-Friday World 6 Aug 2016
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ईंधन की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए बताया कि विभिन्न योजनाओं के तहत उपयुक्त इथेनॉल परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार ने कुल 4687 करोड़ रुपये की सब्सिडी मंजूर की है। यह राशि इथेनॉल उत्पादन में निवेश को प्रोत्साहित करने, मिश्रण कार्यक्रम को तेज करने और कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।
सरकार का यह कदम सिर्फ एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण अंग है। देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का कार्यक्रम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। ई-20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में यह सब्सिडी उत्पादकों को सीधा प्रोत्साहन देगी। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिलेगा और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन ईंधन को बढ़ावा मिलेगा।
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) को इस योजना में नोडल एजेंसी बनाया गया है। 2022-23 से नाबार्ड को 2075 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। नाबार्ड के माध्यम से ब्याज राहत योजना चलाई जा रही है। इसके तहत मान्यता प्राप्त परियोजनाओं को बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा वसूले जाने वाले ब्याज पर 6 प्रतिशत तक की राहत या ब्याज का 50 प्रतिशत, इनमें से जो भी कम हो, पांच साल तक उपलब्ध कराई जाएगी। नई टर्म लोन लेने वाले या मौजूदा इकाइयों का विस्तार करने वाले डिस्टिलरीज को यह लाभ मिलेगा। साथ ही ऋण चुकौती के लिए एक वर्ष की राहत अवधि भी शामिल है।
यह योजना गुड़ (मोलासेस), अनाज आधारित और डुअल फीड डिस्टिलरीज दोनों को कवर करती है। इथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाले सभी प्रमुख क्षेत्रों को इसमें शामिल किया गया है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य जैव ईंधन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। कच्चे तेल की आयात निर्भरता कम करना और इको-फ्रेंडली ईंधन को बढ़ावा देना इस नीति का मुख्य आधार है।
पीएम जी-वन योजना के तहत दूसरी पीढ़ी के बायो-इथेनॉल परियोजनाओं को भी विशेष समर्थन मिल रहा है। कृषि अवशेषों, पराली और अन्य बायोमास को कच्चे माल के रूप में उपयोग करने वाले इन प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय सहायता और व्यवहार्यता अंतराल निधि (Viability Gap Funding) उपलब्ध कराई जा रही है। इससे पराली जलाने की समस्या भी कम होगी और किसानों को अतिरिक्त आय का रास्ता खुलेगा।
सहकारी चीनी मिलों के लिए भी अलग योजना बनाई गई है। सिंगल फीडस्टॉक डिस्टिलरीज को मल्टी फीडस्टॉक में बदलने के लिए ब्याज माफी योजना शुरू की गई है। मक्का, गन्ने के अवशेष और खराब अनाज का प्रसंस्करण करने वाली इकाइयों को इससे फायदा होगा। इससे फीडस्टॉक की उपलब्धता बढ़ेगी और उत्पादन में लचीलापन आएगा।
इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम पर जीएसटी भी रियायती दर पर सिर्फ 5 प्रतिशत लगाया गया है। इससे मिश्रित ईंधन की लागत प्रतिस्पर्धी बनी रहेगी। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां लंबे समय के अनुबंध कर रही हैं, इसलिए मांग की कोई चिंता नहीं है। उत्पादकों को सुनिश्चित बाजार मिल रहा है, जो निवेश को और आकर्षक बनाता है।
यह पूरा पैकेज भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू जैव ईंधन उत्पादन बढ़ाना रणनीतिक रूप से जरूरी हो गया है। इथेनॉल मिश्रण से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, वायु गुणवत्ता सुधरती है और किसानों की आय में वृद्धि होती है। गन्ना और मक्का उत्पादक राज्यों में इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
सरकार का फोकस सिर्फ सब्सिडी देने तक सीमित नहीं है। पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई तकनीकों को अपनाने और दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल को बढ़ावा देने से भारत वैश्विक जैव ईंधन मानचित्र पर अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा। ई-20 लक्ष्य हासिल होने के बाद आगे ई-25 या उससे अधिक मिश्रण की संभावनाएं भी खुलेंगी।
नाबार्ड के जरिए ब्याज सब्सिडी का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर भी जोर है। इससे छोटे और मध्यम उत्पादकों को भी आसानी से ऋण मिल सकेगा। डिस्टिलरीज के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।
कुल मिलाकर, 4687 करोड़ रुपये की यह सब्सिडी महज आंकड़ा नहीं है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसान कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती है। सुरेश गोपी द्वारा संसद में दी गई जानकारी से साफ है कि सरकार इथेनॉल कार्यक्रम को प्राथमिकता दे रही है और ठोस वित्तीय समर्थन के साथ आगे बढ़ रही है।
आने वाले वर्षों में जब ई-20 पेट्रोल देशभर में आम हो जाएगा, तब यह फैसला एक दूरदर्शी कदम के रूप में याद किया जाएगा। स्वच्छ ईंधन, मजबूत किसान और ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर भारत—यही इस योजना का असली लक्ष्य है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 6 Aug 2016
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