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Thursday, 10 September 2026

TRUMP IS “INSANE” - अल गोर का बम, और 1973 से 2026 तक तेल ही क्यों है दुनिया की असली सत्ता!

TRUMP IS “INSANE” - अल गोर का बम, और 1973 से 2026 तक तेल ही क्यों है दुनिया की असली सत्ता!
-Friday World September 10,2026 
Bloomberg TV पर एक शब्द ने वाशिंगटन हिला दिया।

अमेरिका के पूर्व उप-राष्ट्रपति और जलवायु के सबसे बड़े चेहरों में से एक अल गोर ने Bloomberg TV पर दावोस में डेविड रुबेंस्टीन से बात करते हुए कहा - ट्रम्प प्रशासन का ऑफशोर विंड फार्म्स के खिलाफ अभियान “Insane” यानी पागलपन है। 4817

गोर ने कहा कि रिन्यूएबल एनर्जी दुनिया में तेजी से हावी हो रही है और यही भविष्य है। ट्रम्प का विंड पावर को रोकना तर्क के खिलाफ है। ये बयान ऐसे वक्त आया है जब ट्रम्प प्रशासन तेल और गैस के पक्ष में खुलकर खड़ा है।

लेकिन ये सिर्फ एक इंटरव्यू नहीं, ये 50 साल के एक बड़े चक्र की कहानी है जिसे हम सालों से लिखते आ रहे हैं।

1973 - जब तेल हथियार बना

1973 के अरब-इजराइल जंग ने अरब दुनिया को एक नया मंत्र दिया - “Oil as a wealth and weapon” - तेल दौलत भी है और हथियार भी।

अमेरिका के दिग्गज विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर ने खुद लिखा था कि इजराइल के कारण तेल के दामों में जो उछाल आया, उसने अमेरिका और यूरोप की तरक्की को 15 साल पीछे धकेल दिया। यही वो मोड़ था जहां से पेट्रो-डॉलर की दुनिया बनी।

अरबों का पुनर्जागरण

1973 के बाद आर्थिक तौर पर अरबों का पुनर्जागरण (Renaissance of Arabs) हुआ। हम लगातार लिखते रहे हैं कि अरब देशों का तेल और गैस 2050 तक दुनिया की ऊर्जा के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। चाहे जितनी विंड टरबाइन लग जाएं, असली ताकत आज भी खाड़ी से ही आती है।

पिछले पचास साल में इसका नतीजा क्या निकला? आज करीब 300 अरब परिवारों के पास दुनिया की दो-तिहाई दौलत है। ये दौलत सिर्फ महलों में नहीं लगी, इसने लंदन से लेकर सिलिकॉन वैली तक पूरी दुनिया की इकॉनमी को खरीदने की ताकत दी।

2026 में इतिहास खुद को दोहरा रहा है

अभी इजराइल की वजह से अमेरिका जो ईरान से जंग लड़ रहा है, वह भी तेल के बढ़े दाम ही ये जंग बंद करवाएगा। बिल्कुल 1973 की तरह।

2026 में कच्चे तेल और गैस के दाम ने फिर अमेरिका और यूरोप की तरक्की को 20 साल पीछे कर दिया है। महंगाई, सप्लाई चेन क्राइसिस और ऊर्जा संकट - सबकी जड़ एक ही है। जब तक मध्य-पूर्व में आग लगी है, तेल सस्ता नहीं हो सकता और जब तक तेल सस्ता नहीं होगा, पश्चिमी अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौटेगी। अल गोर की “ग्रीन एनर्जी” की बात अपनी जगह सही है, पर जमीन पर आज भी जंग तेल के लिए ही लड़ी जा रही है।

लंदन से आई सबसे बड़ी गवाही

इसी बीच इंग्लैंड के विदेश मंत्री ने कल ब्रिटिश संसद में पहली बार खुलकर कहा है कि इजराइल West Bank में फलस्तीनियों का “Ethnic Cleansing” कर रहा है।

इतना कहने से फलस्तीनियों को तुरंत कोई लाभ नहीं पहुंचेगा, मगर ये बयान बहुत बड़ा है। ये बताता है कि यूरोप को आखिर समझ में आ गया है कि बिना अरब के वो विकास नहीं कर सकता। यूरोप को ऊर्जा चाहिए, निवेश चाहिए, और बाजार चाहिए - और वो सब अरब दुनिया के पास है। इसलिए अब नैतिकता की भाषा भी संसद में सुनाई देने लगी है।


असली लड़ाई ऊर्जा की है

अल गोर ट्रम्प को पागल कहें या ट्रम्प गोर को, सच्चाई ये है कि अमेरिका दो रास्तों पर बंटा है - एक रास्ता विंड और सोलर का है, दूसरा तेल और गैस का। लेकिन दुनिया का तीसरा रास्ता अरब दुनिया तय कर रही है, जिसके पास दोनों हैं - तेल की दौलत और अब ग्रीन एनर्जी में सबसे बड़ा निवेश।

1973 में तेल ने हथियार बनकर दुनिया बदली थी, 2026 में वही तेल फिर हथियार बनकर जंगें रुकवाएगा।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 10,2026 

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