- Friday World September 12,2026
लाल सागर के किनारे बसा यमन का ऐतिहासिक बंदरगाह मोखा एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक सैन्य सूत्रों और चश्मदीदों ने पुष्टि की है कि ईरान समर्थित अंसार अल्लाह आंदोलन, जिसे हूती विद्रोही भी कहा जाता है, ने सऊदी समर्थित सरकारी बलों से इस अहम बंदरगाह शहर पर कब्जा कर लिया है। यह कब्जा सिर्फ एक शहर की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट के शक्ति संतुलन में बहुत बड़ा मोड़ है।
बाब अल-मंदेब से सिर्फ 75 KM दूर
मोखा की भौगोलिक स्थिति ही इसे इतना महत्वपूर्ण बनाती है। इस बंदरगाह पर कब्जे के बाद हूती लड़ाके दुनिया के सबसे व्यस्ततम व्यापारिक मार्गों में से एक, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से मात्र 75 किलोमीटर की दूरी पर आ गए हैं। यह जलडमरूमध्य लाल सागर का दक्षिणी गेट है, जो एशिया को यूरोप से स्वेज नहर के जरिए जोड़ता है। दुनिया का लगभग 12 प्रतिशत वैश्विक व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि मोखा हाथ में आने से हूतियों को न सिर्फ लाल सागर में आवाजाही पर नजर रखने की क्षमता मिलेगी, बल्कि सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर दबाव बनाने का एक नया मोर्चा भी खुल गया है।
सऊदी अरब अकेला, पाकिस्तान ने भी खींचे हाथ
इस घटनाक्रम के बाद सबसे ज्यादा असहज स्थिति सऊदी अरब की नजर आ रही है। कभी यमन युद्ध में सऊदी गठबंधन को कई देशों का खुला समर्थन प्राप्त था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है।
सबसे बड़ा झटका इस्लामाबाद से आया है। सूत्रों के अनुसार सऊदी अरब ने हाल ही में पाकिस्तान के साथ हुए डिफेंस पैक्ट के तहत मदद की उम्मीद की थी, लेकिन पाकिस्तान ने यमन के इस नए मोर्चे पर सऊदी सेना की सीधे तौर पर मदद करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान पहले से ही अपनी आंतरिक और सीमा की चुनौतियों में उलझा है और वह यमन के दलदल में फिर से नहीं फंसना चाहता। इस इनकार के बाद सऊदी अरब कूटनीतिक तौर पर खुद को अकेला महसूस कर रहा है।
MRAP पर पोज और वायरल वीडियो ने मचाया तहलका
मोखा पर कब्जे के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ जिसने इंटरनेट पर बहस को और तेज कर दिया। इस वीडियो में एक हूती लड़ाका सऊदी सेना से छीने गए अमेरिकी निर्मित MRAP बख्तरबंद वाहन पर जीत के अंदाज में पोज देता नजर आ रहा है।
MRAP यानी Mine-Resistant Ambush Protected वाहन, जिसे अमेरिका ने सऊदी सेना को करोड़ों डॉलर की सैन्य सहायता के तहत दिया था। अब वही वाहन हूतियों के कब्जे में है।
इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर मीम्स और तीखी टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। यूजर्स सऊदी अरब की सैन्य तैयारियों की चुटकी ले रहे हैं और सबसे ज्यादा निशाना अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर है। लोगों ने तंज कसते हुए लिखा - "अमेरिकी टैक्सपेयर्स का शुक्रिया, जिन्होंने हूतियों के बढ़ते खिलौनों के कलेक्शन के लिए पैसे दिए।" यह वीडियो इस बात का प्रतीक बन गया है कि कैसे अरबों डॉलर के हथियार युद्ध के मैदान में पाला बदल लेते हैं।
युद्ध का नया अध्याय
मोखा पोर्ट का हाथ से निकलना सऊदी समर्थित सरकार के लिए सामरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों रूप से बड़ा झटका है। यह बंदरगाह हथियारों, रसद और मानवीय सहायता के लिए एक लाइफलाइन माना जाता था। अब इसके हूती नियंत्रण में जाने से लाल सागर में शिपिंग कंपनियों की चिंता और बढ़ गई है और क्षेत्र में तेल की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है।
फिलहाल सऊदी गठबंधन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन जमीनी हकीकत साफ इशारा कर रही है कि लाल सागर की जंग अब एक नए और ज्यादा खतरनाक दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहाँ एक तरफ हूती अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं और दूसरी तरफ उनके पुराने विरोधी धीरे-धीरे अकेले पड़ते जा रहे हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World September 12,2026
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