नई दिल्ली, 10 दिसंबर 2025। लंबे समय से अटकी भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है। दोनों देशों के बीच सकारात्मक संकेतों के बाद एक बड़ा कदम उठाया गया है। अमेरिकी उप-व्यापार प्रतिनिधि (डीयूएसटीआर) रिक स्विट्जर के नेतृत्व में अमेरिकी टीम भारत पहुंच चुकी है। यह 3 दिवसीय बैठक 10 दिसंबर से शुरू होकर 12 दिसंबर तक चलेगी। इसमें ट्रेड डील के पहले चरण को अंतिम रूप देने के साथ-साथ रूस से तेल खरीद पर लगे 50% टैरिफ में संभावित कटौती पर भी चर्चा होगी। क्या यह बैठक डील को हरी झंडी देगी? आइए जानते हैं पूरी कहानी।
ट्रेड डील की राह में क्या बाधाएं थीं? भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में लगभग 191 अरब डॉलर का है। दोनों देश 2030 तक इसे 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं। लेकिन अगस्त 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से कच्चे तेल खरीद को लेकर भारत पर 25% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया, जिसे बाद में दोगुना कर 50% कर दिया गया। इससे भारतीय निर्यात प्रभावित हुआ। अक्टूबर 2025 में अमेरिका को भारत का निर्यात 8.58% गिरकर 6.3 अरब डॉलर रह गया। सितंबर 2025 में अमेरिकी अधिकारियों का पहला दौरा हुआ, जिसके बाद बातचीत पटरी पर लौटी। अब यह दूसरा दौरा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा, "हम इस साल फ्रेमवर्क ट्रेड एग्रीमेंट पर पहुंचने की उम्मीद कर रहे हैं, जो भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत देगा।" अमेरिकी पक्ष ने भी कृषि उत्पादों पर आयात बढ़ाने की मांग की है, लेकिन भारत ने डेयरी और कृषि क्षेत्र में छूट देने से इनकार कर दिया है।
3 दिवसीय बैठक: क्या होगा एजेंडा? बैठक का नेतृत्व रिक स्विट्जर करेंगे। पहले दिन (10 दिसंबर) वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अमेरिकी टीम से विचार-विमर्श किया। दूसरे दिन (11 दिसंबर) मुख्य वार्ता होगी, जिसमें संयुक्त सचिव दर्पण जैन भारतीय पक्ष का नेतृत्व करेंगे। तीसरे दिन (12 दिसंबर) अंतिम निष्कर्ष निकाले जाएंगे। मुख्य मुद्दे: -
टैरिफ में कटौती: ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का अनुमान है कि 50% टैरिफ 20% तक घट सकता है। इससे भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा। -
कृषि और औद्योगिक उत्पाद: अमेरिका मांस और कृषि उत्पादों पर छूट चाहता है, जबकि भारत औद्योगिक वस्तुओं पर लाभ की मांग कर रहा है। -
रूस तेल विवाद: भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर लगे दंड को हल करना प्राथमिकता। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, "अमेरिका के साथ बातचीत लगातार आगे बढ़ रही है। हम द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में प्रगति कर रहे हैं।" ट्रंप ने नवंबर में कहा था, "पीएम मोदी के साथ चर्चा अच्छी चल रही है, जल्द ही अच्छी डील होगी।"
सकारात्मक संकेत और उम्मीदें पिछले 6 दौर की वार्ता के बाद ज्यादातर मुद्दे सुलझ चुके हैं। फरवरी 2025 में दोनों नेताओं ने पहले चरण को 2025 के पतझड़ तक पूरा करने का लक्ष्य रखा था। अब स्रोतों का कहना है कि बाकी मुद्दे राजनीतिक स्तर पर हल हो सकते हैं।
अमेरिकी यूएसटीआर जेमिसन ग्रीर ने कहा, "भारत ने कृषि आयात पर प्रतिरोध किया, लेकिन नवीनतम दौर में काफी आगे बढ़ा है।"
यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो कुल माल निर्यात का 18% हिस्सा रखता है। यदि डील हो गई, तो 2025 के अंत तक निर्यात में उछाल आएगा।
नई शुरुआत की ओर यह बैठक न सिर्फ ट्रेड डील को अंतिम रूप देगी, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती भी प्रदान करेगी। रूस के साथ 'प्रैक्टिस मैच' (तेल खरीद) के बाद अब अमेरिका के साथ 'मुख्य मैच' खेलने का समय है।
यदि सब ठीक रहा, तो 2025 का अंत भारत के लिए व्यापारिक जीत के साथ होगा। क्या डील पर मुहर लगेगी? आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा।
सज्जाद अली नायानी ✍️