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Wednesday, 7 October 2026

अलविदा नाना पाटेकर: 75 साल की उम्र में सिनेमा का 'क्रांतिवीर' हमेशा के लिए खामोश, गोवा में ली अंतिम सांस

अलविदा नाना पाटेकर: 75 साल की उम्र में सिनेमा का 'क्रांतिवीर' हमेशा के लिए खामोश, गोवा में ली अंतिम सांस
-Friday World Oct 8,2026
बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के सबसे दमदार अभिनेताओं में से एक नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। 8 अक्टूबर 2026 की सुबह 5:20 बजे गोवा के डोना पाउला स्थित अपने निवास पर उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया। घर पर बेहोश अवस्था में मिलने के बाद उन्हें तुरंत मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉ. शेखर सालकर और उनकी मेडिकल टीम ने 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें होश में लाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने पिता के निधन की पुष्टि की है।

मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम की औपचारिकता की जाएगी, जो कि अचानक हुई मौत के मामलों में सामान्य प्रक्रिया है।

एक साधारण लड़के से लीजेंड बनने तक का सफर
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा (रायगढ़) में हुआ था। उन्होंने सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड आर्ट, मुंबई से पढ़ाई की और थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की। विजया मेहता के नाटक से उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा।

1978 में फिल्म 'गमन' से उन्होंने हिन्दी सिनेमा में डेब्यू किया था। उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

कैसा रहा करियर?
नाना पाटेकर का करियर लगभग पांच दशकों का रहा। उन्होंने हर तरह की भूमिका निभाई - खलनायक, हीरो, कॉमेडियन, इमोशनल पिता।

उनकी कुछ यादगार फिल्में:
- परिंदा (1989): इस फिल्म में अन्ना के किरदार ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया।

- क्रांतिवीर (1994): 'ये एक तेजाब...!' वाला डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर है। इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला।

- अग्निसाक्षी (1996): इसके लिए भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला।

- खामोशी, अब तक छप्पन, तिरंगा, वजूद, यशवंत, नटसम्राट

- वेलकम (2007): उदय शेट्टी बनकर उन्होंने Gen-Z को अपना सबसे बड़ा मीम 'कंट्रोल उदय, कंट्रोल' दिया।

उन्हें 3 नेशनल फिल्म अवॉर्ड, 4 फिल्मफेयर अवॉर्ड और महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार मिले। 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।

उनकी आखिरी फिल्म विशाल भारद्वाज की 'O' Romeo' (फरवरी 2026) थी, जिसमें वे शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी के साथ नजर आए थे। आखिरी सार्वजनिक उपस्थिति 4 अक्टूबर 2026 को गोवा में सम्राट क्लब इंटरनेशनल के एक कार्यक्रम में हुई थी, जिसका वीडियो PTI ने शेयर किया था।

पर्दे के पीछे के हीरो
नाना पाटेकर सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे। वे एक फौजी, लेखक, डायरेक्टर और समाजसेवी भी थे। मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर उन्होंने 'नाम फाउंडेशन' बनाया, जो महाराष्ट्र के सूखा-प्रभावित किसानों की मदद करता है। किसान आत्महत्या रोकना, पानी बचाना और किसानों के बच्चों की पढ़ाई में मदद करना उनका मिशन था।

उनके जाने से बॉलीवुड में शोक की लहर है। नितिन गडकरी, डीके शिवकुमार और फिल्म इंडस्ट्री के तमाम सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए मुंबई लाया जाएगा।

एक युग का अंत हो गया है, लेकिन उनकी दहाड़, उनकी डायलॉग डिलीवरी और उनका जज्बा हमेशा याद रखा जाएगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World Oct 8,2026

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