नई दिल्ली। वैश्विक मुद्रा बाजार में एक झटका लगने के बाद भारतीय रुपया (INR) एशिया की टॉप 10 मजबूत करेंसी की सूची से बाहर हो गया है। नवीनतम रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवंबर 2025 तक रुपया भूटान की करेंसी नगुल्ट्रम (BTN) के बराबर पहुंच चुका है, जो लंबे समय से 1:1 की फिक्स्ड रेट पर बंधा हुआ है। यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि इससे आयात महंगा हो रहा है और विदेशी निवेश पर असर पड़ रहा है।
एक्सचेंज रेट्स के अनुसार, 1 USD के मुकाबले INR अब 85-88 के दायरे में घूम रहा है, जबकि नगुल्ट्रम भी ठीक इसी स्तर पर स्थिर है। एशिया की टॉप 10 मजबूत करेंसी में कुवैती दीनार, बहरीनी दीनार, ओमानी रियाल, जॉर्डनियन दीनार, यूएई दिरहम, सऊदी रियाल, फिलिपींस पेसो, सिंगापुर डॉलर, मलेशियन रिंगिट और थाई बाह्त जैसी मुद्राएं शामिल हैं। इनकी तुलना में INR की वैल्यू में 2025 में लगभग 5-7% की गिरावट आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती न होने, भारत-चीन व्यापार तनाव और घरेलू मुद्रास्फीति बढ़ने से रुपया कमजोर हुआ। भूटान की नगुल्ट्रम, जो INR से पेग्ड है, को एशिया की मजबूत करेंसी सूचियों में कभी शामिल नहीं किया जाता, लेकिन अब INR भी उसी स्तर पर आ गया है। इससे भारत के निर्यात पर तो फायदा हो सकता है, लेकिन तेल आयात और विदेशी कर्ज चुकाने का बोझ बढ़ेगा।
आरबीआई गवर्नर ने चेतावनी दी है कि अगर वैश्विक अनिश्चितताएं बनी रहीं, तो 2026 में INR 90 के पार जा सकता है। सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सुधारों की रफ्तार तेज करनी होगी। निवेशकों को सलाह है कि डॉलर-आधारित एसेट्स पर नजर रखें।
क्या यह गिरावट अस्थायी है या लंबे संकट का संकेत? आने वाले महीनों में वैश्विक बाजार की नजर भारत पर टिकी है।
✒️सज्जाद अली नायाणी