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Wednesday, 10 June 2026

सपनों की चिता पर जल रहा युवा भारत – महंगाई, बेरोजगारी और परीक्षा घोटालों की सच्चाई

सपनों की चिता पर जल रहा युवा भारत – महंगाई, बेरोजगारी और परीक्षा घोटालों की सच्चाई
- Friday World 10 Jun 2026
भारत का युवा आज सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है। महंगाई की आग में जल रहा है, बेरोजगारी की मार झेल रहा है, रुपए की गिरावट उसके खर्चों को और भारी बना रही है। ऊपर से शिक्षा व्यवस्था में घोटालों की बाढ़ – NEET जैसे बड़े एग्जाम में पेपर लीक, अनियमितताएं और रद्दीकरण युवाओं का मॉरल तोड़ रही हैं। उत्तर प्रदेश में B.Ed परीक्षा देने पहुंचे हजारों छात्र-छात्राएं और उनके परिजन रेलवे स्टेशनों पर फर्श पर सोकर 500 से 1000 रुपये होटल खर्च बचा रहे हैं। यह दृश्य न सिर्फ व्यक्तिगत संघर्ष की तस्वीर है, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता को उजागर करता है। "मोदी है तो मुमकिन है" का नारा आज युवाओं के लिए तीखा व्यंग्य बन गया है।

 युवा भारत का दर्द: आंकड़े जो चुप नहीं रहते

भारत की आबादी में युवा (15-29 वर्ष) सबसे बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन अवसरों की कमी उन्हें हताशा की ओर धकेल रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, युवा बेरोजगारी दर 15% के आसपास पहुंच चुकी है, कुछ रिपोर्ट्स में तो यह 25% तक बताई जा रही है। ग्रेजुएट्स में 40% बेरोजगार हैं और सिर्फ 42% ही पूरी तरह employable माने जाते हैं। महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ रखी है – खाने-पीने, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन सब महंगे हो गए हैं। रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार गिरावट पर है, 2026 में यह एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल रहा। इससे आयात महंगे हो रहे हैं, जिसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल, खाद्य पदार्थों और दैनिक जरूरतों पर पड़ रहा है।

ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं, लाखों परिवारों की कहानियां हैं। एक ग्रामीण युवक जो शहर में नौकरी की तलाश में भटक रहा है, या एक मध्यम वर्गीय परिवार जो बेटी की कोचिंग फीस जुटाने के लिए कर्ज ले रहा है – यह हकीकत हर घर में गूंज रही है।

 NEET घोटाला: सपनों पर प्रहार

मई 2026 में NEET-UG परीक्षा का मामला पूरे देश को झकझोर गया। 22.8 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी, लेकिन पेपर लीक और 'गेस पेपर' की अफवाहों के बाद NTA ने परीक्षा रद्द कर दी। CBI जांच चल रही है, गिरफ्तारियां हो रही हैं, लेकिन छात्रों का नुकसान कौन भरपाई करेगा? कई छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली। कोचिंग माफिया, पैसे का खेल और सिस्टम की लापरवाही ने मेडिकल के सपने देखने वाले युवाओं को तोड़ दिया।

NEET सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की उम्मीद है। ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि के छात्र पहले ही कोचिंग की भारी फीस, यात्रा और रहन-सहन का खर्च उठाते हैं। जब इस स्तर पर धांधली होती है, तो विश्वास टूट जाता है। सरकार बार-बार "सुधार" की बात करती है, लेकिन बार-बार घोटाले दोहराए जाते हैं। CUET, NET और अन्य परीक्षाओं में भी इसी तरह की समस्याएं देखी गई हैं। क्या यह संयोग है या व्यवस्था की जड़ों में सड़न?

 UP B.Ed परीक्षा: स्टेशन पर सोने की मजबूरी

उत्तर प्रदेश B.Ed प्रवेश परीक्षा का दृश्य और भी दिल दहला देने वाला है। हजारों छात्र और उनके माता-पिता, भाई-बहन परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए ट्रेन पकड़ते हैं। होटल का खर्च बचाने के लिए रेलवे स्टेशन के फर्श पर चादर बिछाकर रात गुजारते हैं। प्रत्येक व्यक्ति 500 से 1000 रुपये बचाता है – लेकिन इस बचत की कीमत क्या है? आराम की नींद, सुरक्षा, स्वच्छता और मानसिक शांति का त्याग।

ये छात्र शिक्षक बनने का सपना देखते हैं। शिक्षा क्षेत्र में नौकरी की तलाश में वे इतना कष्ट सह रहे हैं। वायरल वीडियो में दिख रहे दृश्य देखकर कोई भी संवेदनशील व्यक्ति सोचने पर मजबूर हो जाता है – क्या हमारा युवा वर्ग इतना असहाय हो गया है? जहां अमीर छात्र हॉटल में आराम से रहकर तैयारी करते हैं, वहीं गरीब छात्र स्टेशन की बेंच या फर्श पर लेटे हैं। यह शिक्षा की असमानता का जीवंत प्रमाण है।

"मोदी है तो मुमकिन है" – यह नारा 2019 चुनावों में दिया गया था। विकास, सुशासन और हर संभव काम को संभव बनाने का दावा। लेकिन आज जब युवा स्टेशन पर सो रहे हैं, NEET घोटाले से जूझ रहे हैं, नौकरी नहीं मिल रही, महंगाई से परेशान हैं, तो यह नारा व्यंग्य बन गया है। क्या स्टेशन पर सोना भी "मुमकिन" इसी नारे का हिस्सा है?

गहरी जड़ें: शिक्षा, अर्थव्यवस्था और नीतियों का विश्लेषण

भारतीय शिक्षा व्यवस्था में केंद्रीकरण बढ़ा है। NTA जैसे संस्थानों पर भारी जिम्मेदारी, लेकिन जवाबदेही कम। पेपर लीक रोकने के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं प्रस्तावित हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, बिजली और डिजिटल पहुंच की कमी इसे और चुनौतीपूर्ण बनाती है।

अर्थव्यवस्था की बात करें तो युवा बेरोजगारी का मुख्य कारण स्किल गैप, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की धीमी गति और नौकरियों का निर्माण न होना है। रुपए की गिरावट निर्यात को तो बढ़ावा दे सकती है, लेकिन आयात पर निर्भर भारत में यह महंगाई बढ़ाती है। तेल की कीमतें बढ़ीं, विदेशी पूंजी का बहाव हुआ – इन सबका असर सबसे ज्यादा युवा वर्ग पर पड़ रहा है।

परिवार स्तर पर प्रभाव: एक छात्र की परीक्षा तैयारी पूरे परिवार को प्रभावित करती है। माता-पिता छुट्टी लेकर साथ जाते हैं, खर्च जुटाते हैं। जब परिणाम घोटालों से प्रभावित होते हैं, तो पूरे परिवार की उम्मीदें धराशायी हो जाती हैं। महिलाओं की स्थिति और बदतर – ग्रामीण युवती बेरोजगारी और सुरक्षा की दोहरी मार झेल रही हैं।

 समाधान की राह: क्या करना चाहिए?

1. परीक्षा सुधार: NTA का पुनर्गठन, पारदर्शी प्रक्रिया, राज्य स्तर पर विकेंद्रीकरण और सख्त सजा का प्रावधान।

2. रोजगार सृजन: स्किल डेवलपमेंट को प्रभावी बनाना, MSME को बढ़ावा, मैन्युफैक्चरिंग में निवेश।

3. महंगाई नियंत्रण: कृषि उत्पादकता बढ़ाना, सप्लाई चेन मजबूत करना, आयात पर निर्भरता कम करना।

4. छात्र कल्याण: परीक्षा केंद्रों के पास सस्ते हॉस्टल/गेस्ट हाउस, यात्रा सब्सिडी, छात्रवृत्ति में वृद्धि।

5. मानसिक स्वास्थ्य: हताशा और आत्महत्या रोकने के लिए काउंसलिंग सेंटर।

सरकार को युवा आवाजों को सुनना चाहिए। विपक्ष को भी सिर्फ आलोचना नहीं, ठोस विकल्प देना चाहिए। मीडिया को सनसनीखेज खबरों के साथ-साथ गहन विश्लेषण देना चाहिए।

 आशा की किरण अभी बाकी है

यह लेख युवाओं की पीड़ा को दर्ज करने का प्रयास है। स्टेशन के फर्श पर सोते छात्र, NEET घोटाले से टूटे सपने, महंगाई की चक्की में पिसते परिवार – ये तस्वीरें भारत के भविष्य को चुनौती दे रही हैं। लेकिन भारतीय युवा resilient है। इतिहास गवाह है कि कठिनाइयों से निकलकर उन्होंने नई ऊंचाइयां छुई हैं।

जरूरत है सही नीतियों, पारदर्शिता और युवा-केंद्रित विकास की। जब तक हर छात्र को बिना किसी भेदभाव के अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक "सबका साथ, सबका विकास" अधूरा रहेगा। युवा भारत जाग रहा है – अब समय है कि सिस्टम भी उसके साथ खड़ा हो।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World 10 Jun 2026