- Friday World 12 Jun 2026
कोलकाता के अलीपुर इलाके में एक सरकारी इमारत में लगी भीषण आग ने न केवल हजारों इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को भस्म कर दिया, बल्कि लोकतंत्र की credibility पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां आग की असामान्य फैलाव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, वहीं विपक्ष और कुछ मंत्री खुद साजिश की आशंका जता रहे हैं। क्या यह महज एक दुर्घटना थी या चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोई बड़ी चाल? इस घटना ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है।
घटना का क्रम: जब आग ने मंजिलें छलांग लगाईं
बुधवार सुबह दक्षिण कोलकाता के अलीपुर क्षेत्र में दक्षिण 24 परगना जिला परिषद की नौ-दस मंजिला प्रशासनिक इमारत में आग लगी। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक आग दूसरी और तीसरी मंजिल पर भड़की, लेकिन जल्द ही यह सातवीं, आठवीं, नवीं और दसवीं मंजिल तक पहुंच गई—जहां EVM मशीनें संग्रहित थीं। चौथी, पांचवीं और छठी मंजिल अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहीं। यह पैटर्न सामान्य आग की भौतिकी से मेल नहीं खाता।
पश्चिम बंगाल के अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के राज्य मंत्री **कौशिक चौधरी** ने खुद घटनास्थल का दौरा किया और हैरान कर देने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा, “यह सामान्य आग नहीं लगती। हम जांच कर रहे हैं कि इसमें कोई sabotage (तोड़-फोड़) तो नहीं है। आग कैसे नीचे की मंजिलों से ऊपर पहुंची, जबकि बीच की मंजिलें बची रहीं?”
मंत्री के इस बयान ने आग को राजनीतिक रंग दे दिया। FIR दर्ज हो चुकी है, फॉरेंसिक टीम सैंपल ले रही है, और पूरी इमारत को सील कर दिया गया है।
4000 EVM का नुकसान: लोकतंत्र की कीमत
इस आग में करीब **4000 EVM** पूरी तरह नष्ट हो गए। ये मशीनें हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में 10 विधानसभा क्षेत्रों में इस्तेमाल हुई थीं। इनमें कंट्रोल यूनिट, बैलट यूनिट और VVPAT मशीनें शामिल हैं। चुनाव आयोग के लिए EVM सुरक्षा हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में मशीनों का नाश न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि चुनावी रिकॉर्ड्स और संभावित recount की जरूरत पर भी असर डाल सकता है।
विपक्षी दलों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। भाजपा समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे “बड़ी साजिश” करार दिया। कुछ ने पूछा—क्या हारने वाले पक्ष ने सबूत मिटाने की कोशिश की? दूसरी तरफ सत्ताधारी पक्ष ने इसे दुर्घटना बताया, लेकिन मंत्री का बयान उनके अपने तंत्र में उठे सवालों को उजागर करता है।
आग की वजह: दुर्घटना, लापरवाही या साजिश?
आग के कारणों पर अभी फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। संभावित वजहें हो सकती हैं:
- बिजली शॉर्ट सर्किट: पुरानी इमारत में वायरिंग की हालत खराब हो सकती है।
- स्टोरेज में लापरवाही: EVM रखने की जगह पर inflammable सामग्री का होना।
- बाहरी हस्तक्षेप: कोई जानबूझकर आग लगाना।
मंत्री चौधरी ने जोर देकर कहा कि आग की “skip floor” पैटर्न असामान्य है। आग भौतिक रूप से नीचे से ऊपर चढ़ती है, लेकिन बीच की मंजिलें बची रहना वाकई संदेहास्पद है। फॉरेंसिक लैब में आग के पॉइंट ऑफ ओरिजिन, accelerant (आग फैलाने वाले पदार्थ) के निशान और CCTV फुटेज की जांच हो रही है।
ऐसी घटनाओं का इतिहास: क्या EVM हमेशा विवादों में रहती हैं?
EVM मशीनें भारत में लोकतंत्र का आधार बनी हैं, लेकिन हर चुनाव के बाद उन पर सवाल उठते रहते हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों से लेकर विभिन्न राज्य चुनावों तक, विपक्ष ने EVM हैकिंग, tampering के आरोप लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार VVPAT स्लिप वेरिफिकेशन पर दिशा-निर्देश दिए हैं।
पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावों में भाजपा की बड़ी जीत की चर्चा के बीच यह आग और भी संदिग्ध लग रही है। क्या यह हार का बदला था? या फिर नई सरकार के लिए पुराने रिकॉर्ड मिटाने की कोशिश? राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि EVM जलने से recount की संभावना कम हो जाती है, जिससे विवाद और बढ़ सकता है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
सरकारी इमारत में इतनी महत्वपूर्ण मशीनें रखना और उनकी सुरक्षा का जिम्मा किसका था? CCTV काम कर रहा था या नहीं? फायर सेफ्टी नॉर्म्स का पालन हुआ था? क्या स्टोरेज रूम fire-proof था? ये सवाल न केवल पश्चिम बंगाल सरकार बल्कि पूरे देश के चुनाव आयोग और गृह मंत्रालय के समक्ष हैं।
चुनाव आयोग को अब नए सिरे से EVM स्टोरेज गाइडलाइंस जारी करने की जरूरत है। देशभर में हजारों EVM भंडारित हैं। अगर एक जगह इतनी बड़ी घटना हो सकती है, तो दूसरी जगहों पर क्या सुरक्षा है?
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप
घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।
- भाजपा नेताओं ने इसे “TMC की साजिश” बताया।
- कुछ कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र पर हमला हुआ है।
- TMC की ओर से कुछ नेताओं ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना” करार दिया, लेकिन मंत्री का बयान उनके पक्ष को कमजोर कर रहा है।
सोशल मीडिया पर #KolkataEVMFire और #EVMSabotage जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोग अपनी-अपनी थ्योरी दे रहे हैं—कुछ कहते हैं यह climate change से जुड़ी घटना है (जो बेतुका है), तो कुछ इसे deep state की चाल मानते हैं।
आगे क्या? जांच और सबक
पुलिस और फॉरेंसिक टीम की रिपोर्ट आने में कुछ दिन लग सकते हैं। अगर sabotage साबित होता है तो यह बड़ा राजनीतिक भूचाल ला सकता है। अगर दुर्घटना है तो लापरवाही की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
इस घटना से कई सबक निकलते हैं:
1. EVM स्टोरेज को और मजबूत fire-proof बंकरों में किया जाए।
2. डिजिटल बैकअप और VVPAT पेपर ट्रेल को प्राथमिकता दी जाए।
3. सरकारी इमारतों की फायर ऑडिट नियमित हो।
4. राजनीतिक दलों को चुनावी हार-जीत को स्वीकार करने की परिपक्वता दिखानी चाहिए।
निष्कर्ष: लोकतंत्र की रक्षा सबकी जिम्मेदारी
4000 EVM जलकर राख होना सिर्फ मशीनों का नुकसान नहीं, बल्कि जनता के विश्वास का सवाल है। भारत का चुनावी ढांचा दुनिया का सबसे बड़ा है। इसमें पारदर्शिता और सुरक्षा बनाए रखना हर नागरिक, राजनीतिक दल और सरकार की जिम्मेदारी है।
जब तक फॉरेंसिक रिपोर्ट नहीं आती, अटकलें जारी रहेंगी। लेकिन एक बात तय है—ऐसी घटनाएं लोकतंत्र को कमजोर करती हैं। हमें सतर्क रहना होगा। आग बुझ गई, लेकिन उठे सवाल अभी लंबे समय तक जलते रहेंगे।
क्या आपकी राय क्या है? क्या यह साजिश थी या महज लापरवाही? कमेंट में जरूर बताएं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 12 Jun 2026