नई दिल्ली। भारत अपनी वायुसेना को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन स्वदेशी LCA तैजस Mk-1A प्रोग्राम में एक बार फिर बड़ा विलंब आ गया है। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ किए गए 180 तैजस Mk-1A फाइटर जेट्स के कॉन्ट्रैक्ट की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक जून 2026 तक स्थगित कर दी गई है। यह खबर भारतीय वायुसेना के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
तैजस Mk-1A प्रोग्राम की वर्तमान स्थिति
भारतीय वायुसेना की फाइटर स्क्वाड्रन की कमी को पूरा करने के लिए HAL के साथ दो बड़े समझौते हुए थे। पहले 83 तैजस Mk-1A की डील हुई और बाद में अतिरिक्त 97 जेट्स की मंजूरी मिली, जिससे कुल संख्या 180 हो गई है। इन विमानों में उन्नत AESA रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और आधुनिक हथियार क्षमता शामिल है।
मूल योजना के अनुसार 2024-25 में डिलीवरी शुरू होनी थी, लेकिन रडार परफॉर्मेंस, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और इंजन सप्लाई में आने वाली दिक्कतों के कारण शेड्यूल बार-बार टल रहा है। मई 2026 में होनी वाली HAL और वायुसेना के बीच समीक्षा बैठक अब जून 2026 तक टल गई है। इस बैठक में रडार और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम्स की परफॉर्मेंस की जांच होनी थी।
इंजन समस्या मुख्य चुनौती
तैजस Mk-1A में अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) के F404 इंजन लगाए जा रहे हैं। 2021 में 99 इंजनों की सप्लाई के लिए डील हुई थी, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन की समस्याओं के कारण डिलीवरी धीमी रही है। वायुसेना प्रमुख पहले ही इस देरी पर नाराजगी जता चुके हैं।
HAL के अनुसार, कुछ इंजन मिलने शुरू हो गए हैं, लेकिन पूरी गति अभी नहीं आई है। फिलहाल पांच तैजस Mk-1A विमान तैयार हैं, जबकि कई अन्य इंजन का इंतजार कर रहे हैं।
वायुसेना में स्क्वाड्रन की कमी
भारतीय वायुसेना को दो मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए कम से कम 42 फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत है, लेकिन फिलहाल केवल 29 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं। पुराने MiG-21, Jaguar आदि विमानों की सेवानिवृत्ति तेजी से हो रही है, जबकि नए विमानों की डिलीवरी धीमी है।
अभी तक करीब 40 तैजस Mk-1 विमान वायुसेना में शामिल हो चुके हैं और दो स्क्वाड्रन operational हैं। Mk-1A के आने से पांच अतिरिक्त स्क्वाड्रन तैयार होने थे, लेकिन विलंब से यह प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
तैजस की खासियतें
तैजस Mk-1A को 4.5 जनरेशन का लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट माना जाता है। इसमें 67 नए सिस्टम जोड़े गए हैं। मुख्य विशेषताएं:
- उन्नत AESA रडार
- आधुनिक एवियोनिक्स
- मल्टी-रोल क्षमता
- कम रखरखाव की जरूरत
- बेहतर survivability
यह पूरी तरह स्वदेशी परियोजना है, जिसे Aeronautical Development Agency (ADA) और HAL ने मिलकर विकसित किया है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में चुनौती
यह विलंब ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के लिए एक चुनौती है। सरकार DRDO, HAL और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दे रही है। GE इंजन को भारत में ही उत्पादन करने की कोशिशें भी चल रही हैं, जो लंबे समय में देश को मजबूत बनाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकाल में वायुसेना को राफाल, Su-30MKI अपग्रेड और अन्य उपलब्ध प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर रहना पड़ेगा।
आगे क्या?
HAL का लक्ष्य है कि 2026-27 में उत्पादन गति बढ़े। जून 2026 की बैठक से उम्मीद है कि स्पष्ट समय-सीमा मिलेगी। वायुसेना ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा से जुड़ी जरूरतों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
तैजस Mk-1A भारत की डिफेंस इंडस्ट्री की क्षमता का प्रतीक है। इसमें देरी निराशाजनक है, लेकिन यह परियोजना पूरा होने पर वायुसेना को स्वदेशी ताकत देगी। फिलहाल धैर्य, निरंतर निगरानी और वैकल्पिक तैयारियां जरूरी हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-17 May 2026