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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Saturday, 26 September 2026

फलस्तीन के लिए लड़ने वाले अंसारुल्लाह पर सऊदी का वार - ग्रैंड मुफ्ती के फतवे की आड़ में अमेरिका-इजराइल की याराना निभा रही है रियाद सरकार!

फलस्तीन के लिए लड़ने वाले अंसारुल्लाह पर सऊदी का वार - ग्रैंड मुफ्ती के फतवे की आड़ में अमेरिका-इजराइल की याराना निभा रही है रियाद सरकार!
-Friday World September 26, 2026
सना-यमनःजो अंसारुल्लाह आज लाल सागर में इजराइली जहाजों को रोक कर, तेल अवीव पर मिसाइलें दाग कर फलस्तीन के मजलूमों के लिए अकेला खड़ा है, उसी अंसारुल्लाह को खत्म करने के लिए सऊदी की यहूदी समर्थक सरकार ने अब धर्म के नाम पर फतवा जारी करवा दिया है।

सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती शेख सालेह बिन फौजान अल फौजान ने देश के सैनिकों से कहा है कि अंसारुल्लाह के खिलाफ आखिरी दम तक जंग करो, जान भी कुर्बान करनी पड़े तो करो। सऊदी सरकारी मीडिया SPA ने इस बयान को बड़े गर्व के साथ चलाया है।

सवाल यह है कि यह फतवा किसके लिए है? जब गाजा में बच्चे भूख से मर रहे हैं, जब इजराइल अस्पतालों और स्कूलों पर बम बरसा रहा है, तब दुनिया में अगर कोई खुल कर फलस्तीन के लिए लड़ा है तो वो यमन का अंसारुल्लाह ही है। उसी अंसारुल्लाह को सऊदी सरकार दुश्मन बता रही है।

असली खेल क्या है?

1. फलस्तीन से ध्यान भटकाना: अंसारुल्लाह ने इजराइल की आर्थिक नाकेबंदी कर दी है। इससे अमेरिका और इजराइल बौखलाए हुए हैं। सऊदी सरकार, जो अंदरखाने अब्राहम अकॉर्ड के जरिए इजराइल से हाथ मिला चुकी है, अमेरिका के इशारे पर अंसारुल्लाह पर हमला करके इजराइल की मदद कर रही है।

2. धर्म को हथियार बनाना: ग्रैंड मुफ्ती के मुंह से "वतन की हिफाजत सबसे बड़ा फर्ज है" कहलवाया जा रहा है, ताकि सऊदी के नौजवानों को लगे कि वे इस्लाम के लिए लड़ रहे हैं। हकीकत में वे इजराइल की सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं। जो सरकार खुद अमेरिका के सैन्य अड्डों को अपनी जमीन पर बैठाए हुए है, वह वतन की हिफाजत की बात कैसे कर सकती है?

3. अमेरिका-इजराइल की याराना: सऊदी शासक अच्छी तरह जानते हैं कि उनकी कुर्सी वाशिंगटन से बंधी है। इसलिए फलस्तीन के हक में खड़े होने वाले अंसारुल्लाह को सत्ता से बेदखल करने का आदेश दिया जा रहा है। यह यमन की जंग नहीं, यह फलस्तीन की आवाज को दबाने की जंग है।

कौन है असली मुजाहिद?

एक तरफ अंसारुल्लाह है, जिसके पास न बड़ी सेना है न अरबों डॉलर का तेल, लेकिन उसने इजराइल को कहा - "गाजा पर हमला बंद करो वरना हम तुम्हें नहीं छोड़ेंगे"। दूसरी तरफ सऊदी सरकार है जिसके पास दुनिया का सबसे महंगा हथियार है, लेकिन उसने एक बार भी इजराइल पर हमला करने वाले अंसारुल्लाह का साथ नहीं दिया, बल्कि उसी पर हमला कर दिया।

आज उम्मत देख रही है कि फलस्तीन के लिए कौन लड़ रहा है और इजराइल के लिए कौन तलवार उठा रहा है। ग्रैंड मुफ्ती का यह फतवा इतिहास में लिखा जाएगा कि जब फलस्तीन जल रहा था, तब सऊदी की बंदूकों का मुंह अंसारुल्लाह की तरफ था, इजराइल की तरफ नहीं।

Sajjadali Nayani ✍️
Friday World September 26, 2026


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