- Friday World 12 Jun 2026
अमदावाद। 12 जून 2026। ठीक एक साल पहले आज के दिन अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही एक विमान दुर्घटना ने न सिर्फ दर्जनों परिवारों की दुनिया उजाड़ दी, बल्कि कई मांओं की कोख हमेशा के लिए सूनी कर दी। उनमें से एक हैं अमरेली की गीताबहन पडसाला। उनकी इकलौती लाडली, 25 वर्षीय रिद्धि पडसाला उस विमान में सवार थी, जो लंदन जा रही थी।
रिद्धि की मां आज भी उस आखिरी विदाई को याद करके टूट जाती हैं। एयरपोर्ट पर बेटी ने मुस्कुराते हुए कहा था- “तुम सब आधी रात तक जागे हो, अब घर जाकर सो जाओ। मैं प्लेन में सो जाऊंगी और लंदन पहुंचकर फोन करूंगी।” लेकिन वो फोन कभी नहीं आया। उसके बजाय मौत का संदेश आया।
आखिरी मुलाकात और अनंत विदाई
मई 2025 में रिद्धि भारत आई थी। लंदन में स्थायी रूप से बस चुकी अपनी सास-ससुर और पति से मिलने के बाद वह परिवार के साथ कुछ दिन बिताने अमरेली आई थी। 12 जून की सुबह परिवार उसे छोड़ने एयरपोर्ट पहुंचा। सामान चेक-इन कराने के बाद रिद्धि ने मां को गले लगाया और कहा, “चिंता मत करना मम्मी, सब ठीक रहेगा।”
परिवार अभी सड़क पर ही था कि खबर आ गई- प्लेन क्रैश हो गया है।
गीताबहन की आवाज अभी भी कांपती है जब वे बताती हैं, “हम कार में थे। अचानक फोन पर खबर आई। लगा जैसे आसमान फट पड़ा हो। हम भागते हुए वापस एयरपोर्ट पहुंचे, लेकिन वहां तो सिर्फ धुआं और चीख-पुकार थी।”
पांच दिन तक परिवार ने मौत की घड़ी में सांसें रोके रखीं। डीएनए टेस्ट के बाद ही रिद्धि की शिनाख्त हो सकी। अमरेली लाकर अंतिम संस्कार किया गया। पूरा गांव और आसपास के इलाके शोक में डूब गए। रिद्धि परिवार की इकलौती बेटी थी- पढ़ी-लिखी, होनहार और सपनों से भरी।
जामाई का नया जीवन, मां का टूटा सपना
सबसे दर्दनाक मोड़ कहानी का वो हिस्सा है जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए।
गीताबहन आंसू पोछते हुए बताती हैं, “दुनिया कहती है समय के साथ सब ठीक हो जाता है। लेकिन मां के लिए समय रुक गया है। हमारी बेटी चली गई, लेकिन उसका पति... उसने तो सिर्फ छह महीने में दूसरी शादी कर ली।”
रिद्धि के पति, जो मूल रूप से राजकोट के रहने वाले हैं और लंदन में रहते हैं, को पत्नी की मौत पर विमान कंपनी और सरकार की तरफ से कुल **1.25 करोड़ रुपये** का मुआवजा मिला। गीताबहन आरोप लगाती हैं कि यह राशि मिलते ही जामाई ने नया जीवन शुरू कर दिया।
“प्रो-वेडिंग फोटोशूट भी करा लिया। हमारा सब कुछ लुट गया। बेटी गई, सपने गए, और जो थोड़ा बहुत सहारा था, वो भी चला गया। हमने कुछ नहीं मांगा, न पैसा, न सहायता। बस सच जानना चाहते हैं।”
ब्लैक बॉक्स की मांग, क्यों छिपा रहे हैं सच?
गीताबहन पडसाला अब सिर्फ एक मां नहीं, बल्कि कई पीड़ित परिवारों की आवाज बन गई हैं। उन्होंने सरकार से सख्त मांग की है- प्लेन का ब्लैक बॉक्स सार्वजनिक किया जाए।
“हमें आर्थिक मदद नहीं चाहिए। हमें सिर्फ सच चाहिए। यह दुर्घटना क्यों हुई? पायलट की गलती? तकनीकी खराबी? या कोई बड़ी लापरवाही? अगर हम जान लें तो शायद भविष्य में किसी दूसरी मां की गोद खाली न हो।”
विमान दुर्घटना की जांच अभी भी चल रही है। लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि पारदर्शिता की कमी उन्हें और अधिक पीड़ा दे रही है। एक साल बीत गया, लेकिन ब्लैक बॉक्स डेटा या अंतिम रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
रिद्धि कैसी थी?
परिवार वाले रिद्धि को “घर की रोशनी” कहते थे। स्कूल-कॉलेज में हमेशा टॉपर रही। शादी के बाद लंदन में नौकरी भी करने लगी थी। सपना था कि कुछ साल बाद मां-बाप को भी लंदन बुलाकर रखेंगी।
“वह कहती थी- मम्मी, तुम वहां आकर आराम से रहना। मैं सब संभाल लूंगी।” गीताबहन मुस्कुराते हुए याद करती हैं, फिर उनकी आंखें भर आती हैं।
ऐसे होते हैं मां के आंसू
एक साल बाद भी गीताबहन की आंखों में आंसू नहीं सूखे। घर में रिद्धि की तस्वीरें हर तरफ हैं। उसकी अलमारी अभी भी वैसी की वैसी है। कपड़े, किताबें, छोटी-छोटी चीजें- सब कुछ मौजूद है, बस वह खुद नहीं है।
“रात को नींद नहीं आती। सपने में आती है और कहती है- मम्मी मत रोना। लेकिन मैं कैसे न रोऊं? मेरा तो पूरा जहां उजड़ गया।”
पड़ोस की महिलाएं बताती हैं कि गीताबहन पहले बहुत हंसमुख थीं। अब चुप रहती हैं। कभी-कभी अकेले में रिद्धि की पुरानी वीडियो देखती हैं और रोती हैं।
aviation safety पर सवाल
यह दुर्घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे aviation क्षेत्र के लिए बड़े सवाल खड़े करती है। भारत में बढ़ते एयर ट्रैफिक के बीच सुरक्षा मानकों पर कितना ध्यान दिया जा रहा है? पायलट ट्रेनिंग, विमान रखरखाव, एयर ट्रैफिक कंट्रोल- हर कड़ी पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि मुआवजे के नाम पर उन्हें चुप करा दिया जाता है, लेकिन असली न्याय तो सच का पता लगना और दोषियों पर कार्रवाई होना है।
अंतिम अपील
गीताबहन पडसाला की अपील साफ है:
“सरकार से गुजारिश है- ब्लैक बॉक्स खोलिए। रिपोर्ट जारी कीजिए। दोषी चाहे कोई भी हो, सजा दीजिए। ताकि कोई दूसरी रिद्धि इस तरह अपनी जिंदगी न गंवाए।”
एक मां का यह दर्द, एक परिवार का यह टूटना, सिर्फ शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यह समाज के लिए सबक है कि विकास के साथ सुरक्षा को भी उतना ही महत्व देना चाहिए।
रिद्धि चली गई, लेकिन उसकी यादें और उसकी मां का आक्रोश आज भी जिंदा है।
एक साल बीत गया... लेकिन दर्द आज भी ताजा है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 12 Jun 2026