श्याम नगर इलाके में बड़ी पाइपलाइन टूटने के बाद पानी के दबाव को छोटी लाइनों में डायवर्ट किया गया। इसी दौरान सीवर का पानी सप्लाई लाइन में मिल गया। अब नल से आने वाला पानी सूंघने लायक भी नहीं है।”
नलों से निकलने वाला पानी न केवल बदबूदार है, बल्कि उसमें गंदगी साफ दिखाई देती है। कई परिवार पिछले एक सप्ताह से बोतलबंद पानी या टैंकरों पर निर्भर हैं, लेकिन हर कोई इतना खर्च नहीं उठा सकता।
स्वास्थ्य पर असर: डिस्पेंसरी में मरीजों की भीड़ सरकारी डिस्पेंसरी युवाम-45 के प्रभारी डॉक्टर अनिल मेहता ने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा, “बीते चार दिनों में ही 75 से ज्यादा मरीज आ चुके हैं। हर दिन 120 की ओपीडी में से करीब 20 लोग डायरिया, पेट दर्द और उल्टी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इस समय भी कुछ मरीज इलाज कराने आए हुए हैं।”
डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उल्टी-दस्त से डिहाइड्रेशन की समस्या आम है। कुछ गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती भी कराना पड़ा। निजी चिकित्सकों ने भी ऐसे मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि बताई है।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने पूरे मामले को और तूल दे दिया। वीडियो में सुशीलपुरा के स्थानीय लोग विधायक गोपाल शर्मा को दूषित पानी का गिलास थमाते नजर आते हैं। महिलाएं गुस्से में कहती हैं, “हम यही पानी पी रहे हैं, आप भी पीकर देखिए।” विधायक पानी को सूंघकर वापस करते दिखे। इस वीडियो के वायरल होते ही मरम्मत का काम तेजी से शुरू हुआ, लेकिन देर हो चुकी थी – सैकड़ों लोग पहले ही बीमार पड़ चुके थे।
VIP इलाका, फिर भी लापरवाही क्यों? सिविल लाइन्स जयपुर का एक VIP क्षेत्र माना जाता है। यहां विधायक, अधिकारी और अच्छी-खासी आबादी रहती है। फिर भी बुनियादी सुविधाओं में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? पूर्व विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास ने आरोप लगाया कि “रात में विरोध के बावजूद सड़क तोड़ी गई, जिससे सीवर और पानी की लाइनें क्षतिग्रस्त हुईं। यह भ्रष्टाचार का नतीजा है – लाइनें कम गहरी खोदी गईं।”
विधायक गोपाल शर्मा ने खुद समस्या को भ्रष्टाचार से जोड़ा और कहा कि लोग उनके हैं, वे उनकी समस्या का समाधान करेंगे। वीडियो वायरल होने के 24 घंटे के अंदर मरम्मत कार्य शुरू हो गया, लेकिन निवासियों का कहना है कि यह “आग लगने के बाद कुआं खोदने” जैसा है।
दूषित पानी से होने वाली बीमारियां दूषित पानी पीने से मुख्य रूप से जलजनित रोग फैलते हैं:
- डायरिया और डिसेंट्री
- पेट दर्द और उल्टी
- टाइफाइड और हेपेटाइटिस
- बच्चों में कुपोषण बढ़ने का खतरा
चिकित्सकों का अनुमान है कि अगर समस्या और बढ़ी तो हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हो सकते हैं। इंदौर जैसी पुरानी घटनाओं की याद दिलाते हुए विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि शहरों में पुरानी पाइपलाइनों और निर्माण कार्यों के दौरान सतर्कता न बरतने से ऐसे संकट आम हो रहे हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और मरम्मत कार्य वायरल वीडियो के बाद नगर निगम और जल विभाग सक्रिय हुए। पानी की लाइनों की मरम्मत शुरू कर दी गई है। टैंकरों से साफ पानी की सप्लाई भी बढ़ाई जा रही है। लेकिन स्थानीय लोग पूछ रहे हैं – “क्या सिर्फ वीडियो वायरल होने पर ही काम होता है? रोजमर्रा की शिकायतों पर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता?”
डिस्पेंसरी में दवाइयां और ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में जागरूकता अभियान शुरू करने की बात कही है।
क्या सबक सीखा जाएगा? सुशीलपुरा का यह संकट सिर्फ एक इलाके की समस्या नहीं है। यह पूरे शहर के लिए चेतावनी है। जयपुर जैसे तेजी से बढ़ते शहर में: - सड़क निर्माण से पहले पानी और सीवर लाइनों की मैपिंग जरूरी
- पुरानी पाइपलाइनों का समय पर बदलना
- निर्माण कार्यों में सख्त निगरानी
- जल स्रोतों की नियमित जांच जरूरी है।
अगर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे मामले बार-बार दोहराए जाएंगे।
स्थानीय निवासी अब मांग कर रहे हैं कि न केवल मरम्मत पूरी हो, बल्कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा भी दिया जाए। साथ ही, दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त एक्शन लिया जाए।
जयपुर की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बुनियादी सुविधाएं – खासकर साफ पानी – किसी भी विकास से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। जब तक आम आदमी के घर नल से साफ पानी नहीं आएगा, विकास की बातें सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगी।
सुशीलपुरा के लोग आज भी दूषित पानी के दर्द से जूझ रहे हैं। कुछ ठीक हो रहे हैं, कुछ अभी भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह संकट तब तक पूरी तरह खत्म नहीं होगा, जब तक पूरी तरह स्वच्छ पानी की आपूर्ति बहाल नहीं हो जाती। प्रशासन को न सिर्फ तत्काल राहत देनी चाहिए, बल्कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-April 4,2026