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Friday, 2 October 2026

इराक में अमेरिका का 20 साल का अंत - आखिरी बेस से वापसी, 4500 जवानों की कुर्बानी के बाद खाली होगा मैदान, ईरान की जीत और ISIS के लौटने का डर

इराक में अमेरिका का 20 साल का अंत - आखिरी बेस से वापसी, 4500 जवानों की कुर्बानी के बाद खाली होगा मैदान, ईरान की जीत और ISIS के लौटने का डर
-Friday World Oct 3,2026 
बुधवार, 30 सितंबर। इराक की रेतीली जमीन पर एक युग का अंत होने जा रहा है। अमेरिकी सेना अपने आखिरी ठिकाने, अपने आखिरी बंकर, अपने आखिरी झंडे को समेट कर इराक छोड़ने वाली है। 2003 में जो काफिला बगदाद में दाखिल हुआ था, वो 20 साल से ज्यादा की खूनी जंग, 4500 अमेरिकी सैनिकों की मौत और खरबों डॉलर खर्च करने के बाद अब वापस जा रहा है।

यह वापसी कोई अचानक नहीं है। इस वापसी पर मुहर 2024 में ही लग गई थी, जब राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में वाशिंगटन और बगदाद के बीच सहमति बनी थी कि अब अमेरिकी मिशन को इराक में कॉम्बैट से एडवाइजरी में बदला जाएगा और धीरे-धीरे सैनिक हटेंगे। लेकिन यह संयोग ही है कि यह आखिरी वापसी ऐसे समय में हो रही है जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान तेज कर रखा है।

ईरान में जश्न, तेहरान में जीत का ऐलान

जैसे ही अमेरिकी वापसी की खबर पक्की हुई, तेहरान से लेकर बेरूत तक ईरान और उसके सहयोगी गुटों में जश्न का माहौल है। ईरानी मीडिया इसे "बड़ी शैतान की हार" और "प्रतिरोध की जीत" बता रहा है। ईरान समर्थित हशद अल-शाबी जैसे मिलिशिया ग्रुप के नेताओं ने कहा कि यह वही दिन है जिसका इंतजार जनरल कासिम सुलेमानी ने किया था।

ईरान का तर्क साफ है - हमने अमेरिका को इराक से निकाल दिया। सालों तक रॉकेट हमले, ड्रोन हमले, राजनीतिक दबाव बनाकर आखिरकार हमने अमेरिका को मजबूर कर दिया।

लेकिन क्या सच में यह ईरान की जीत है? अमेरिका खुद कहता है कि यह हार नहीं, रणनीति में बदलाव है। अब अमेरिका इराक में जमीन पर सैनिक नहीं रखना चाहता, बल्कि वह खाड़ी के अपने बड़े बेसों से, हवा से और इंटेलिजेंस से इराक पर नजर रखेगा।

4500 मौतें, एक अधूरा सपना

इराक युद्ध अमेरिका के इतिहास का सबसे लंबा और विवादित युद्धों में से एक है। 2003 में सद्दाम हुसैन के पास वेपन्स ऑफ मास डिस्ट्रक्शन हैं, इस दावे के साथ शुरू हुई जंग में अमेरिका ने सोचा था कि वह इराक में लोकतंत्र लाएगा।

लेकिन 20 साल बाद हिसाब क्या है? 4500 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए, 32 हजार से ज्यादा घायल हुए। लाखों इराकी नागरिकों की जान गई। और इराक आज भी पूरी तरह स्थिर नहीं है। अमेरिका ने अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन इराक की संसद में आज सबसे ज्यादा प्रभाव ईरान समर्थित दलों का ही है। यह अमेरिका के लिए एक कड़वी सच्चाई है।

इराक की दोहरी भावना - स्वागत भी, डर भी

बगदाद सरकार ने आधिकारिक तौर पर अमेरिकी वापसी का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि यह इराक की संप्रभुता की जीत है और अब इराकी सेना खुद अपने देश की सुरक्षा करने में सक्षम है। इराक अब नहीं चाहता कि वह अमेरिका और ईरान की जंग का मैदान बने।

लेकिन पर्दे के पीछे, इराकी जनरलों और खुफिया अधिकारियों में गहरा डर है। डर है एक खालीपन का - वैक्यूम का।

पिछले 10 सालों से अमेरिकी सेना भले ही फ्रंट पर नहीं लड़ रही थी, लेकिन वह इराकी सेना को इंटेलिजेंस, ड्रोन सर्विलांस, एयर सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स दे रही थी। उसी की मदद से इस्लामिक स्टेट (ISIS) को हराया गया था।

अब जब अमेरिका हटेगा तो क्या होगा?

पहला खतरा - ISIS की वापसी। रिपोर्ट्स कह रही हैं कि ISIS के स्लीपर सेल अभी भी पश्चिमी इराक के रेगिस्तान और सीरिया बॉर्डर पर सक्रिय हैं। अमेरिकी एयर पावर हटते ही उनके संगठित होने का खतरा बढ़ जाएगा।

दूसरा खतरा - अमेरिका के दुश्मनों को खुला मौका। ईरान समर्थित गुट और ज्यादा ताकतवर हो जाएंगे, जिससे इराक फिर से एक प्रॉक्सी वॉर का अखाड़ा बन सकता है।

आगे क्या?

30 सितंबर के बाद इराक में अमेरिकी बूट जमीन पर नहीं होंगे, लेकिन अमेरिकी प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं होगा। अमेरिका कुर्दिस्तान में और कुवैत, कतर, जॉर्डन में अपने बेस रखेगा। जरूरत पड़ने पर वह हवा से हमला कर सकता है।

लेकिन एक बात तय है - इराक में अमेरिकी जमीन पर मौजूदगी का एक अध्याय बंद हो गया है। यह अध्याय खून, तेल, जियोपॉलिटिक्स और धोखे से भरा था।

अब देखना यह है कि क्या इराक इस खालीपन को भर पाता है, या फिर यह देश एक बार फिर उसी अंधेरे में जाता है जहाँ से वह 2017 में ISIS को हराकर निकला था। अमेरिकी वापसी एक अंत है, लेकिन एक नए, ज्यादा खतरनाक संघर्ष की शुरुआत भी हो सकती है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 3,2026 

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