शैडो फ्लीट पर पहला बड़ा झटका: अमेरिका की अनुमति से दुबई कंपनी अब ईरानी जहाजों को स्क्रैप करेगी, पर्यावरणीय जोखिम और प्रतिबंध भंग पर अंकुश
दुबई/वाशिंगटन। ईरान की कुख्यात "शैडो फ्लीट" (छाया बेड़ा) पर अमेरिका की सख्ती अब एक नई मुहिम में बदल रही है। दुबई स्थित विश्व की सबसे बड़ी शिप रिसाइक्लिंग कंपनी GMS को अमेरिकी सरकार (OFAC) से दुर्लभ मंजूरी मिल गई है। कंपनी अब ईरान से जुड़े चार प्रतिबंधित कंटेनर जहाजों को खरीदकर उन्हें पूरी तरह डिसमेंटल (तोड़ने) की प्रक्रिया शुरू करेगी।
यह कदम ईरान और रूस जैसे देशों द्वारा प्रतिबंधों से बचकर तेल व्यापार चलाने वाली शैडो फ्लीट को कमजोर करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
GMS का ऐलान और अमेरिकी लाइसेंस
GMS के संस्थापक और सीईओ अनिल शर्मा ने रॉयटर्स और अन्य मीडिया को बताया कि कंपनी कई महीनों से अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही थी। ट्रंप प्रशासन ने ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) के जरिए चार जहाजों — Yogi, Timon, Rantanplan और Bigli — को खरीदने और स्क्रैप करने की अनुमति दे दी है।
ये चारों कंटेनरशिप (5,800 से 6,900 TEU क्षमता) 2005-2009 के बीच बने हैं। इन्हें 2025 में अमेरिका ने ईरानी शिपिंग नेटवर्क, खासकर मोहम्मद हुसैन शामखानी के नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में प्रतिबंधित किया था। ये जहाज लंबे समय से निष्क्रिय पड़े थे।
अनिल शर्मा ने इन जहाजों को “टिकिंग टाइम बम” बताया। बिना उचित बीमा, रखरखाव और सुरक्षा मानकों वाले ये पुराने जहाज समुद्री मार्गों में बड़ा खतरा बन चुके हैं।
शैडो फ्लीट क्या है और क्यों खतरनाक?
शैडो फ्लीट उन पुराने, अक्सर फर्जी नाम और फ्लैग वाले जहाजों को कहा जाता है जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को चकमा देकर ईरान, रूस और वेनेजुएला का तेल और पेट्रोकेमिकल्स ले जाते हैं।
- ये जहाज AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) बंद करके चलते हैं।
- फर्जी कंपनियों, बार-बार नाम बदलने और बिना बीमा के संचालन करते हैं।
- पर्यावरणीय जोखिम बहुत ज्यादा — तेल रिसाव की घटना होने पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, शैडो फ्लीट में 900 से 2000 तक जहाज सक्रिय हैं, जिनमें से सैकड़ों ईरान और रूस से जुड़े हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ये जहाज व्यस्त समुद्री मार्गों (खासकर स्ट्रेट ऑफ होरमुज) में दुर्घटना का खतरा बढ़ाते हैं और वैश्विक समुद्री सुरक्षा को चुनौती देते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह डील?
यह पहली बार है जब अमेरिका ने शैडो फ्लीट के जहाजों को स्क्रैप करने के लिए किसी बड़ी कंपनी को स्पष्ट लाइसेंस दिया है। इससे:
1. शैडो फ्लीट के मालिकों को合法 तरीके से बाहर निकलने का रास्ता मिलेगा।
2. पुराने और खतरनाक जहाजों को सिस्टम से हटाने को बढ़ावा मिलेगा।
3. ईरान की प्रतिबंध-चोरी वाली अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ेगा।
4. पर्यावरणीय सुरक्षा मजबूत होगी।
GMS जैसी कंपनी के इस कदम से अन्य मालिक भी आगे आ सकते हैं, जिससे शैडो फ्लीट का आकार घट सकता है।
भू-राजनीतिक संदर्भ
ट्रंप प्रशासन ईरान पर "मैक्सिमम प्रेशर" की नीति जारी रखे हुए है। हाल के महीनों में ईरान की शैडो फ्लीट पर कई दौर के प्रतिबंध लगाए गए। ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और क्षेत्रीय तनाव के बाद ईरान की तेल निर्यात क्षमता प्रभावित हुई है।
दुबई स्थित GMS का यह कदम UAE की बढ़ती सख्ती को भी दर्शाता है। UAE ने हाल में ईरानी गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरी कदम उठाने के संकेत दिए हैं।
भारत पर क्या असर?
भारत दुनिया का प्रमुख शिप ब्रेकिंग देश है (अलांग में सबसे ज्यादा स्क्रैपिंग होती है)। GMS जैसी कंपनियों के जरिए अगर शैडो फ्लीट के जहाज भारत पहुंचते हैं तो:
- स्क्रैपिंग उद्योग को बूस्ट मिल सकता है।
- लेकिन पर्यावरण और सुरक्षा मानकों का सख्त पालन जरूरी होगा।
- साथ ही, अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन न हो, इस पर सतर्कता बरतनी होगी।
भारत ईरान से तेल आयात और चाबहार पोर्ट परियोजना दोनों को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है।
GMS का सफर और अनिल शर्मा
GMS दुबई हेडक्वार्टर वाली कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी कैश बायर ऑफ शिप्स फॉर स्क्रैप है। अनिल शर्मा के नेतृत्व में कंपनी ने शिप रिसाइक्लिंग के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छुई हैं। उन्होंने हमेशा जोर दिया है कि शैडो फ्लीट के जहाजों को नियमित प्रक्रिया के तहत स्क्रैप किया जाए, ताकि पर्यावरणीय जोखिम कम हो और लीगल ट्रेडर्स को नुकसान न पहुंचे।
आगे की संभावनाएं
विश्लेषकों का मानना है कि यह डील शैडो फ्लीट के खिलाफ एक मिसाल बन सकती है। अगर और जहाजों को इसी तरह लाइसेंस मिलता है तो:
- ईरान की तेल आय में और कमी आ सकती है।
- वैश्विक समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी।
- लेकिन ईरान नई चालें चल सकता है — और पुराने जहाज खरीदकर या फर्जी फ्लैग इस्तेमाल करके फ्लीट को बनाए रखने की कोशिश करेगा।
दुबई की GMS कंपनी द्वारा ईरान से जुड़े चार प्रतिबंधित जहाजों को डिसमेंटल करने की मंजूरी शैडो फ्लीट के खिलाफ लड़ाई में एक अहम कदम है। यह न सिर्फ प्रतिबंधों को प्रभावी बनाएगा बल्कि समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा।
ट्रंप प्रशासन की इस रणनीति से मध्य पूर्व की भू-राजनीति में नया समीकरण बनता दिख रहा है। दुनिया अब देख रही है कि शैडो फ्लीट का यह "टिकिंग टाइम बम" कितना और बे असर किया जा सकता है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 27 May 2026