गाज़ा से फ़िलिस्तीनियों को हमेशा के लिए बाहर निकालने की आड़ में इज़राइल ने संघर्षविराम समझौते की नई व्याख्या पेश कर दी है। अरब देश भड़के, मिस्र ने हाथ खींच लिए।
यरुशलम/काहिरा: इज़राइल ने बुधवार को चौंकाने वाली घोषणा की कि रफ़ह सीमा शीघ्र ही खोली जाएगी, लेकिन सिर्फ़ एक दिशा में – गाज़ा के फ़िलिस्तीनियों को मिस्र की ओर निकलने के लिए। वापस लौटने की कोई गारंटी नहीं। इज़राइली अधिकारियों का दावा है कि यह कदम जनवरी 2025 में हुए संघर्षविराम समझौते के “छुपे प्रावधानों” के अनुरूप है।
इस घोषणा से पूरे अरब जगत में आक्रोश फैल गया। मिस्र ने तुरंत स्पष्ट किया कि उसने इज़राइल के साथ इस तरह के किसी एकतरफा कदम पर कोई समन्वय नहीं किया।
काहिरा का कहना है कि रफ़ह क्रॉसिंग का इस्तेमाल केवल मानवीय सहायता और घायलों के इलाज के लिए ही हो सकता है, न कि सामूहिक विस्थापन के लिए।
शुक्रवार को आठ अरब-इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने संयुक्त बयान जारी कर इज़राइल की योजना को “फ़िलिस्तीनियों का जबरन निष्कासन” करार दिया। बयान पर हस्ताक्षर करने वाले देश हैं – संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब, क़तर, तुर्की, पाकिस्तान और इंडोनेशिया।
मंत्रियों ने चेतावनी दी कि गाज़ावासियों को उनकी ज़मीन से हमेशा के लिए बेदखल करने की कोई भी कोशिश क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ख़तरनाक होगी और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का खुला उल्लंघन है।
गाज़ा में रहने वाले लाखों फ़िलिस्तीनी पहले ही 14 महीने के युद्ध से विस्थापित हो चुके हैं। रफिलिस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि इज़राइल जानबूझकर रफ़ह को “एक्ज़िट-only” बनाकर 1948 की नक़्बा को दोहराने की फिराक में है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इंतज़ार कर रहा है कि क्या इज़राइल अपनी इस एकतरफा व्याख्या पर आगे बढ़ता है या भारी दबाव में पीछे हटता है।
सज्जाद अली नायाणी✍️