सज्जाद अली नायाणी✍🏼फ्राइडे वर्ल्ड 28/12/2025
तेहरान ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का दम दिखाया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची ने अल-जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया कि जून 2025 में इज़राइल के साथ हुए 12-दिवसीय युद्ध ने ईरान को अमूल्य अनुभव दिया। इस दौरान ईरान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइलों का **वास्तविक युद्ध** में सफल परीक्षण किया।
अराक़ची ने कहा, "हमने ज़ायोनी शासन के 12-दिवसीय हमले से बहुत कुछ सीखा। हमने अपनी मिसाइलों को असली लड़ाई में आजमाया, उनकी सटीकता, प्रवेश क्षमता और प्रभाव को परखा। अब हम पहले से कहीं ज्यादा तैयार हैं। अगर इज़राइल दोबारा कोई आक्रामक कदम उठाता है, तो उसे गंभीर और अपूरणीय नुकसान उठाना पड़ेगा।"
यह युद्ध जून 2025 में शुरू हुआ, जब इज़राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों और कमांडरों पर आश्चर्यजनक हमले किए। अमेरिका ने भी इसमें हिस्सा लिया और ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्रों पर बमबारी की। ईरान ने जवाब में सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे इज़राइल की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम की कमजोरियां उजागर हुईं। ईरान के अनुसार, उसकी मिसाइलें इज़राइल के आकाश में घुसीं और कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निशाना बनाया।
अराक़ची ने जोर देकर कहा कि इज़राइल ने ईरान के तेल संस्थानों को निशाना बनाकर युद्ध को क्षेत्रीय स्तर पर फैलाने की कोशिश की, लेकिन ईरान ने इसे कुशलतापूर्वक संभाला और क्षेत्रीय विस्तार को रोका। उन्होंने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को "युद्ध अपराधी" करार दिया और कहा कि अमेरिका की हरी झंडी के बिना इज़राइल ऐसा युद्ध शुरू नहीं कर सकता था।
मिसाइल कार्यक्रम पर अराक़ची साफ बोले: "हम अपने मिसाइल कार्यक्रम पर किसी से बात नहीं करेंगे। कोई भी समझदार देश अपने हथियार छोड़ने को तैयार नहीं होता। जो चीज युद्ध से नहीं छीनी जा सकती, उसे राजनीति से भी नहीं लिया जा सकता।" उन्होंने यूरेनियम संवर्धन को रोकने की मांग को असंभव बताया और कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है।
परमाणु वार्ता पर ईरान का रुख स्पष्ट है – तेहरान प्रत्यक्ष बातचीत में दिलचस्पी नहीं रखता, लेकिन अप्रत्यक्ष माध्यम से समझौता संभव है। अराक़ची ने यूरोपीय देशों द्वारा स्नैपबैक मैकेनिज्म को सक्रिय करने को "अवैध" बताया और कहा कि ईरान पर प्रतिबंधों के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय सहमति नहीं है।
अंत में विदेश मंत्री ने पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करने को प्राथमिकता बताई और कहा, "हम पश्चिम के साथ बिना किसी शर्त या दबाव के संवाद के लिए तैयार हैं।"
यह बयान ईरान की बढ़ती आत्मविश्वास को दर्शाता है। 12-दिवसीय युद्ध के बाद तेहरान ने अपनी कमजोरियों को दूर किया, मिसाइल उत्पादन बढ़ाया और क्षेत्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की। अब सवाल यह है – क्या मध्य पूर्व में शांति संभव है, या नई जंग का खतरा मंडरा रहा है?
सज्जाद अली नायाणी✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 28/12/2025