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Saturday, 26 September 2026

RTI से हड़कंप: 13 करोड़ वोटर लिस्ट से गायब, चुनाव आयोग ने कहा- "ये फैसला हमने लिया ही नहीं", लोकतंत्र पर उठे बड़े सवाल

RTI से हड़कंप: 13 करोड़ वोटर लिस्ट से गायब, चुनाव आयोग ने कहा- "ये फैसला हमने लिया ही नहीं", लोकतंत्र पर उठे बड़े सवाल
- Friday World September 26,2026 
नई दिल्ली। देश में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। RTI एक्टिविस्ट अंजलि भारद्वाज के एक खुलासे ने चुनाव आयोग (ECI) को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

दरअसल अंजलि भारद्वाज ने RTI के तहत चुनाव आयोग से 'SIR' (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और कथित तौर पर 13 करोड़ वोटरों के नाम काटे जाने से जुड़ी फाइलों, नोटिंग और आदेशों की जानकारी मांगी थी। आरटीआई के जवाब में आयोग के अधिकारी ने लिखित में यह जवाब दिया कि इस तरह का कोई फैसला चुनाव आयोग ने लिया ही नहीं है।

यह जवाब सामने आते ही सियासी और सामाजिक हलकों में भूचाल आ गया है। सवाल यह है कि अगर वोटर लिस्ट से नाम हटाने का इतना बड़ा फैसला चुनाव आयोग ने नहीं लिया, तो फिर यह फैसला किसने लिया और किसके आदेश पर देश भर में वोटर लिस्ट में संशोधन किया गया?

वरिष्ठ पत्रकार ने दागे तीखे सवाल

इस सनसनीखेज खुलासे पर वरिष्ठ पत्रकार कृष्णकांत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखते हुए सवाल उठाया, "अगर यह फैसला आयोग का नहीं था, तो फिर देश की वोटर लिस्ट तैयार कौन कर रहा है? क्या लोकतंत्र के लुटेरों ने चुनाव आयोग को पूरी तरह बंधक बना लिया है जो सत्ता के मनमुताबिक वोटर चुन रहे हैं?"

उनका कहना है कि वोटर लिस्ट ही लोकतंत्र की आत्मा है और अगर उसी से छेड़छाड़ हो रही है तो यह बेहद चिंताजनक है।

क्या है SIR प्रक्रिया?

SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग घर-घर जाकर वोटर लिस्ट को अपडेट करता है। इसमें मृत, डुप्लीकेट, या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और नए वोटरों के नाम जोड़े जाते हैं। यह एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इस बार पैमाना बहुत बड़ा बताया जा रहा है।

विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया की आड़ में चुन-चुन कर कुछ वर्गों के वोट काटे जा रहे हैं। हालांकि चुनाव आयोग हमेशा कहता आया है कि यह एक पारदर्शी और कानून के तहत की जाने वाली प्रक्रिया है।

क्या कहता है चुनाव आयोग?

अभी तक चुनाव आयोग की तरफ से इस RTI जवाब पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रेस बयान नहीं आया है। आयोग का सामान्य पक्ष यह रहता है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने की प्रक्रिया Booth Level Officer (BLO) द्वारा फील्ड वेरिफिकेशन के बाद ही होती है और इसका अंतिम फैसला ERO (Electoral Registration Officer) लेता है।

लेकिन RTI में "फैसला आयोग ने लिया ही नहीं" जैसे जवाब ने संदेह को और गहरा कर दिया है। RTI कार्यकर्ताओं का कहना है कि आयोग को फाइल नोटिंग और आदेश की कॉपी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

यह मामला अब सिर्फ वोटर लिस्ट का नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और विश्वसनीयता का बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या चुनाव आयोग इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करता है या नहीं।

 यह आर्टिकल RTI एक्टिविस्ट के दावे और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। पाठकों से अनुरोध है कि वोटर लिस्ट से संबंधित आधिकारिक जानकारी के लिए https://voters.eci.gov.in और https://elections24.eci.gov.in पर ही भरोसा करें।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 26,2026 

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