सज्जाद अली नायिणी✍🏼फ्राइडे वर्ल्ड 27/12/2025
जून 2025 में इज़राइल द्वारा शुरू किया गया
12-दिवसीय युद्ध (13 से 24 जून तक) सामरिक स्तर पर इज़राइल के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुआ, लेकिन रणनीतिक रूप से यह ईरान को कमजोर करने में पूरी तरह असफल रहा। मिडल ईस्ट काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स (MECGA) ने 30 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित अपने विश्लेषण में स्पष्ट किया कि इस युद्ध ने ईरान की राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया, जबकि क्षेत्रीय तनावों को और गहरा कर दिया।
→ इज़राइल के मुख्य रणनीतिक लक्ष्य इज़राइल का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को स्थायी रूप से नष्ट करना, सरकार का पतन करवाना और परमाणु/मिसाइल कार्यक्रम को अपूरणीय क्षति पहुंचाना था। इसके लिए लक्षित हत्याएं (सैन्य कमांडर, परमाणु वैज्ञानिक), बुनियादी ढांचे (विद्युत संयंत्र, अस्पताल, मीडिया) पर हमले और साइबर/मनोवैज्ञानिक दबाव का सहारा लिया गया।
→ पहला मार्ग: आंतरिक पतन की उम्मीद** इज़राइल ने लाखों नागरिकों को विस्थापित करने के आदेश और वेतन प्रणाली पर साइबर हमलों से जन-विद्रोह की आशा की। लेकिन परिणाम उल्टा निकला
→ ईरानी जनता बिखरी नहीं, बल्कि अभूतपूर्व एकजुट हुई। हमलों ने राष्ट्रीय प्रतिरोध को और मजबूत किया।
→ दूसरा मार्ग: अमेरिका को सीधे युद्ध में खींचना** इज़राइल ने अपनी खुफिया और हवाई श्रेष्ठता दिखाकर अमेरिका को सक्रिय भूमिका में धकेला। 22 जून को अमेरिका ने ईरान की प्रमुख परमाणु स्थापनाओं (नतांज, फोर्डो, इस्फहान) पर बंकर-बस्टर हमले किए। यह सामरिक जीत थी, लेकिन ईरान का रणनीतिक पतन नहीं हुआ।
→ सामरिक सफलता बनाम रणनीतिक असफलता - इज़राइल ने अभूतपूर्व घुसपैठ, कमांडरों की हत्या और इन्फ्रास्ट्रक्चर विनाश हासिल किया। - अमेरिका पहली बार ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला करने में शामिल हुआ। फिर भी ईरान ध्वस्त नहीं हुआ बल्कि मजबूत हुआ।
→ राष्ट्रीय एकता का जन्म इज़राइल की सबसे बड़ी भूल ईरानी जनता की प्रतिक्रिया का गलत आकलन था। हमलों ने आंतरिक असंतोष को दबाकर राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दिया। ईरान के सटीक मिसाइल हमलों ने इज़राइल की रक्षा प्रणाली को चुनौती दी।
→ सुरक्षा की नई परिभाषा युद्ध ने ईरानियों में राष्ट्रीय रक्षा को ठोस आवश्यकता बना दिया। वायु रक्षा, वायुसेना आधुनिकीकरण और मिसाइल कार्यक्रम के लिए जनसमर्थन बढ़ा। इज़राइल-अमेरिका को अब आम ईरानी भी वास्तविक खतरे के रूप में देखते हैं।
→ परमाणु अस्पष्टता का अनचाहा परिणाम युद्ध ने ईरान को "घोषित न किए गए परमाणु-सशस्त्र" स्थिति के करीब पहुंचा दिया। IAEA के साथ सहयोग कम हुआ, संवर्धित यूरेनियम भंडार बढ़ा। यह इज़राइल जैसी स्थिति है, लेकिन बिना राजनयिक लागतों के। (ईरान आधिकारिक रूप से परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता है, और IAEA रिपोर्ट्स भी सैन्य दिशा की पुष्टि नहीं करतीं।)
→ निष्कर्ष** मिडल ईस्ट काउंसिल चेतावनी देती है: इज़राइल ने ईरान को गलत समझा। यदि ऐसी गलतियां दोहराई गईं, तो गंभीर रणनीतिक नुकसान हो सकता है। सामरिक जीत के बावजूद युद्ध ने ईरान के लक्ष्यों को हासिल नहीं किया
→ उल्टे राष्ट्रीय एकता और परमाणु अस्पष्टता दोनों मजबूत हुईं। यह युद्ध क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरे की घंटी है।
सज्जाद अली नायिणी✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 27/12/2025