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Friday, 12 December 2025

बाबरी का भूत बंगाल में: हुमायूं कबीर बनेंगे भाजपा का 'सेंध सेतु' 2026 चुनाव से पहले– मंदिर-मस्जिद पर सत्ता की जंग

बाबरी का भूत बंगाल में: हुमायूं कबीर बनेंगे भाजपा का 'सेंध सेतु' 2026 चुनाव से पहले – मंदिर-मस्जिद पर सत्ता की जंग
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया तूफान खड़ा हो गया है। निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर 2025 को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में 'बाबरी मस्जिद' की नींव रखी – ठीक उसी दिन जब 1992 में अयोध्या में बाबरी  गिराया गया था। यह सिर्फ एक मस्जिद नहीं, बल्कि चुनावी ध्रुवीकरण की नई स्क्रिप्ट लगती है।
 कबीर खुद को 'बंगाल का ओवैसी' बता रहे हैं और 22 दिसंबर को नई पार्टी लॉन्च करने का ऐलान कर चुके हैं। वे 135 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारने और 2026 विधानसभा चुनाव में 'किंगमेकर' बनने का दावा कर रहे हैं।

 सवाल यह है: क्या हुमायूं कबीर दक्षिण से उत्तर बंगाल में पैर पसारने की भाजपा की राह आसान बना रहे हैं? या मुस्लिम वोटों में सेंध लगाकर ममता बनर्जी की सत्ता को चुनौती देंगे? 
भाजपा इसे 'ममता की तुष्टिकरण नीति' का नतीजा बता रही है, जबकि टीएमसी कहती है कि कबीर भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं।

 हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफर खुद रहस्यमयी है। कांग्रेस से शुरूआत, फिर टीएमसी, 2018-2021 तक भाजपा में रहे (2019 लोकसभा चुनाव भाजपा टिकट पर लड़े), फिर वापस टीएमसी। अब निलंबन के बाद नई पार्टी। 
'बाबरी मस्जिद' प्रोजेक्ट के लिए 5 करोड़ से ज्यादा चंदा इकट्ठा हो चुका है, विदेशों से भी ऑफर आ रहे हैं। कार्यक्रम में हजारों की भीड़, ईंटें सिर पर लेकर मार्च – यह सब मुस्लिम वोटों को एकजुट करने की कोशिश लगती है। लेकिन भाजपा इसे 'बाबर की सोच' बता रही है 
 2026 चुनाव में बंगाल में मुस्लिम वोट (लगभग 35%) निर्णायक हैं। अगर कबीर मुस्लिम वोट काटते हैं, तो हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में हो सकता है। ममता पर दबाव बढ़ रहा है – एक तरफ तुष्टिकरण का आरोप, दूसरी तरफ अपना कोर वोटर नाराज। भाजपा इसे मौका मान रही है: 'जंगलराज' खत्म करने का वादा, हिंदुत्व कार्ड और बंगाली अस्मिता पर फोकस। 

बाबरी का भूत फिर उठ रहा है, लेकिन इस बार बंगाल में। स्वास्थ्य, बेरोजगारी जैसे मुद्दे गौण हो गए हैं – चुनाव मंदिर-मस्जिद पर लड़े जाएंगे। कबीर सेंध लगाएंगे या खुद फंस जाएंगे? 2026 बताएगा, लेकिन अभी बंगाल की हवा में ध्रुवीकरण की गंध साफ है। जनता की जेब और भविष्य दांव पर हैं – सत्ता की यह जंग किसकी होगी?
सज्जाद अली नायाणी ✍