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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Wednesday, 7 October 2026

लाल सागर पर अंसारुल्लाह परचम: ईरान की निवेशित ताकत का फल और दुनिया के दो हिस्से

लाल सागर पर अंसारुल्लाह परचम: ईरान की निवेशित ताकत का फल और दुनिया के दो हिस्से
-Friday World Oct 7,2026 
यमन के पश्चिमी तट पर पिछले कुछ हफ्तों में जो तेजी आई है, वह सिर्फ एक स्थानीय संघर्ष नहीं लगती। यह एक ऐसी रणनीतिक सफलता है जिसकी जड़ें सालों पहले ईरान द्वारा यमनी लड़कों को दिए गए प्रशिक्षण, हथियार और समर्थन में छिपी हैं। आज लाल सागर की लगभग पूरी यमनी तटीय रेखा पर अंसारुल्लाह झंडा लहरा रहा है। मोखा बंदरगाह से लेकर बाब अल-मंदब के पास के द्वीपों तक—पेरिम (मयून) समेत—अंसारुल्लाह ने तेज अभियान चलाकर नियंत्रण हासिल कर लिया।

यह सफलता अचानक नहीं आई। ईरान ने लंबे समय से अंसारुल्लाह को प्रशिक्षित किया, मिसाइल और ड्रोन तकनीक दी तथा समुद्री हमलों की क्षमता विकसित करने में मदद की। आज उसी निवेश की एक-एक बूंद काम आ रही है। अंसारुल्लाह अब सिर्फ यमन के अंदर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन पर भी असर डालने की स्थिति में हैं।

**दो चोकपॉइंट्स का समीकरण**

दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री गलियारों पर अब ईरानी प्रभाव साफ दिख रहा है। पहला है जलडमरूमध्य हॉर्मूज—जहां ईरान खुद सीधा दबाव बना सकता है। दूसरा है बाब अल-मंदब, जहां ईरान के सहयोगी अंसारुल्लाह अब मजबूत स्थिति में बैठे हैं। यदि दोनों मार्ग एक साथ बाधित या नियंत्रित हो जाएं, तो वैश्विक व्यापार का नक्शा बदल जाता है।

एक तरफ बाजार और उपभोक्ता अर्थव्यवस्थाएं, दूसरी तरफ उत्पादन इकाइयां और ऊर्जा आपूर्ति। बीच में ईरानी प्रभाव वाला गलियारा। तेल, गैस और कंटेनर जहाजों का बड़ा हिस्सा इन दो मार्गों से गुजरता है। सऊदी अरब समेत कई देशों ने हॉर्मूज पर दबाव बढ़ने के बाद लाल सागर वाले रास्ते पर ज्यादा निर्भरता बढ़ाई थी। अब वही रास्ता भी अंसारुल्लाह के प्रभाव क्षेत्र में आ गया है।

**सऊदी राजशाही की कोशिश और सीमाएं**

सऊदी अरब पिछले एक दशक से यमन में अंसारुल्लाह को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। हवाई हमले, ग्राउंड सहयोग और राजनयिक प्रयास—सब कुछ आजमाया गया। फिर भी पश्चिमी तट पर हालिया तेजी के सामने सऊदी समर्थित बल पीछे हटते दिखे। कुछ इलाकों में जवाबी कार्रवाई शुरू हुई है, लेकिन अंसारुल्लाह का तटीय कब्जा और द्वीपों पर पहुंच साफ संकेत देती है कि सऊदी की पूरी ताकत के बावजूद यमन को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लाना आसान नहीं रहा।

यह स्थिति सिर्फ सैन्य नहीं, आर्थिक और राजनयिक भी है। लाल सागर में शिपिंग की सुरक्षा पर सवाल उठने से बीमा लागत बढ़ती है, रास्ते बदलने पड़ते हैं और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बनता है। वैश्विक बाजार पहले से ही कई मोर्चों पर तनाव झेल रहे हैं। ऐसे में यमन का यह विकास नया आयाम जोड़ रहा है।

**रणनीतिक संदेश**

अंसारुल्लाह की यह सफलता ईरान की क्षेत्रीय रणनीति का व्यावहारिक प्रदर्शन है। प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय सहयोगी समूहों के जरिए प्रभाव फैलाने का मॉडल यहां काम करता दिख रहा है। यमन के लड़के अब सिर्फ स्थानीय विद्रोही नहीं रह गए; वे एक बड़े गलियारे के द्वारपाल बन गए हैं। बाब अल-मंदब पर नियंत्रण का मतलब है कि जहाजों पर नजर रखना, दबाव बनाना या चुनिंदा लक्ष्य तय करना आसान हो जाता है।

साथ ही यह याद रखना जरूरी है कि यमन का आंतरिक संघर्ष जटिल है। अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार, स्थानीय शक्तियां और क्षेत्रीय खिलाड़ी सभी अपनी भूमिका निभा रहे हैं। अंसारुल्लाह का विस्तार स्थायी शांति लाएगा या नया दौर खोलेगा—यह आने वाले समय में तय होगा। फिलहाल तथ्य यह है कि लाल सागर की यमनी तटीय रेखा पर अंसारुल्लाह परचम लहरा रहा है और दो महत्वपूर्ण चोकपॉइंट्स पर ईरानी प्रभाव का समीकरण मजबूत हुआ है।

बाजार एक तरफ, उत्पादन दूसरी तरफ और बीच में वह शक्ति जो दोनों को जोड़ने वाले मार्गों पर असर डाल सकती है। यमन की हालिया घटनाएं यही संदेश दे रही हैं। क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदल रहा है और वैश्विक व्यापार के लिए इसके निहितार्थ दूरगामी हैं।

Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 7,2026 

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