दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज एक बार फिर खून से रंगा हुआ है। मात्र तीन दिनों में तीन भारतीय क्रू वाले कमर्शियल जहाजों पर हमले हुए, जिनमें तीन निर्दोष भारतीय खलासियों की जान चली गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर ड्रोन हमले का आरोप लगाया, लेकिन ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया और अमेरिका पर ही सीधा इल्जाम लगाते हुए कहा कि US ने ही इन जहाजों पर हमले किए हैं। यह विवाद न केवल भारत-अमेरिका-ईरान संबंधों को नई दिशा दे रहा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
घटना का क्रम: क्या हुआ हॉर्मुज और ओमान की खाड़ी में?
जून 2026 की शुरुआत में तनाव चरम पर पहुंचा। अमेरिका ने ईरान पर सख्त नाकाबंदी लगाई हुई है, जिसके तहत ईरानी तेल ले जाने वाले या उससे जुड़े माने जाने वाले जहाजों को रोका जा रहा है। इसी क्रम में:
- 8-9 जून: पहले हमले में Marivex टैंकर प्रभावित हुआ। भारतीय क्रू मेंबर्स ने SOS कॉल किया, जहाज में आग लग गई।
- 10 जून: Settebello (पालाउ फ्लैग) पर US फोर्सेस ने प्रिसीजन स्ट्राइक की। इंजन रूम में मिसाइल दागी गई, जिससे तीन भारतीय खलासी मारे गए। 21 अन्य को ओमान की नेवी ने रेस्क्यू किया।
- 10-11 जून: तीसरा जहाज Jalveer प्रभावित हुआ।
ये जहाज मुख्य रूप से भारतीय क्रू वाले थे और कई मामलों में ईरानी तेल या संबंधित कार्गो ले जा रहे थे। भारत सरकार ने इन हमलों की निंदा की, US डिप्लोमैट को समन किया और “सिविलियन शिपिंग पर हमले बंद हों” का सख्त संदेश दिया।
ट्रम्प ने 12 जून को Truth Social पर पोस्ट किया: “ईरान ने हॉर्मुज से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन अटैक करने की कोशिश की, लेकिन उसे पूरी तरह नाकाम कर दिया गया। यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। उन्हें अपनी हरकतें सुधारनी होंगी, और जल्दी!”
ईरान का पलटवार: “अमेरिका ने हमला किया, ट्रम्प झूठ बोल रहे हैं”
भारत स्थित ईरानी दूतावास ने 13 जून को X (पूर्व Twitter) पर स्पष्ट लिखा कि ट्रम्प का दावा पूरी तरह बेबुनियाद है। “अमेरिकी सेना ने एक हफ्ते के अंदर तीन भारतीय जहाजों पर हमला किया और तीन निर्दोष भारतीय खलासियों की हत्या कर दी। अमेरिका गलत इल्जाम लगाकर अपनी क्रूरता से ध्यान हटाना चाहता है।”
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगई ने भी अमेरिका पर “समुद्री लुटेरों” जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अमेरिका को जवाबदेह ठहराने की अपील की।
ईरान का तर्क है कि ये जहाज कमर्शियल थे और US की नाकाबंदी गैरकानूनी है। वे कहते हैं कि अमेरिका हथियारों के बल पर धमकियां दे रहा है और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में दादागिरी कर रहा है।
भारत की दुविधा: तेल सुरक्षा vs नागरिकों की जान
भारत ईरान से सस्ता तेल आयात करता रहा है, खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से। लेकिन US-ईरान तनाव में भारतीय नाविक फंस गए हैं।
- विदेश मंत्रालय ने दो बार US को समन किया।
- EAM एस. जयशंकर ने US counterpart से बात की।
- भारत ने “सभी पक्षों” से संयम बरतने की अपील की।
हजारों भारतीय नाविक हॉर्मुज क्षेत्र में काम करते हैं। इन हमलों से न सिर्फ जान-माल का खतरा बढ़ा है, बल्कि वैश्विक शिपिंग कंपनियां भी भारतीय क्रू को लेकर हिचकिचा रही हैं।
हॉर्मुज स्ट्रेट: दुनिया की आर्टरी, क्यों इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज विश्व के 20-30% तेल का परिवहन करता है। ईरान की तरफ से बंदी की धमकी या वास्तविक ब्लॉकेड से तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। 2026 में US-ईरान संघर्ष ने इसे और जटिल बना दिया है।
ट्रम्प प्रशासन “Project Freedom” जैसे अभियानों के जरिए जलमार्ग खुला रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इससे सिविलियन शिपिंग प्रभावित हो रही है। ईरान इसे आर्थिक युद्ध मानता है।
बड़े सवाल और भू-राजनीतिक निहितार्थ
1. कौन सच्चा, कौन झूठा? दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। स्वतंत्र जांच की मांग हो रही है। maritime tracking data और eyewitness accounts US strikes की पुष्टि करते दिख रहे हैं, जबकि ट्रम्प ईरान को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
2. भारत की विदेश नीति: भारत US का महत्वपूर्ण साझेदार है (QUAD, Indo-Pacific), लेकिन ईरान से भी चाबहार पोर्ट जैसे रणनीतिक संबंध हैं। संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है।
3. वैश्विक प्रभाव: तेल कीमतें बढ़ीं, शिपिंग इंश्योरेंस महंगा हुआ, एशियाई अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित। भारत जैसे आयातक देशों पर बोझ बढ़ा।
4. मानवीय पहलू: तीन परिवारों में शोक। मृत नाविकों के परिजनों को मुआवजा और सुरक्षा की गारंटी मिलनी चाहिए।
इतिहास गवाह है: हॉर्मुज हमेशा तनाव का केंद्र
पिछले दशकों में भी टैंकर वॉर, माइन्स, जब्ती की घटनाएं हुई हैं। 2019 में भी जहाजों पर हमले हुए थे। 2026 का संकट पुराने घावों को ताजा कर रहा है।
ईरान का दावा है कि US अपनी पुरानी नीति—धमकी और आर्थिक दबाव—चला रहा है। अमेरिका कहता है कि ईरान परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता फैला रहा है।
आगे का रास्ता: क्या समाधान संभव?
- अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता या UN के तहत जांच।
- भारत को अपने नाविकों की सुरक्षा के लिए नौसेना एस्कॉर्ट या डिप्लोमेसी तेज करनी होगी।
- US-ईरान के बीच कोई डील अगर हुई तो हॉर्मुज खुल सकता है, लेकिन फिलहाल तनाव कम होने के आसार कम दिख रहे हैं।
यह घटना सिर्फ तीन मौतों की नहीं, बल्कि बदलते विश्व व्यवस्था की कहानी है। जहां महाशक्तियां अपने हितों के लिए छोटे देशों के नागरिकों को भी बलि का बकरा बना सकती हैं। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर स्वदेशी विकल्प (रिन्यूएबल, घरेलू उत्पादन) और मजबूत डिप्लोमेसी पर जोर देना होगा।
: ट्रम्प का आरोप और ईरान का पलटवार दोनों पक्षों की रणनीति का हिस्सा लगता है। सच्चाई की परतें खुलनी बाकी हैं, लेकिन भारतीय नाविकों की जान की कीमत किसी भी भू-राजनीति से ऊपर है। भारत को मजबूत कूटनीति से अपने हितों की रक्षा करनी होगी, ताकि हॉर्मुज की आग भारतीयों को न जलाए।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 13 Jun 2026