सिडनी के प्रसिद्ध बॉन्डी बीच पर 14 दिसंबर 2025 को हनुक्का उत्सव के दौरान हुए भयावह आतंकी हमले ने पूरे ऑस्ट्रेलिया को झकझोर कर रख दिया। इस हमले में कम से कम 15 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। हमलावर एक पिता-पुत्र की जोड़ी थी, जिन्होंने यहूदी समुदाय को निशाना बनाया। लेकिन इस दुखद घटना में एक चमकती किरण बनी 43 वर्षीय अहमद अल-अहमद की बहादुरी, जो एक मुस्लिम फल विक्रेता हैं और इस हमले के दौरान निहत्थे होकर एक हमलावर से राइफल छीनकर कई जानें बचाईं।
हमले की भयावहता और त्वरित प्रतिक्रिया हनुक्का के पहले दिन आयोजित 'चानुका बाय द सी' उत्सव में हजारों लोग जमा थे। अचानक दो हमलावरों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिससे अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने इसे आतंकी घटना घोषित किया। वीडियो फुटेज में दिखा कि अहमद अल-अहमद ने कार के पीछे से निकलकर हमलावर पर झपट्टा मारा, उससे हथियार छीना और उसे पीछे हटने पर मजबूर किया। इस साहसिक कार्य में अहमद खुद दो गोलियां लगने से घायल हो गए, लेकिन उनकी बहादुरी से कई जानें बच गईं।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स ने अहमद को "सच्चा हीरो" करार दिया। अस्पताल में उनकी मुलाकात के दौरान मिन्स ने कहा, "उनकी अविश्वसनीय बहादुरी ने निस्संदेह अनगिनत जानें बचाईं।" गोफंडमी कैंपेन पर उनके लिए एक दिन में 13 लाख डॉलर से ज्यादा दान जमा हो गए, जिसमें यहूदी समुदाय के बड़े दानकर्ता भी शामिल थे।
नेतन्याहू की राजनीतिक कोशिश और उसकी सीमाएं इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले की निंदा करते हुए ऑस्ट्रेलियाई सरकार पर आरोप लगाया कि फिलिस्तीन राज्य को मान्यता देने जैसी नीतियों ने "यहूदिविरोधी आग में घी डाला"। उन्होंने इसे पश्चिमी देशों में यहूदियों की सुरक्षा से जोड़ने की कोशिश की। लेकिन अहमद की बहादुरी ने इस कथानक को कमजोर कर दिया। नेतन्याहू ने खुद अहमद की तारीफ की और कहा, "एक बहादुर मुस्लिम व्यक्ति ने निर्दोष यहूदियों की जान बचाई।"
यह मानवतावादी कार्य धार्मिक विभाजन की राजनीति को चुनौती देता है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से सच्चाई तेजी से फैली और किसी एकतरफा कथा को थोपना मुश्किल हो गया। ऑस्ट्रेलियाई समाज ने व्यक्तिगत साहस को सराहा, न कि धार्मिक पहचान को। मुस्लिम समुदाय ने भी हमले की कड़ी निंदा की और एकजुटता दिखाई।
मानवीय मूल्यों की जीत यह घटना साबित करती है कि हिंसा का राजनीतिक उपयोग तब असफल हो जाता है जब मानवता की मिसालें सामने आती हैं। अहमद जैसे नायक दिखाते हैं कि साहस और सहानुभूति किसी धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया और जनता ने मानवीय पहलू पर फोकस किया, जिससे सामाजिक एकता मजबूत हुई। दुनिया भर में यह संदेश गया कि नफरत के खिलाफ प्यार और बहादुरी ही असली हथियार हैं।
अहमद की बहादुरी न केवल जानें बचाई, बल्कि विभाजनकारी राजनीति को भी करारा जवाब दिया। यह हमें याद दिलाता है कि संकट में मानवता ही सबसे बड़ी ताकत है।
सज्जाद अली नायाणी ✍