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Monday, 5 October 2026

ईरान की मिसाइल-ड्रोन की दहशत से कांपा अमेरिका! ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड से 12 B-1 बॉम्बर्स लेकर भागा पेंटागन

ईरान की मिसाइल-ड्रोन की दहशत से कांपा अमेरिका! ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड से 12 B-1 बॉम्बर्स लेकर भागा पेंटागन
-Friday World Oct 5,2026 
                 प्रतीकात्मक तस्वीर 

वॉशिंगटन/लंदन, 4 अक्टूबर 
अमेरिका ने 4 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसने ब्रिटेन के ग्लॉस्टरशायर स्थित अपने सबसे भरोसेमंद एयरबेस RAF फेयरफोर्ड से अपने सभी 12 B-1 लांसर बॉम्बर्स को हटा लिया है। यह कोई सामान्य रोटेशन नहीं, बल्कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले के सीधे डर से की गई इमरजेंसी निकासी थी।

'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने पेंटागन के दो वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से बताया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला था कि ईरान ब्रिटेन में मौजूद अमेरिकी बॉम्बर्स को सीधे मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन से निशाना बना सकता है। इसी इंटेलिजेंस के बाद पेंटागन में हड़कंप मच गया और रविवार को आनन-फानन में सभी बॉम्बर्स को उनके होम बेस साउथ डकोटा और टेक्सास वापस बुलाने का आदेश जारी कर दिया गया।

इस बेस पर कम से कम 12 अमेरिकी B-1 बॉम्बर तैनात थे। इनमें से कुछ तो कुछ दिन पहले ही ईरान पर हमले के लिए यहां पहुंचे थे। RAF फेयरफोर्ड को अमेरिका ईरान पर हमले के लिए 'पसंदीदा लॉन्चपैड' के तौर पर इस्तेमाल कर रहा था, क्योंकि यहां से ईरान की दूरी कम है। लेकिन अब अमेरिका को डर सताने लगा कि ईरान ब्रिटेन के अंदर ही उसके बॉम्बर्स को जद में ले सकता है।

मिसाइल और ड्रोन का खौफ, 

पहले खबरें आई थीं कि फेयरफोर्ड के पास तीन संदिग्ध वैन देखी गईं और 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि बॉम्बर्स हटाने की असली वजह वैन में रखे पेट्रोल बम नहीं, बल्कि ईरान की लंबी दूरी की मिसाइल और शाहेद ड्रोन की पहुंच है।

पेंटागन को आशंका थी कि ईरान, ब्रिटेन में मौजूद अपने स्लीपर सेल या फिर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से, RAF फेयरफोर्ड पर सटीक मिसाइल या ड्रोन हमला कर सकता है। B-1 बॉम्बर एक-एक अरबों डॉलर का है और रनवे पर खड़ा बॉम्बर सबसे आसान टारगेट होता है। यूक्रेन युद्ध में रूस के बॉम्बर्स पर ड्रोन हमले से अमेरिका ने सबक लिया है। इसलिए एक भी बॉम्बर खोने का रिस्क नहीं लेना चाहता था।

पेंटागन के बयान में कहा गया - "हम अब पुष्टि कर सकते हैं कि RAF फेयरफोर्ड पर तैनात सभी अमेरिकी बॉम्बर्स को उनके होम स्टेशन पर वापस भेज दिया गया है।"

इतनी जल्दबाजी कि रिफ्यूलिंग प्लेन भी पीछे रह गए

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक यह निकासी इतनी अर्जेंट थी कि कुछ B-1 बॉम्बर्स ने तब ही टेक-ऑफ कर दिया जब उनके साथ उड़ने वाले एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुए थे। रास्ते में ही टैंकरों को उन्हें जॉइन करना पड़ा। यह दिखाता है कि खतरा कितना बड़ा और तुरंत था।

ब्रिटेन में भी अलर्ट, ईरान ने किया इनकार

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बरनहम ने भी कहा है कि इस पूरे मामले में 'मजबूत संकेत' हैं कि ईरान शामिल है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में ईरानी मूल के नेटवर्क सक्रिय हैं जो मिसाइल-ड्रोन हमले में मदद कर सकते हैं।

वहीं तेहरान ने हमेशा की तरह इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि अमेरिका अपनी नाकामी छिपाने के लिए ईरान का नाम ले रहा है। लेकिन सच्चाई यह है कि ईरान के पास अब 2000 किमी से ज्यादा दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें हैं जो ब्रिटेन तक पहुंच सकती हैं।

अमेरिका की रणनीति पर सवाल

इस घटना ने अमेरिका की ईरान नीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जो अमेरिका ईरान पर बमबारी करने के लिए ब्रिटेन का बेस इस्तेमाल कर रहा था, वही अब अपने बमवर्षकों को बचाने के लिए भाग रहा है। यह ईरान की नई ताकत को दिखाता है। अब युद्ध सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप में मौजूद अमेरिकी अड्डे भी ईरान की मिसाइलों की जद में हैं।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World Oct 5,2026 

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