Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Sunday, 17 May 2026

मिडिल ईस्ट में नया खतरा! UAE के बराकाह न्यूक्लियर प्लांट पर ड्रोन हमला, आग की लपटें – इजरायल पर सबसे ज्यादा शक

मिडिल ईस्ट में नया खतरा! UAE के बराकाह न्यूक्लियर प्लांट पर ड्रोन हमला, आग की लपटें – इजरायल पर सबसे ज्यादा शक -Friday World-17 May 2027

अबू धाबी। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच मिडिल ईस्ट में परमाणु सुरक्षा का नया संकट सामने आ गया है। रविवार 17 मई 2026 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अल धाफरा इलाके में स्थित बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट के बाहरी हिस्से पर संदिग्ध ड्रोन हमला हुआ। हमले में प्लांट के बाहरी इलेक्ट्रिकल जनरेटर को नुकसान पहुंचा और भयंकर आग लग गई। 
UAE अधिकारियों के अनुसार, कोई जान-हानि नहीं हुई है और प्लांट के मुख्य सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित हैं। फिर भी यह घटना पूरे क्षेत्र में फफड़ाट पैदा कर रही है।

घटना का विस्तार

अबू धाबी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीन ड्रोन हमले की कोशिश की गई। UAE एयर डिफेंस ने दो ड्रोन को नष्ट कर दिया, लेकिन एक ड्रोन प्लांट के बाहरी पेरिमीटर पर लगा इलेक्ट्रिकल जनरेटर पर गिरा, जिससे आग लग गई। 

UAE न्यूक्लियर रेगुलेटरी अथॉरिटी (FANR) ने तुरंत स्पष्ट किया कि:

- रेडिएशन का कोई खतरा नहीं है

- प्लांट के सभी चार रिएक्टर सामान्य रूप से चल रहे हैं

- सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय है

इजरायल पर सबसे ज्यादा शक क्यों?

इस हमले में सबसे ज्यादा शंका **इजरायल** पर जताई जा रही है। क्षेत्रीय विश्लेषकों और कुछ अरब मीडिया में यह चर्चा जोरों पर है कि इजरायल की पुरानी आदत रही है कि वह अपने दोस्त देशों की दुर्बलताओं पर हमला करवाकर या कराकर, फिर दुश्मन देशों (जैसे ईरान) पर आरोप लगाकर दोनों पक्षों में तनाव बढ़ाए, खुद सुरक्षित रहे और हथियारों का व्यापार बढ़ाए। 

कई जानकारों का मानना है कि इजरायल इस तरह की गुप्त कार्रवाइयों के जरिए क्षेत्र में अस्थिरता फैलाकर अपना सामरिक और आर्थिक फायदा उठाता रहा है। UAE जैसे इजरायल के साथ अब्राहम समझौते वाले देश पर हमला करवाकर इजरायल ईरान को बदनाम करने और गल्फ देशों में और ज्यादा हथियार बेचने की रणनीति अपना सकता है।

हालांकि UAE सरकार ने अभी किसी भी देश या गुट को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया है। जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।

 बराकाह प्लांट: अरब दुनिया का गौरव

दक्षिण कोरिया की मदद से बना बराकाह प्लांट अरब दुनिया का पहला और एकमात्र व्यावसायिक परमाणु ऊर्जा प्लांट है। इसमें चार यूनिट हैं जो UAE की कुल बिजली उत्पादन का करीब 25% हिस्सा पूरा करते हैं। 20 अरब डॉलर से ज्यादा की लागत वाले इस प्लांट को UAE की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।

 क्षेत्रीय तनाव और परमाणु सुरक्षा का खतरा

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और ceasefire बार-बार टूटने की कगार पर है। परमाणु प्लांट पर ड्रोन हमला बेहद खतरनाक है। अगर हमला प्लांट के अंदरूनी हिस्से तक पहुंच जाता तो रेडिएशन लीक का भयानक खतरा पैदा हो सकता था, जिसके दूरगामी परिणाम पूरे गल्फ क्षेत्र पर पड़ सकते थे।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने सभी पक्षों से परमाणु सुविधाओं के आसपास सैन्य कार्रवाइयों से बचने की अपील की है।

आगे की चुनौतियां

- UAE अब प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहा है।

- गल्फ देश अब अपनी महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं (परमाणु, तेल, बंदरगाह) की सुरक्षा पर ज्यादा निवेश करेंगे।

- क्षेत्र में ड्रोन और असममित युद्ध की क्षमता बढ़ने से नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो रही हैं।


बराकाह न्यूक्लियर प्लांट पर हुआ ड्रोन हमला मिडिल ईस्ट की नाजुक स्थिति को और बिगाड़ सकता है। इजरायल पर लग रहे आरोप चाहे सही हों या गलत, लेकिन यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि परमाणु सुविधाएं अब युद्ध का आसान निशाना बन सकती हैं। 

सभी संबंधित देशों को संयम बरतना चाहिए और डिप्लोमेसी के जरिए तनाव कम करने की कोशिश करनी चाहिए। परमाणु ऊर्जा शांति और विकास के लिए है, इसे संघर्ष का हथियार नहीं बनने देना चाहिए।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World-17 May 2027