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यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Sunday, 13 September 2026

September 13, 2026

दिल्ली से तेहरान तक गूंजा बड़ा संदेश: "UAE-सऊदी दुश्मन नहीं, असली मुद्दा अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं" - भारत में खुलकर बोले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान

दिल्ली से तेहरान तक गूंजा बड़ा संदेश: "UAE-सऊदी दुश्मन नहीं, असली मुद्दा अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं" - भारत में खुलकर बोले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान
-Friday World September 13,2026 
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का भारत दौरा सिर्फ एक राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि एक स्पष्ट और बेबाक संदेश बन गया है। नई दिल्ली में खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस कर, बिना किसी सवाल से बचे, उन्होंने वह कहा जो तेहरान लंबे समय से कहना चाहता था। आजतक से खास बातचीत में उन्होंने दो टूक कहा - 'हमें UAE या खाड़ी के किसी भी क्षेत्रीय देश से कोई समस्या नहीं है, समस्या अमेरिकी सैन्य ठिकानों से है।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर है, सऊदी पाइपलाइनों पर ड्रोन हमले हो रहे हैं और खाड़ी देशों में अमेरिकी मौजूदगी को लेकर बहस तेज है।

भारत की जमीन से खाड़ी को पैगाम

पेजेश्कियान का भारत को मंच बनाना सोचा-समझा कदम है। भारत, ईरान का ऐतिहासिक दोस्त है और साथ ही सऊदी अरब, UAE का भी करीबी साझेदार है। दिल्ली से दिया गया उनका संदेश इसलिए ज्यादा वजन रखता है।

उन्होंने कहा, "हम सऊदी अरब और UAE को अपना दुश्मन नहीं मानते। वे हमारे मुस्लिम भाई हैं, हमारे पड़ोसी हैं। हमारा झगड़ा उनके साथ नहीं है।" इसके बाद उन्होंने अपनी बात को और स्पष्ट किया, "हमारा कहना सिर्फ इतना है कि खाड़ी और पड़ोसी देश अपनी जमीन को ईरान पर हमले के लिए अमेरिका को इस्तेमाल न करने दें।"

उनका इशारा साफ था - ईरान का टकराव क्षेत्रीय देशों से नहीं, बल्कि इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उसकी नीतियों से है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में वो बेबाकी जो अक्सर नहीं दिखती

दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेजेश्कियान का अंदाज बिल्कुल अलग था। न सवालों से बचना, न घुमा-फिरा कर जवाब देना। पत्रकारों ने परमाणु कार्यक्रम, इजरायल-ईरान तनाव, तेल प्रतिबंधों और भारत के साथ चाबहार पोर्ट जैसे तीखे सवाल पूछे और उन्होंने हर सवाल का खुलकर जवाब दिया।

उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी संप्रभुता पर कोई समझौता भी नहीं करेगा। अगर अमेरिका या इजरायल ईरान पर हमला करता है, तो ईरान को जवाब देने का पूरा हक है। लेकिन वह जवाब खाड़ी देशों की जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि उन ठिकानों के खिलाफ होगा जहां से हमला होगा।

यह बयान एक तरह से खाड़ी देशों को आश्वासन भी है और चेतावनी भी। आश्वासन कि ईरान उन्हें दुश्मन नहीं मानता, और चेतावनी कि अगर उनकी जमीन से हमला हुआ तो वह जमीन जवाबी कार्रवाई के दायरे में आ सकती है।

इस बयान के मायने क्या हैं?

1. क्षेत्रीय एकता की कोशिश: ईरान पिछले दो साल से सऊदी अरब और UAE के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश में है। चीन की मध्यस्थता से सऊदी-ईरान समझौता इसका सबूत है। पेजेश्कियान उसी कूटनीति को आगे बढ़ा रहे हैं।

2. अमेरिका पर दबाव: ईरान अमेरिका को यह बताना चाहता है कि उसकी खाड़ी में मौजूदगी ही पूरे क्षेत्र में अस्थिरता की जड़ है। अगर अमेरिकी अड्डे हट जाएं, तो क्षेत्र के देश आपस में बातचीत से मसले हल कर सकते हैं।

3. भारत की भूमिका: भारत के लिए यह स्थिति संतुलन साधने वाली है। भारत ईरान से सस्ता तेल चाहता है, चाबहार पोर्ट के जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच चाहता है, और साथ ही खाड़ी देशों में बसे 90 लाख भारतीयों की सुरक्षा भी चाहता है। पेजेश्कियान का यह नरम रुख भारत की कूटनीति के लिए राहत की बात है।

तेल, चाबहार और भविष्य

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेजेश्कियान ने भारत-ईरान संबंधों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों के बावजूद भारत और ईरान का व्यापार बढ़ सकता है। चाबहार पोर्ट दोनों देशों का साझा भविष्य है और इसे किसी तीसरे देश के दबाव में नहीं रोका जाना चाहिए।

भारत ने हमेशा यही नीति रखी है कि वह किसी एक गुट का हिस्सा नहीं है। ईरानी राष्ट्रपति का यह दौरा और उनका यह बयान भारत की उसी स्वतंत्र विदेश नीति को और मजबूत करता है।

साफ है, मसूद पेजेश्कियान सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर रहे थे, वह एक नया नैरेटिव गढ़ रहे थे - जिसमें दुश्मन पड़ोसी नहीं, बल्कि बाहर की ताकतें हैं। अब देखना यह है कि UAE, सऊदी अरब और अमेरिका इस सीधे संदेश का क्या जवाब देते हैं।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 13,2026 

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September 13, 2026

रेगिस्तान से उठा धुआं, बगदाद में मिला सुराग: सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन हमले का लॉन्च पैड बरामद, क्या अब बेनकाब होगा पूरा प्रॉक्सी नेटवर्क?

रेगिस्तान से उठा धुआं, बगदाद में मिला सुराग: सऊदी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन हमले का लॉन्च पैड बरामद, क्या अब बेनकाब होगा पूरा प्रॉक्सी नेटवर्क?
-Friday World September 14,2026 
सऊदी अरब की जीवनरेखा कही जाने वाली ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले ने एक बार फिर पूरे मध्य-पूर्व को हिला दिया है। लेकिन इस बार कहानी में एक बड़ा मोड़ आया है। इराकी सुरक्षा बलों ने दावा किया है कि उन्होंने उस लॉन्च पैड और तकनीकी उपकरणों को खोज निकाला है, जहां से इन ड्रोन्स को उड़ाया गया था। यह खोज सिर्फ एक हमले की जांच नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में चल रहे छाया युद्ध के नेटवर्क को उजागर करने की दिशा में सबसे बड़ा कदम मानी जा रही है।

इंटेलिजेंस से मिली लीड, रेगिस्तान में मिला अड्डा

इराक के सिक्योरिटी मीडिया सेल के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल साद मान के अनुसार, यह सफलता रातों-रात नहीं मिली। खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की एक जॉइंट टास्क फोर्स महीनों से इलेक्ट्रॉनिक इंटरसेप्ट, सैटेलाइट इमेजरी और ह्यूमन इंटेलिजेंस पर काम कर रही थी।

सटीक सूचना मिलने के बाद टीम ने दक्षिणी इराक के सुनसान इलाके में एक संदिग्ध जगह को ट्रैक किया। मौके पर पहुंचने पर उन्हें मोबाइल ड्रोन लॉन्चिंग सिस्टम, बैटरी पैक, जीपीएस मॉड्यूल, सर्किट और कुछ अधजले ड्रोन के मलबे मिले। इन सभी को कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए बगदाद भेज दिया गया है।

हालांकि इराकी अधिकारियों ने अभी यह खुलासा नहीं किया है कि मौके से किसी को गिरफ्तार किया गया है या इसके पीछे कौन सा संगठन है, लेकिन जांच का दायरा तेजी से बढ़ा दिया गया है।

क्यों इतनी महत्वपूर्ण है यह पाइपलाइन?

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जिसे पेट्रोलाइन भी कहा जाता है, सिर्फ एक पाइप नहीं, बल्कि सऊदी की आर्थिक संप्रभुता की धमनी है। यह 1200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन पूर्वी प्रांत के अबकैक ऑयल फील्ड से पश्चिमी तट पर यान्बू बंदरगाह तक रोजाना 50 लाख बैरल तेल ले जाने की क्षमता रखती है।

इसका सबसे बड़ा सामरिक महत्व यह है कि यह होर्मुज जलडमरूमध्य को बायपास करती है। ईरान जब-जब होर्मुज बंद करने की धमकी देता है, तब यही पाइपलाइन दुनिया के तेल बाजार को स्थिर रखती है। इसलिए इस पर हमला सीधे-सीधे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई, तेल की कीमतों और सऊदी की सुरक्षा पर हमला है।

बगदाद-रियाद में सीधी हॉटलाइन, भरोसा बहाली की कोशिश

इराक ने इस मामले को बेहद संवेदनशीलता से लिया है। जनरल साद मान ने साफ कहा कि यह जानकारी रियाद के साथ रियल-टाइम में साझा की जा रही है। इराकी और सऊदी सुरक्षा एजेंसियां लगातार संपर्क में हैं।

इसके दो मायने हैं। पहला, इराक यह दिखाना चाहता है कि वह एक जिम्मेदार पड़ोसी है और अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं होने देगा। दूसरा, सऊदी अरब को भी यह भरोसा दिलाना कि हमला भले ही इराक की जमीन से हुआ हो, लेकिन बगदाद सरकार इसमें शामिल नहीं है।

इराक ने अपनी नई सुरक्षा नीति को 'प्रिवेंटिव सॉवरेनिटी' का नाम दिया है। इसका अर्थ है, सिर्फ अपनी सीमा के अंदर हमले रोकना ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना कि इराक की धरती किसी और देश पर हमले का लॉन्च पैड न बने। इराक स्पष्ट कह रहा है कि वह किसी भी प्रॉक्सी वॉर का अखाड़ा नहीं बनना चाहता।

असली सवाल: पर्दे के पीछे कौन?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस लॉन्च पैड का संचालन कौन कर रहा था? मध्य-पूर्व में कई ऐसे सशस्त्र गुट सक्रिय हैं जिनके पास ईरान निर्मित ड्रोन तकनीक है और जो सऊदी हितों को निशाना बनाते रहे हैं। 

बरामद उपकरणों से तीन बातें साफ होंगी:
1. ड्रोन की रेंज और तकनीक: क्या ये लंबी दूरी के कामिकाजे ड्रोन थे?
2. कमांड एंड कंट्रोल: इनका सिग्नल कहां से ऑपरेट हो रहा था?
3. फंडिंग और नेटवर्क: इस पूरे ऑपरेशन के पीछे लॉजिस्टिक्स किसने दी?

अगर फोरेंसिक जांच से सिम कार्ड, हार्ड डिस्क या जीपीएस लॉग मिलते हैं, तो पूरे नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं।

वैश्विक बाजार पर असर और आगे की राह

इस हमले के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता देखी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इराक इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने में सफल होता है, तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के लिए एक मिसाल बनेगा।

इराक के लिए यह अपनी संप्रभुता साबित करने का मौका है, और सऊदी के लिए यह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने का अलार्म है। आने वाले कुछ हफ्ते तय करेंगे कि यह जांच सिर्फ एक लॉन्च पैड तक सीमित रहती है या उस अंधेरे नेटवर्क तक पहुंचती है जो पूरे मध्य-पूर्व में ड्रोन युद्ध का खेल खेल रहा है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 14,2026 

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September 13, 2026

IRGC में 40 साल का करियर, मनोवैज्ञानिक युद्ध का मास्टरमाइंड - कौन थे जनरल अली मोहम्मद नैनी जिनकी इजरायली हमले में हुई शहादत से हिला ईरान?

IRGC में 40 साल का करियर, मनोवैज्ञानिक युद्ध का मास्टरमाइंड - कौन थे जनरल अली मोहम्मद नैनी जिनकी इजरायली हमले में हुई शहादत से हिला ईरान?
-Friday World September 13,2026 
तेहरान से बड़ी खबर - ईरान की बुलंद आवाज खामोश

इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रही भीषण जंग के बीच ईरान को एक बड़ा झटका लगा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने शुक्रवार को आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उनके आधिकारिक प्रवक्ता *सेकंड ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नायानी इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हवाई हमले में शहीद हो गए हैं।

IRGC के बयान में कहा गया है - "जनरल नैनी आज सुबह अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक आपराधिक, कायरतापूर्ण और आतंकवादी हमले में शहीद हुए।" यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच 12 दिनों से लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले चल रहे हैं।
            कौन थे जनरल अली मोहम्मद नायानी?

अगर ईरान की सेना का कोई चेहरा था जो दुनिया के सामने सबसे ज्यादा आता था, तो वह अली मोहम्मद नैनी ही थे।

- पद: उनके पास IRGC में सेकंड ब्रिगेडियर जनरल का रैंक था।
- प्रवक्ता कब बने: साल 2024 में उन्होंने ब्रिगेडियर जनरल रमजान शरीफ की जगह ली थी। उन्हें खुद IRGC के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल हुसैन सलामी ने इस अहम पद पर नियुक्त किया था। - 
- विशेषज्ञता: जनरल नैनी सिर्फ एक सैन्य अधिकारी नहीं थे। उन्हें IRGC के 

मनोवैज्ञानिक अभियानों (Psychological Operations), सॉफ्ट पावर और कॉग्निटिव वॉरफेयर का सबसे बड़ा एक्सपर्ट माना जाता था। यानी दुश्मन के दिमाग पर असर डालने वाली जंग का पूरा प्लान वही बनाते थे। यही वजह थी कि ईरानी मीडिया में उन्हें "ईरान की बुलंद आवाज" कहा जाता था।

40 साल का शानदार सैन्य करियर - जंग के मैदान से प्रवक्ता तक

जनरल नैनी का करियर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था।

सेना में उन्हें 40 साल का लंबा अनुभव था। उन्होंने 1980 के दशक में हुए खूनी ईरान-इराक युद्ध में भी हिस्सा लिया था, जहाँ से उनकी पहचान एक बहादुर सिपाही के तौर पर बनी।

अपने 40 साल के करियर में उन्होंने कई बड़े पदों पर काम किया:
1. IRGC के सांस्कृतिक विभाग के उप-प्रमुख
2. बसीज (ईरान की अर्धसैनिक स्वयंसेवी सेना) के सांस्कृतिक और सामाजिक मामलों के उप-प्रमुख
3. IRGC के थिंक टैंक और मीडिया रणनीति के प्रमुख

2024 में जब ईरान ने इजरायल पर "ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस" के तहत सैकड़ों मिसाइलें दागी थीं, तब ब्रिटेन ने जिन चुनिंदा वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे, उनमें जनरल नैनी का नाम सबसे ऊपर था। ब्रिटेन का मानना था कि नैनी ही ईरान के प्रोपेगेंडा वार को लीड कर रहे हैं।

आखिरी 24 घंटे - फारस की खाड़ी में अमेरिका को चुनौती

जनरल नैनी की शहादत से ठीक एक दिन पहले ही उन्होंने ईरानी सरकारी टेलीविजन पर एक जोशीला संदेश दिया था। उन्होंने सीधे फारस की खाड़ी में तैनात 

अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े को चुनौती दी थी और कहा था कि ईरान की नौसेना किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है।

युद्ध के दौरान उनके कई बयान चर्चा में रहे:
- 28 फरवरी को उन्होंने कहा था - "जिस दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, हम उसी दिन से इस स्थिति के लिए तैयार हैं।"
- उन्होंने दावा किया था - "12 दिन के इस युद्ध ने साबित कर दिया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पूरी तरह विफल है। हमारी सेनाएं ही युद्ध का परिणाम तय करती हैं।"
- मिसाइल प्रोडक्शन पर उन्होंने कहा था - "इस जंग का हमारे मिसाइल उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है। तेहरान के पास ऐसे हथियार हैं जो 12 दिन की जंग के बाद ही तैयार किए गए हैं।"

उनके इन बयानों ने ईरान के भीतर लोगों में जोश भरने का काम किया था।

ईरान के लिए कितना बड़ा नुकसान?

विश्लेषकों का मानना है कि जनरल नैनी की मौत IRGC के लिए एक सामरिक और मनोवैज्ञानिक दोनों तरह का नुकसान है। वह सिर्फ एक प्रवक्ता नहीं, बल्कि IRGC की पूरी नैरेटिव वॉर के आर्किटेक्ट थे। अब ईरान को जल्द ही नया चेहरा सामने लाना होगा जो दुनिया के सामने उसी बुलंदी से ईरान का पक्ष रख सके।

उनकी शहादत के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई के करीबी हलकों में शोक का माहौल है और बदले की बात कही जा रही है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 13,2026 

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September 13, 2026

हॉर्मुज पर ईरान की दोहरी चाल! ओमान से डील पक्की, फिर भी पूरी तरह नहीं खुलेगा दुनिया का सबसे अहम तेल-रूट, अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्त

हॉर्मुज पर ईरान की दोहरी चाल! ओमान से डील पक्की, फिर भी पूरी तरह नहीं खुलेगा दुनिया का सबसे अहम तेल-रूट, अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्त
-Friday World September 13,2026 
      ईरान ने फिर बढ़ाया दुनिया का टेंशन!

दुनिया की एनर्जी लाइफलाइन कही जाने वाली होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर ईरान ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जिसने अमेरिका से लेकर भारत तक सभी देशों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरानी मीडिया में दिए अपने ताजा बयान में कहा है कि ईरान इस वक्त अपने पड़ोसी देश ओमान के साथ एक नए समुद्री मार्ग (New Maritime Route) को लेकर बातचीत कर रहा है। लेकिन इस डील का मतलब ये नहीं है कि होर्मुज पूरी तरह से खुल जाएगा।

ईरान के इस बयान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज को एक बड़े कूटनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है।

ओमान के साथ क्या है नई डील?

अराघची के मुताबिक, ओमान के मस्कट में जल्द ही एक अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा होर्मुज स्ट्रेट से होकर एक नए समुद्री रूट की स्थापना करना है।

ईरान का कहना है कि इस नए रूट से जुड़े नक्शे, एंट्री-एग्जिट पॉइंट और करार की पूरी डिटेल्स बैठक में शामिल होने वाले देशों के साथ शेयर की जाएंगी। रविवार को ही खबर आई थी कि ईरान और ओमान के बीच इस नए एंट्री-एग्जिट रूट को लेकर सैद्धांतिक सहमति बन गई है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग रूट है। यह महज 33 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और 25% LNG यहीं से गुजरता है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला यह रास्ता अगर बंद होता है तो दुनिया में तेल के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकते हैं।

फिर भी पूरा नहीं खुलेगा होर्मुज - ईरान ने क्यों कहा ऐसा?

यहाँ पर ईरान ने सबसे बड़ा ट्विस्ट दिया। अराघची ने दो-टूक कहा - "ओमान के साथ हमारा यह करार किसी भी हालत में इस बात का संकेत नहीं है कि हम होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोल रहे हैं।"

यानी ईरान ने ओमान को तो एक वैकल्पिक रास्ता दे दिया, लेकिन पूरी दुनिया के लिए होर्मुज को अभी भी बंधक बना कर रखा है। यह ईरान की दबाव बनाने की पुरानी रणनीति है - बातचीत का रास्ता दिखाओ, लेकिन पूरा दरवाजा मत खोलो।

अमेरिका के सामने रखी इस्लामाबाद MoU की शर्त

होर्मुज को पूरी तरह खोलने के लिए ईरान ने अमेरिका के सामने एक कड़ी शर्त रख दी है। अराघची ने कहा कि ईरान तभी होर्मुज को सामान्य करेगा जब अमेरिका इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (Islamabad MoU) के तहत अपनी जिम्मेदारियों पर वापस लौटेगा।

यह Islamabad MoU दरअसल क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु प्रतिबंधों से जुड़ा एक अनौपचारिक समझौता है, जिसके तहत अमेरिका पर कुछ प्रतिबंधों में ढील देने का दबाव है। ईरान का सीधा संदेश है - "जब तक आप अपना वादा पूरा नहीं करोगे, हम अपना रास्ता नहीं खोलेंगे।"

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अमेरिका पर सीधा दबाव बनाकर प्रतिबंधों में राहत चाहता है।

समंदर में अभी भी तनाव, हमले और एक मौत

जमीनी कूटनीति के बीच समंदर में हालात अभी भी विस्फोटक हैं। ईरानी अधिकारियों ने खुद माना है कि पिछले कुछ दिनों में होर्मुज के पास तनाव बढ़ा है।

इसी बीच एक ईरानी जहाज पर हमले की भी खबर आई, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह घटना बताती है कि यह इलाका सिर्फ कूटनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि सीधे सैन्य टकराव का भी केंद्र बन चुका है। अमेरिका, ब्रिटेन और ईरान की नौसेनाएं अक्सर यहाँ आमने-सामने आ जाती हैं।

ईरान का क्षेत्रीय सुरक्षा पर बड़ा बयान

अराघची ने क्षेत्रीय सुरक्षा पर ईरान का नजरिया भी साफ किया। उन्होंने कहा, "इस क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता की प्राथमिक जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ इस क्षेत्र के देशों की ही होनी चाहिए, बाहर की ताकतों की नहीं।"

यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका और उसके खाड़ी में मौजूद सैन्य बेसों पर निशाना था। ईरान चाहता है कि अमेरिका खाड़ी से बाहर निकले और सुरक्षा की कमान ईरान, ओमान, सऊदी अरब जैसे देशों के हाथ में रहे।

उन्होंने उम्मीद जताई कि ओमान में होने वाली यह बैठक सिर्फ समुद्री रास्ते तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आगे चलकर क्षेत्रीय हितों से जुड़े दूसरे बड़े मुद्दों पर भी सकारात्मक बातचीत का रास्ता खोलेगी।

दुनिया पर क्या असर पड़ेगा? खासकर भारत पर

भारत अपनी 60% से ज्यादा तेल जरूरत इसी होर्मुज रूट से पूरी करता है। अगर ईरान ने होर्मुज को लंबे समय तक आंशिक रूप से बंद रखा, तो भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, शिपिंग इंश्योरेंस महंगा हो जाएगा और महंगाई बढ़ेगी।

इसलिए ओमान के साथ ईरान की यह डील भले ही छोटी लगे, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। आने वाले हफ्तों में मस्कट में होने वाली बैठक पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

निष्कर्ष: ईरान ने शतरंज की बिसात पर एक सोचा-समझा कदम चला है - एक तरफ ओमान को साथ लेकर दुनिया को दिखा रहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, दूसरी तरफ अमेरिका के सामने शर्त रखकर होर्मुज को अभी भी अपना सबसे बड़ा तुरुप का पत्ता बनाए हुए है।

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 13,2026 

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September 13, 2026

ડેડિયાપાડામાં વીજળી સંગ્રામ! ચૈતર વસાવાના કાર્યકરોએ DGVCL ને આપ્યું 3 દિવસનું અંતિમ અલ્ટીમેટમ, નહીંતર થશે જોવા જેવી

ડેડિયાપાડામાં વીજળી સંગ્રામ! ચૈતર વસાવાના કાર્યકરોએ DGVCL ને આપ્યું 3 દિવસનું અંતિમ અલ્ટીમેટમ, નહીંતર થશે જોવા જેવી
- Friday World September 13,2026 
                   પ્રતિકાત્મક તસ્વીર 

આદિવાસી ખેડૂતોના ખેતર સુધી વીજળી નથી પહોંચતી, અંધારામાં ગામડાં - હવે આરપારની લડાઈના મૂડમાં AAP

ડેડિયાપાડા - નર્મદા જિલ્લાનું ડેડિયાપાડા ફરી એકવાર ચર્ચામાં છે. કારણ છે વીજળી. છેલ્લા ઘણા મહિનાઓથી આદિવાસી વિસ્તારના ખેડૂતો અને ગ્રામજનો વીજળીની અનિયમિતતા, લો વોલ્ટેજ અને વારંવાર વીજ કાપથી ત્રાહિમામ પોકારી ઉઠ્યા છે. હવે આ મુદ્દે આમ આદમી પાર્ટીના ધારાસભ્ય ચૈતર વસાવાના કાર્યકરો મેદાનમાં આવ્યા છે. કાર્યકરોએ દક્ષિણ ગુજરાત વીજ કંપની (DGVCL) ની ડેડિયાપાડા પેટા વિભાગીય કચેરી ખાતે જઈને જોરદાર સૂત્રોચ્ચાર સાથે ત્રણ દિવસનું આખરી અલ્ટીમેટમ આપ્યું છે.

કાર્યકરોની સ્પષ્ટ ચેતવણી છે કે જો ત્રણ દિવસમાં ખેતી માટે દિવસે 8 કલાક પૂરતા દબાણ સાથે વીજળી, બળી ગયેલા ટ્રાન્સફોર્મર બદલવા અને ગામડાઓમાં રાત્રે અંધારું દૂર કરવામાં નહીં આવે, તો ઉગ્ર આંદોલન કરવામાં આવશે અને DGVCL કચેરીનો ઘેરાવ કરી તાળાબંધી કરવામાં આવશે.

શું છે સમગ્ર મામલો?

ડેડિયાપાડા, સાગબારા તાલુકાના 100થી વધુ ગામોમાં ચોમાસાની સિઝનમાં વાવેતર શરૂ થઈ ગયું છે. પણ ખેડૂતોની ફરિયાદ છે કે DGVCL દ્વારા દિવસે માત્ર 2 થી 3 કલાક જ લો વોલ્ટેજ વીજળી આપવામાં આવે છે. જેના કારણે મોટરો બળી રહી છે, પાક સુકાઈ રહ્યો છે. 

બીજી તરફ અનેક ગામોમાં છેલ્લા 15-20 દિવસથી ટ્રાન્સફોર્મર બળી ગયા છે, વારંવાર રજૂઆત છતાં બદલવામાં આવ્યા નથી. રાત્રિના સમયે તો ગામોમાં વીજળી ગુલ થઈ જાય છે, બાળકોના અભ્યાસ પર અસર પડે છે. ગ્રામજનોના કહેવા મુજબ ફોલ્ટ રિપેર કરવા માટે પણ કર્મચારીઓ સમયસર આવતા નથી.

આ બધી ફરિયાદો લઈને મોટી સંખ્યામાં આદિવાસી ખેડૂતો અને ચૈતર વસાવાના કાર્યકરો આજે DGVCL કચેરી પહોંચ્યા હતા. તેમણે આવેદનપત્ર આપીને કહ્યું કે, આદિવાસી વિસ્તારને હંમેશા અન્યાય થાય છે. શહેરોમાં 24 કલાક લાઈટ હોય છે અને અહીં ખેડૂતને પોતાના હકની વીજળી પણ નથી મળતી.

કાર્યકરોની 3 મુખ્ય માંગ

1. ખેતી માટે દિવસ દરમિયાન 8 કલાક સતત અને પૂરા વોલ્ટેજ સાથે થ્રી-ફેઝ વીજળી આપવી.
2. છેલ્લા એક મહિનામાં બળેલા તમામ 35થી વધુ ટ્રાન્સફોર્મર 72 કલાકમાં બદલવા.
3. ગામડાઓમાં રાત્રે વારંવાર થતો વીજ કાપ બંધ કરવો અને ફોલ્ટની ટીમ સક્રિય કરવી.

કાર્યકરોએ જણાવ્યું હતું કે, ધારાસભ્ય ચૈતર વસાવા હાલ કાયદાકીય કારણોસર હાજર નથી, પરંતુ તેમની ગેરહાજરીમાં પણ તેમના વિસ્તારના લોકોના પ્રશ્નો માટે લડત ચાલુ જ રહેશે. અમે ગાંધી ચિંધ્યા માર્ગે રજૂઆત કરી છે, હવે જો નહીં સાંભળે તો ઉગ્ર આંદોલન થશે તે જોવા જેવું રહેશે.

DGVCL નો જવાબ

DGVCL ના અધિકારીએ આવેદન સ્વીકારીને ખાતરી આપી છે કે ઉપરની કક્ષાએ વાત કરીને ટ્રાન્સફોર્મર બદલવાની કામગીરી ઝડપી કરવામાં આવશે. જોકે કાર્યકરો આ માત્ર આશ્વાસન માનવા તૈયાર નથી. તેમણે ત્રણ દિવસની ડેડલાઇન આપી છે.

હવે જોવાનું એ રહે છે કે તંત્ર ત્રણ દિવસમાં જાગે છે કે પછી ડેડિયાપાડામાં ફરી એકવાર મોટું આદિવાસી આંદોલન જોવા મળશે.

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 13,2026 

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September 13, 2026

મેઘરાજાની ધમાકેદાર એન્ટ્રી: 24 કલાકમાં 193 તાલુકા તરબોળ, ઉકાઈમાં 12 ઇંચ વરસાદથી ખેડૂતોના ચહેરા પર ખુશી!

મેઘરાજાની ધમાકેદાર એન્ટ્રી: 24 કલાકમાં 193 તાલુકા તરબોળ, ઉકાઈમાં 12 ઇંચ વરસાદથી ખેડૂતોના ચહેરા પર ખુશી!
-Friday World September 13,2026 
ગુજરાતમાં આખરે મેઘરાજા મન મૂકીને વરસ્યા છે. દુષ્કાળની ચિંતામાં ડૂબેલા ખેડૂતો માટે આ વરસાદ અમૃત સમાન સાબિત થયો છે. હવામાન વિભાગ અને સ્ટેટ ઇમરજન્સી ઓપરેશન સેન્ટર (SEOC) દ્વારા જાહેર કરાયેલા આંકડા મુજબ શનિવાર 12 સપ્ટેમ્બર સવારે 6 વાગ્યાથી રવિવાર 13 સપ્ટેમ્બર સવારે 6 વાગ્યા સુધીના 24 કલાકમાં રાજ્યના 193 તાલુકાઓમાં મેઘમહેર જોવા મળી છે.

દક્ષિણ ગુજરાત બન્યું સૌથી વધુ તરબોળ

આ વખતના વરસાદનું કેન્દ્ર દક્ષિણ ગુજરાત રહ્યું છે. સૌથી વધુ વરસાદ તાપી જિલ્લાના ઉકાઈમાં નોંધાયો છે, જ્યાં 24 કલાકમાં 12 ઇંચ એટલે કે લગભગ 300 મીમી વરસાદ ખાબક્યો છે. ઉકાઈ ડેમના ઉપરવાસમાં ભારે વરસાદને કારણે ડેમની જળ સપાટીમાં ઝડપી વધારો થયો છે.

ઉકાઈ બાદ બીજા ક્રમે સુરતનો ઉમરપાડા તાલુકો રહ્યો, જ્યાં 8.35 ઇંચ વરસાદ નોંધાયો. ત્યારબાદ ડાંગ જિલ્લો મેઘરાજાનો સૌથી પ્રિય રહ્યો છે.
- ડાંગના સુબીરમાં 5.71 ઇંચ
- ડાંગના વધઇમાં 5.67 ઇંચ
- તાપીના સોનગઢમાં 5.51 ઇંચ
- સુરતના ચોર્યાસીમાં 4.41 ઇંચ
- ડાંગ તાલુકામાં 4.37 ઇંચ
- નર્મદાના ડેડિયાપાડામાં 4.25 ઇંચ
- તાપીના ઉચ્છલમાં 3.98 ઇંચ

અન્ય જિલ્લાઓમાં પણ સાર્વત્રિક વરસાદ

દક્ષિણ ગુજરાત ઉપરાંત મધ્ય અને સૌરાષ્ટ્રના કેટલાક ભાગોમાં પણ સારો વરસાદ થયો છે. નર્મદાના નાંદોદમાં 3.46 ઇંચ, ભરૂચના અંકલેશ્વરમાં 3.35 ઇંચ, ભાવનગરના ઘોઘામાં 3.23 ઇંચ, નર્મદાના તિલકવાડામાં 3.19 ઇંચ, ભરૂચ શહેરમાં 2.87 ઇંચ વરસાદ નોંધાયો છે.

સુરત જિલ્લાના ઓલપાડમાં 2.80 ઇંચ, નવસારીના વાંસદામાં 2.80 ઇંચ, હાંસોટમાં 2.76 ઇંચ, સાગબારામાં 2.76 ઇંચ, સુરત શહેરમાં 2.72 ઇંચ, માંગરોળમાં 2.72 ઇંચ અને તાપીના વ્યારામાં 2.64 ઇંચ વરસાદે ખેતરોને નવજીવન આપ્યું છે.

ખેડા, છોટાઉદેપુર, ભાવનગર અને ભરૂચ જિલ્લાના અનેક તાલુકાઓમાં પણ 1 થી 2 ઇંચ સુધીનો વરસાદ નોંધાયો છે.

ખેતી માટે આશીર્વાદ સમાન

આ વરસાદ ખાસ કરીને ખરીફ પાક માટે સંજીવની સમાન છે. લાંબા સમયથી વરસાદ ખેંચાતા ડાંગર, કપાસ, તમાકુ, મગફળી અને તુવેરના પાકને નુકસાનની ભીતિ હતી. પરંતુ આ સાર્વત્રિક વરસાદથી જમીનમાં ભેજનું પ્રમાણ વધ્યું છે અને પાકને નવું જીવન મળ્યું છે. ખેડૂતોએ રાહતનો શ્વાસ લીધો છે.

બીજી તરફ ઉકાઈ, નર્મદા ડેમની જળ સપાટી વધતા પીવાના પાણી અને સિંચાઈની ચિંતા પણ દૂર થઈ છે.

હજુ આગામી 48 કલાક ભારે

હવામાન વિભાગના જણાવ્યા અનુસાર આગામી 48 કલાક દરમિયાન દક્ષિણ ગુજરાત, સૌરાષ્ટ્ર અને કચ્છના કેટલાક ભાગોમાં ભારેથી અતિભારે વરસાદની શક્યતા છે. માછીમારોને દરિયો ન ખેડવા સૂચના અપાઈ છે અને નીચાણવાળા વિસ્તારોમાં તંત્ર એલર્ટ પર છે.

એકંદરે, દુષ્કાળના ડર વચ્ચે આવેલો આ વરસાદ ગુજરાત માટે રાહતનો વરસાદ બનીને આવ્યો છે.

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World September 13,2026 

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September 13, 2026

"हमारी जंग सऊदी अवाम से नहीं, हुक्मरानों की नीतियों से है" - यमनी नेता के बयान से खाड़ी में नए अरब स्प्रिंग (आन्दोलन) का डर।

"हमारी जंग सऊदी अवाम से नहीं, हुक्मरानों की नीतियों से है" - यमनी नेता के बयान से खाड़ी में नए अरब स्प्रिंग (आन्दोलन) का डर।
- Friday World September 13,2026 
यमन के एक बड़े नेता ने सऊदी अरब की जनता को सीधे संबोधित करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यमन की लड़ाई सऊदी अरब के आम लोगों से नहीं है, बल्कि उन नीतियों से है जो एक तरफ विदेशी ताकतों को एयरबेस और सैन्य सुविधाएं देती हैं, और दूसरी तरफ यमन के आम नागरिकों को हज जैसे धार्मिक फर्ज़ से रोकती हैं।

इस बयान के बाद अरब सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है।

 खिताब में क्या कहा गया?

अपने संबोधन में यमनी नेता ने कहा कि यमन और सऊदी अरब दोनों अरब और इस्लामी भाई हैं। उनका आरोप था कि सऊदी हुकूमत ने अपने फैसलों से पवित्र भूमि को आम मुसलमानों के लिए मुश्किल बना दिया है। 

उनके शब्दों में - "हम सऊदी अवाम के खिलाफ नहीं लड़ रहे। हमारी लड़ाई उस निज़ाम से है जो सहयूनियों (ज़ायोनिस्ट ताकतों) को अपना एयरबेस देता है, मगर पड़ोसी यमनी को हज करने की इजाजत नहीं देता।"

उन्होंने आगे यह भी कहा कि वर्तमान सऊदी शासन ने, उनके मुताबिक, सऊदी अरब के मूल चरित्र को बदलने की कोशिश की है। उनके समर्थक इसे "यहूदी अरब" जैसे सख्त शब्दों में कह रहे हैं, जिसका मतलब है कि फैसले इस्लामी हितों के बजाय बाहरी ताकतों के हित में लिए जा रहे हैं। यमनी पक्ष का कहना है कि वे इस पवित्र भूमि को बाहरी प्रभाव से आजाद कराने की जंग लड़ रहे हैं।

 हज का मुद्दा क्यों उठा?

पिछले कुछ सालों से यमन से हज यात्रियों को जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। युद्ध, एयरपोर्ट बंद होने और राजनीतिक प्रतिबंधों के कारण हजारों यमनी हज नहीं कर पाए। यमनी नेताओं का आरोप है कि रियाद जानबूझकर यह रोक लगाता है, जबकि सऊदी सरकार इसे सुरक्षा और लॉजिस्टिक कारण बताती है।

वहीं एयरबेस का मुद्दा भी गरम है। अमेरिका और इजरायल से जुड़े सैन्य सहयोग को लेकर यमन में लगातार यह प्रचार किया जाता रहा है कि सऊदी धरती से यमन पर हमले होते हैं। रियाद हमेशा से इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

सऊदी अवाम की प्रतिक्रिया क्या है?

दिलचस्प बात यह है कि इस बयान को दो तरह से देखा जा रहा है। सऊदी अरब के आम लोग इस जंग से थक चुके हैं। 2015 से चल रही यमन जंग में दोनों तरफ भारी नुकसान हुआ है। सऊदी बॉर्डर शहरों जैसे जिजान और नजरान में रहने वाले लोग शांति चाहते हैं।

यमनी नेता ने इसी भावना को पकड़ा है। सऊदी जनता को दुश्मन न बताकर, सीधे हुक्मरानों को निशाना बनाया है।
 सऊदी अवाम में आले सऊद के शाही परिवार के खिलाफ नाराजगी चरम पर हे हो सकता हे अवाम तख्ता पलटकर रखदे 

हकीकत क्या है?


सऊदी अरब कहता है कि उसने हमेशा हज को राजनीति से अलग रखा है और यमन समेत सभी देशों के हाजियों का स्वागत किया है, लेकिन सुरक्षा सर्वोपरि है।

बहरहाल, इस एक बयान ने फिर से वही पुराना सवाल खड़ा कर दिया है - क्या मक्का और मदीना की सरजमीं पर सियासत हावी हो रही है? क्या हज जैसे इबादत के रास्ते में सियासत रुकावट बन रही है?

आने वाले दिनों में इस बयान पर रियाद की तरफ से क्या जवाब आता है, इस पर पूरे खाड़ी क्षेत्र की नजर रहेगी।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World September 13,2026 

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