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Friday, 11 September 2026

यूपी की 403 सीटों पर बीजेपी का गुप्त सर्वे - 128 विधायकों पर लटकी तलवार, 61 हारी हुई सीटों पर नया प्लान

यूपी की 403 सीटों पर बीजेपी का गुप्त सर्वे - 128 विधायकों पर लटकी तलवार, 61 हारी हुई सीटों पर नया प्लान
-Friday World September 12,2026 
                       प्रतीकात्मक तस्वीर 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। लखनऊ से दिल्ली तक बीजेपी के रणनीतिकारों ने मिशन 2027 के लिए होमवर्क शुरू कर दिया है। पार्टी के अंदरखाने हुए एक गुप्त और व्यापक सर्वे ने मौजूदा विधायकों की नींद उड़ा दी है।

125-128 विधायकों के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर एक स्वतंत्र एजेंसी के जरिए गोपनीय सर्वे कराया है। इस आंतरिक रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, वो चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगभग 125 से 128 मौजूदा बीजेपी विधायकों के खिलाफ उनके ही क्षेत्र में मजबूत एंटी-इनकम्बेंसी है।

इन विधायकों के खिलाफ शिकायतों की लिस्ट लंबी है। सबसे बड़ा आरोप है - निष्क्रियता। कई विधायक पिछले 3 साल में अपने क्षेत्र में सक्रिय नहीं दिखे। दूसरा आरोप मतदाताओं और कार्यकर्ताओं की अनदेखी का है। तीसरा और सबसे गंभीर आरोप स्थानीय स्तर पर खनन, ठेके और ट्रांसफर-पोस्टिंग में दखलअंदाजी का है, जिससे पार्टी की छवि खराब हो रही है।

पार्टी हाईकमान का मानना है कि इन 125-128 सीटों पर अगर मौजूदा चेहरे को दोहराया गया तो नुकसान हो सकता है। इसलिए इन सीटों पर टिकट काटे जाने की प्रबल संभावना है। 2022 के चुनाव में भी बीजेपी ने लगभग 100 से ज्यादा मौजूदा विधायकों के टिकट काट कर नया प्रयोग किया था और उसे फायदा भी मिला था। इस बार भी वही फॉर्मूला अपनाया जा सकता है।

61 हारी हुई सीटों पर विशेष फोकस

सर्वे का दूसरा हिस्सा उन 61 सीटों पर केंद्रित है, जहां बीजेपी लगातार हारती रही है। ये वो सीटें हैं जहां समाजवादी पार्टी, बसपा या कांग्रेस का दबदबा रहा है, या जहां मुस्लिम-यादव समीकरण बीजेपी के खिलाफ जाता है।

पार्टी इन 61 सीटों को 'मिशन 61' के तौर पर देख रही है। रणनीति साफ है - यहां बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना, स्थानीय सामाजिक समीकरण के हिसाब से नया चेहरा लाना और सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ उन वर्गों तक पहुंचाना जो अब तक दूर रहे।

2024 के झटके के बाद 2027 में नई शुरुआत

इस पूरी कवायद के पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव का झटका है। यूपी में बीजेपी 2019 में 62 सीटें जीती थी, जो 2024 में घटकर 33 पर आ गई। यह गिरावट नेतृत्व के लिए खतरे की घंटी थी। समीक्षा में पाया गया कि विधायकों की निष्क्रियता और जनता से दूरी का खामियाजा लोकसभा में भुगतना पड़ा।

इसीलिए नेतृत्व अब 2027 के लिए किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहता। संदेश साफ है - परफॉर्मेंस नहीं तो टिकट नहीं। विधायक हों या मंत्री, सभी के काम का हिसाब बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं और जनता के फीडबैक से लिया जा रहा है।

बीजेपी में एक कहावत बहुत मशहूर है - "बीजेपी में टिकट कभी पक्का नहीं होता।" इस गुप्त सर्वे ने इस कहावत को फिर से सच साबित कर दिया है। यही वजह है कि लखनऊ से लेकर हर जिले में विधायकों में बेचैनी बढ़ गई है। कई विधायक अब अचानक अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं, जनसुनवाई कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। लेकिन क्या यह सक्रियता देर से आई है, इसका फैसला आने वाले महीनों में होने वाले अगले दो-तीन सर्वे करेंगे।

तय है कि यूपी बीजेपी 2027 में एक नए चेहरे और नए जोश के साथ मैदान में उतरने वाली है, जहां पुराने नामों की जगह नए और जिताऊ चेहरों को मौका मिलेगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 12,2026 

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